Wednesday , 30 September 2026

मेरठ का चर्चित ‘नीला ड्रम हत्याकांड’: 545 दिन और 126 तारीखों के बाद आज फैसले की घड़ी, क्या मुस्कान और साहिल को मिलेगी फांसी?

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ को दहला देने वाले सनसनीखेज ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ में इंसाफ का वक्त आ गया है। पति सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर शव को नीले ड्रम में सीमेंट से जमाने के इस खौफनाक मामले में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा आज अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाने जा रहे हैं। पूरे देश को झकझोर देने वाले इस हत्याकांड में करीब 545 दिन के लंबे इंतजार, 126 तारीखों की सुनवाई और 22 से अधिक गवाहों के बयानों के बाद आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला की किस्मत का फैसला तय होगा। कोर्ट रूम में दोनों आरोपियों की पेशी को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इन्हें उम्रकैद देती है या फांसी के फंदे तक पहुंचाती है।

शादी, धोखा और खौफनाक अंत: लंदन से लौटा था सौरभ यह दिल दहला देने वाला मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ राजपूत अपनी पत्नी मुस्कान और मासूम बेटी के साथ मेरठ के इंद्रानगर में रहते थे। शादी से पहले से ही मुस्कान के संबंध साहिल शुक्ला से थे, जिसका विरोध परिवार और सौरभ दोनों करते रहे। 24 फरवरी को सौरभ लंदन से लौटे थे। घर में पहले पत्नी और फिर 28 फरवरी को बेटी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। किसी को अंदेशा नहीं था कि मुस्कान अपने प्रेमी के साथ मिलकर एक खौफनाक साजिश रच चुकी है। 3 मार्च की रात मुस्कान ने खाने में नशीली गोलियां मिलाकर सौरभ को दीं और फिर प्रेमी साहिल को घर बुलाकर धारदार हथियारों से उसकी नृशंस हत्या कर दी।

शव के टुकड़े और सीमेंट का ड्रम: रोंगटे खड़े कर देने वाली दरिंदगी वारदात को छुपाने के लिए दोनों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। बाजार से पहले ही बड़ा नीला प्लास्टिक ड्रम, चाकू, उस्तरा, बालू और सीमेंट खरीद लिया गया था। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए, उन्हें ड्रम में डाला गया और ऊपर से सीमेंट-बालू का घोल भरकर शव को पूरी तरह जमा दिया गया। इसके बाद 4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी को ननिहाल छोड़कर साहिल संग शिमला-मनाली फरार हो गई। करीब 13 दिनों तक दोनों कैब से पहाड़ी इलाकों में घूमते रहे और खुद को पति-पत्नी बताकर होटलों में रुकते रहे। 17 मार्च को मेरठ लौटने पर जब सच का पर्दाफाश हुआ, तो 18 मार्च को पुलिस ने घर से वह खौफनाक ड्रम बरामद किया और दोनों को धर दबोचा।

अदालत में 22 गवाहों की अटूट गवाही, सरकारी वकील ने मांगी फांसी मुकदमे के दौरान अदालत में पेश हुए सभी 22 गवाहों ने सिलसिलेवार तरीके से आरोपियों की करतूत की पोल खोल दी। सौरभ के भाई बबलू और मां रेणू राजपूत ने मुस्कान और साहिल के अवैध संबंधों तथा साजिश की गवाही दी। वहीं ड्रम बेचने वाले दुकानदार सैफुद्दीन, चाकू विक्रेता अंकित, सीमेंट-बालू देने वाले व्यापारी आशू और कैब ड्राइवर अजब सिंह ने कोर्ट में दोनों की मौजूदगी की पुष्टि की। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुस्कान को कभी कोई नशीली दवा नहीं लिखी थी, जबकि मोर्चरी में ड्रम काटने वाले कारीगर अशोक और पंचनामा भरने वाले दरोगा ने कोर्ट को बताया कि ड्रम के भीतर तीन टुकड़ों में सीमेंट से जमी हुई सिरकटी लाश मिली थी। डिजिटल साक्ष्यों में कॉल डिटेल और शिमला होटल की एंट्री ने भी दोनों के गुनाह पर मुहर लगाई। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (डीजीसी क्रिमिनल) केके चौबे ने अदालत में पुरजोर मांग रखी है कि पवित्र वैवाहिक रिश्ते को कलंकित करने वाले इस जघन्य कृत्य के लिए दोनों को केवल और केवल फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

सौरभ मर्डर केस की पूरी टाइमलाइन

  • 24 फरवरी: सौरभ लंदन से मेरठ अपने घर लौटे।

  • 25 व 28 फरवरी: घर में मुस्कान और बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया गया।

  • 3 मार्च (रात): खाने में नशीली दवा देकर सौरभ को बेसुध किया गया, प्रेमी साहिल को बुलाकर हत्या की गई और शव के टुकड़े किए गए।

  • 4 मार्च: बाजार से खरीदे गए ड्रम में सीमेंट भरकर शव छिपाया, बेटी को ननिहाल छोड़ दोनों शिमला भागे।

  • 4 से 17 मार्च: शिमला-मनाली में छिपते रहे आरोपी।

  • 17 मार्च: मेरठ वापसी पर परिजनों को भनक लगी, पुलिस को सूचना दी गई।

  • 18 मार्च: पुलिस ने इंद्रानगर के मकान से नीला ड्रम बरामद कर शव निकाला, दोनों आरोपी गिरफ्तार।

  • 19 मार्च: पुलिस ने दोनों को जेल भेजा, शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया।

  • 30 सितंबर: 13 महीने के कड़े ट्रायल के बाद जिला जज की अदालत का अंतिम फैसला।

 

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