Tuesday , 29 September 2026

भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं पर अमेरिका को जयशंकर का कड़ा संदेश: सीमापार आतंकवाद और अमेरिकी बेरुखी पर जताई दो टूक नाराजगी

न्यूयॉर्क: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों की जटिलताओं पर बेबाक रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर अमेरिका की ओर से दिखाई जाने वाली अनिच्छा और असंवेदनशीलता ही दोनों लोकतांत्रिक देशों के रिश्तों में सबसे बड़ा गतिरोध बनी हुई है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक विशेष मंच से बोलते हुए उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमापार आतंकवाद पर अमेरिका के ढुलमुल रवैये को आड़े हाथों लिया।

एशिया सोसाइटी के मंच से अमेरिका को दिखाया आईना

अपने अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क स्थित प्रतिष्ठित थिंक-टैंक ‘एशिया सोसाइटी’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों में चल रही तल्खी और असहजता की असल वजहों को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल व्यापारिक मतभेद ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे बुनियादी मुद्दों पर अमेरिका की दोहरी नीतियां भारत के लिए चिंता का सबब हैं।

जयशंकर ने पड़ोसी देश की रणनीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भारत के पड़ोस में एक ऐसा देश है, जिसने आतंकवाद को अपनी राज्य नीति (स्टेट पॉलिसी) के एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का लंबा इतिहास बना रखा है।

सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं: सहयोगियों की बेरुखी से बिगड़ेगा तालमेल

विदेश मंत्री ने कड़े शब्दों में जोर दिया कि भारत के लिए उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जयशंकर ने कहा:

“अगर कोई विषय हमारे राष्ट्रीय अस्तित्व और सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील व महत्वपूर्ण है और हमारा कोई सहयोगी देश उन बुनियादी चिंताओं के प्रति आवश्यक संवेदनशीलता या सहानुभूति नहीं दिखाता, तो स्वाभाविक रूप से इससे गंभीर समस्याएं पैदा होंगी और इसका सीधा असर दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों पर पड़ेगा।”

उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी रणनीतिक साझेदारी की बुनियाद आपसी सुरक्षा चिंताओं के सम्मान पर टिकी होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल, पाकिस्तान पर ढिलाई और टैरिफ की मार

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत सभी वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामाबाद के खिलाफ वैसी सख्त व दंडात्मक कार्रवाई देखने को नहीं मिली जैसी अपेक्षित थी। विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान पाकिस्तान को आतंकवाद के मोर्चे पर ठोस जवाबदेह ठहराने में संकोच देखा गया है, जिसे लेकर नई दिल्ली में गहरी असंतुष्टि है।

इसके साथ ही, ट्रंप प्रशासन की आक्रामक आर्थिक और व्यापारिक नीतियों ने भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव को बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा सहयोगी देशों पर लगाए जा रहे भारी व्यापारिक शुल्क और रूस से तेल आयात करने वाले मुल्कों पर 100 फीसदी तक दंडात्मक टैरिफ लगाने की चेतावनियों ने द्विपक्षीय व्यापार में अड़चनें खड़ी की हैं।

हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक में भी व्यापारिक टैरिफ, वीजा प्रतिबंध और सुरक्षा सहयोग से जुड़े इन जटिल मुद्दों पर गंभीर बातचीत हुई थी। जयशंकर के इस ताजा बयान से साफ है कि भारत अपनी सामरिक प्राथमिकताओं और सुरक्षा हितों पर किसी भी वैश्विक शक्ति के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

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