Wednesday , 30 September 2026

1 अक्टूबर 2026 से बदल रहे हैं ये 3 बड़े नियम: रसोई गैस सब्सिडी, बैंक एफडी और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र पर सीधा असर, जेब पर पड़ेगा प्रभाव

नई दिल्ली। हर महीने की पहली तारीख आम आदमी की जिंदगी और बजट में कई बदलाव लेकर आती है। 1 अक्टूबर 2026 से भी देश में वित्तीय लेनदेन, रसोई गैस की सब्सिडी और नागरिक सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बदलने जा रहे हैं। कल से लागू होने वाले इन नए प्रावधानों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब, बचत और सरकारी दस्तावेजों की प्रक्रिया पर पड़ेगा। एलपीजी गैस सिलिंडर पर सब्सिडी हासिल करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से लेकर बैंकों में बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की सीमा और जन्म-मृत्यु पंजीकरण के कड़े नियमों तक, जानिए 1 अक्टूबर से क्या-क्या बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।

1. LPG सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA) अनिवार्य रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर से सब्सिडी के नियमों में बड़ा बदलाव प्रभावी हो रहा है। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर का लाभ पाने के लिए ग्राहकों को ‘बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन’ (BAA) कराना अनिवार्य होगा।

  • सिलिंडर की सप्लाई नहीं रुकेगी: यदि किसी उपभोक्ता ने अब तक अपना बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं कराया है, तो भी उसकी गैस सप्लाई बंद नहीं की जाएगी। उपभोक्ता को सिलिंडर मिलता रहेगा।

  • बाजार भाव पर मिलेगा सिलिंडर: जिन उपभोक्ताओं की बायोमेट्रिक केवाईसी अधूरी रहेगी, उन्हें सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे ग्राहकों को सिलिंडर वर्तमान बाजार भाव (नॉन-सब्सिडी रेट) पर खरीदना होगा।

  • फर्जीवाड़े पर रोक का मकसद: सरकार का उद्देश्य घरेलू गैस के व्यावसायिक दुरुपयोग को रोकना और केवल पात्र व जरूरतमंद परिवारों तक सीधी सब्सिडी पहुंचाना है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 19 सितंबर 2026 तक करीब 89.9 प्रतिशत सक्रिय उपभोक्ता यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।

2. बैंक एफडी और बल्क डिपॉजिट के नियमों में संशोधन: 3 करोड़ की नई सीमा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत 1 अक्टूबर से बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़े नियम बदल रहे हैं:

  • बल्क डिपॉजिट की सीमा बढ़ी: अब 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सावधि जमा (FD) को ‘बल्क डिपॉजिट’ माना जाएगा। इससे पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि अब रिटेल डिपॉजिट की श्रेणी में आएगी।

  • ब्याज दरों में पारदर्शिता और समय सीमा: आरबीआई के निर्देशानुसार, बैंकों को प्रत्येक कार्यदिवस (Working Day) सुबह 10:00 बजे तक अपनी नई ब्याज दरें आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होंगी। इसके लिए अधिकतम 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया गया है, यानी सुबह 10:10 बजे तक नई दरें लाइव होना अनिवार्य है।

  • सभी शाखाओं में समान दर: एक ही तारीख पर समान अवधि और समान राशि वाली एफडी पर किसी बैंक की सभी शाखाओं में एक समान ब्याज दर लागू होगी, जिससे ग्राहकों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी।

3. जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के नए नियम लागू: 2 साल से अधिक देरी पर मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के नए प्रावधान 1 अक्टूबर से पूरे देश में प्रभावी हो रहे हैं। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, अब देर से पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया गया है:

  • देर से पंजीकरण पर सख्ती: संसद के दोनों सदनों से पारित और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद बने इस नए कानून में विलंबित पंजीकरण के नियम कड़े किए गए हैं।

  • न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य: यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु की घटना के 2 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद पंजीकरण का आवेदन किया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) का औपचारिक आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। बिना न्यायिक आदेश के स्थानीय रजिस्ट्रार प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकेंगे।

 

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