Friday , 2 October 2026

सूरत में 4 साल बाद खुला खौफनाक राज: नानी, मां और बहन की हत्या कर सीमेंट के ड्रम में दबाया शव, पत्नी को फंसाने की साजिश में बेनकाब हुआ आरोपी….इस तरह खुला राज़

गुजरात के सूरत जिले के कोसांबा से रूह कंपा देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक ही परिवार की तीन महिलाओं की सिलसिलेवार हत्याओं की साजिश का पर्दाफाश पूरे 4 साल बाद हुआ है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और कोसांबा पुलिस की संयुक्त टीम ने वडफालिया स्थित एक मकान के आंगन से कंक्रीट की मोटी परत तुड़वाकर कंकाल बरामद किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस तिहरे हत्याकांड की साजिश रचने वाला मुख्य आरोपी खुद ही अपनी पत्नी को फंसाने के चक्कर में पुलिस के पास पहुंचा था, लेकिन खाकी की पैनी नजरों ने उसके बुने जाल की धज्जियां उड़ा दीं।

पत्नी को जेल भेजने के चक्कर में खुद के पैरों पर मारी कुल्हाड़ी पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी माधवदास और उसकी पत्नी उर्मिला ने मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया था। हाल ही में दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखा विवाद हुआ, जिसके बाद माधवदास अपनी पत्नी को ठिकाने लगाने के लिए अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पहुंचा। उसने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी पत्नी उर्मिला और उसके चचेरे भाई अफजल उर्फ पोटो दीवान ने मिलकर नानी शांताबेन की हत्या की है। पुलिस ने जब अफजल को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की तो उसका इस मामले से कोई सरोकार नहीं निकला। यहीं से पुलिस का शक सीधे माधवदास पर गहरा गया और जब सख्ती से पूछताछ शुरू हुई तो एक-एक कर तीन हत्याओं का काला सच बाहर आ गया।

2022 में चंद महीनों के अंतराल पर तकिए से दबाया सांसों का दम पूछताछ में सामने आया कि आरोपी दंपती ने वर्ष 2022 के भीतर ही आठ महीनों के दौरान तीन हत्याएं कीं। पहली वारदात 25 फरवरी 2022 को हुई, जब उर्मिला की बहन भगवतीबेन वसावा का तकिए से मुंह दबाकर कत्ल कर दिया गया। भगवतीबेन टीबी से जूझ रही थीं, इसलिए परिजनों और समाज को बीमारी से मौत की बात कहकर उनका शव दफना दिया गया। इसके बाद 19 जुलाई 2022 को माधवदास ने अपनी खुद की मां मंजुलाबेन भक्तिराम साधु को निशाना बनाया। वह पैरालिसिस के चलते बिस्तर पर थीं। दंपती ने बीमारी से मौत का ढोंग रचा और शव का अंतिम संस्कार कर मामले को रफा-दफा कर दिया।

लाश पर डाली 3 बोरी सीमेंट, कोरोना का बहाना बनाकर दबाया सच तीसरी और सबसे खौफनाक वारदात 7 अक्टूबर 2022 को उर्मिला की नानी शांताबेन गंभीरभाई वसावा के साथ हुई। सोते समय शांताबेन का तकिए से मुंह घोंटकर कत्ल किया गया और साक्ष्य मिटाने के लिए उनके शव को लोहे के ड्रम में ठूंस दिया गया। आरोपियों ने ड्रम में तीन बोरी सीमेंट और पानी डालकर कंक्रीट का मजबूत ब्लॉक तैयार कर दिया ताकि बदबू बाहर न फैले। करीब साढ़े तीन महीने बाद ड्रम काटकर शव को सीमेंट ब्लॉक समेत घर के बरामदे में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया और ऊपर से पक्का फर्श बना दिया गया। पड़ोसियों और रिश्तेदारों से बचने के लिए झूठ फैलाया गया कि नानी की मौत कोरोना से हुई थी और महामारी के नियमों के चलते अस्पताल ने शव नहीं सौंपा।

आंगन में 5 फीट नीचे खुदाई कर निकाले गए मानव अवशेष माधवदास के कबूलनामे के बाद पुलिस टीम फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को साथ लेकर वडफालिया स्थित घर पर पहुंची। आंगन की पक्की सीमेंट की परत को तोड़कर जब 4 से 5 फीट तक गहरी खुदाई कराई गई, तो वहां से मानव कंकाल के टुकड़े बरामद हुए। पुलिस ने सभी अवशेषों को सील कर डीएनए और फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस अब आरोपी माधवदास और उसकी पत्नी उर्मिला के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की गंभीर धाराओं में कानूनी शिकंजा कस रही है।

 

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