Friday , 2 October 2026

ईरान पर दोबारा भीषण हमले की तैयारी में अमेरिका ! ट्रंप ने मिडिल ईस्ट भेजा तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, 10 हजार अतिरिक्त सैनिक तैनात

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में किसी भी वक्त एक बड़े युद्ध का धमाका हो सकता है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति को अप्रत्याशित स्तर तक बढ़ाने में जुट गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने क्षेत्र में तीसरा विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) और नौसैनिक मरीन कमांडो से लैस अतिरिक्त युद्धपोत रवाना कर दिए हैं। इस नए सैन्य जमावड़े के साथ ही मिडिल ईस्ट में करीब 9 से 10 हजार और अमेरिकी सैनिकों की आमद होगी। वाशिंगटन का यह आक्रामक कदम ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सामरिक ठिकानों पर नए सिरे से हवाई और मिसाइल हमले शुरू करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ये लड़ाकू विमान, युद्धपोत और नौसैनिक दल नवंबर के आखिरी हफ्ते तक तय मोर्चे पर तैनात हो जाएंगे।

नवंबर में दोबारा बमबारी की तैयारी, ट्रंप ने सहयोगियों को दिए संकेत

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी रणनीतिकारों और सहयोगियों से स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें नवंबर के महीने में ईरान पर फिर से व्यापक बमबारी शुरू होने की पूरी संभावना नजर आ रही है। इसी कड़ी में अमेरिकी नौसेना का विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट’ सैन डिएगो बंदरगाह से नियमित मिशन के तहत रवाना हो चुका है। इसके साथ ही तीन युद्धपोतों से लैस ‘यूएसएस मेकिन आइलैंड’ एंफीबियस समूह भी अपनी तैनाती के लिए कूच कर चुका है, जिसमें 13वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के घातक लड़ाके मौजूद हैं।

मिडिल ईस्ट में पहली बार 3 एयरक्राफ्ट कैरियर, 60 हजार के पार पहुंचेगी फौज

मौजूदा समय में मिडिल ईस्ट के समुद्री मोर्चे पर अमेरिका के दो महाबली विमानवाहक पोत—’यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश’ और ‘यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन’ पहले से ही कमान संभाले हुए हैं। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जॉर्ज वॉशिंगटन नए पोत थियोडोर रूजवेल्ट के पहुंचने तक यहीं बना रहता है, तो बीते अप्रैल के बाद यह पहला मौका होगा जब इस अशांत क्षेत्र में अमेरिका के तीन-तीन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप एक साथ ताल ठोकेंगे। 28 फरवरी को दोनों देशों के बीच भड़की सैन्य जंग के बाद हुआ अस्थायी सीजफायर ध्वस्त हो चुका है और रुक-रुककर हमले जारी हैं। इसके अलावा यूएसएस बॉक्सर युद्धपोत दस्ता भी क्षेत्र में निगरानी कर रहा है। नए दस्तों के आने से खाड़ी में पहले से तैनात 50 हजार अमेरिकी सैनिकों का आंकड़ा बढ़कर 60 हजार के करीब पहुंच जाएगा।

पेंटागन की चुप्पी और ट्रंप का अल्टीमेटम, खारिज हुआ ईरान का सीजफायर प्रस्ताव

सैन्य हलचलों के बीच यह चर्चा भी है कि जॉर्ज वॉशिंगटन को वापस जापान भेजा जा सकता है, जिससे वाहक पोतों की संख्या वापस दो रह जाएगी; हालांकि व्हाइट हाउस और पेंटागन ने इस तैनाती पर अभी आधिकारिक टिप्पणी से परहेज किया है। उधर, ट्रंप ने हाल ही में ईरान द्वारा रखे गए 7 दिनों के संघर्ष विराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। टाइम मैगजीन को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के तुरंत बाद ईरान पर विध्वंसक सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। ईरान ने अपने प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता की पेशकश की थी, जिसके बदले वह ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म कराना चाहता था।

82वीं एयरबोर्न डिवीजन और एयर डिफेंस यूनिट्स भी मोर्चे पर तैनात

तेज होती हलचलों के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एयर डिफेंस यूनिट्स और सेना की एलीट 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की मौजूदगी को भी बढ़ा दिया है। एयर डिफेंस सिस्टम ईरान की घातक बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन हमलों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने के लिए मुस्तैद किए गए हैं, जबकि 82वीं एयरबोर्न डिवीजन पैराशूट के जरिए दुश्मन के इलाके में उतरकर एयरबेस पर कब्जा करने और त्वरित स्पेशल ऑपरेशन को अंजाम देने में माहिर है। अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, खाड़ी में पहले से तैनात करीब 20 युद्धपोत ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों व व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा कवच देने में जुटे हैं।

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