उज्जैन: धर्मनगरी उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर पैदा हुआ गतिरोध बातचीत के बाद सुलझ गया है। मास्टर प्लान की जद में आ रहे शाही मस्जिद के हिस्से को मंगलवार सुबह से स्वेच्छा से हटाने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों, शहर काजी और मस्जिद प्रबंधन समिति के बीच हुई मैराथन बैठक में सहमति बनने के बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि, मस्जिद की दीवार का सटीक दायरा कितना हटेगा, इसको लेकर तकनीकी पहलुओं पर अंतिम फैसला होना अभी शेष है।
बातचीत से सुलझा गतिरोध, मुस्लिम समाज ने विकास कार्यों में दिया सहयोग
मस्जिद प्रबंधन से जुड़ी नुमाइंदा कमेटी के प्रमुख सदस्य फहीम सिकंदर ने बताया कि प्रशासन, शहर काजी और कमेटी के पदाधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा के बाद शांतिपूर्ण वातावरण में काम पूरा करने पर पूर्ण सहमति बनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों और नगर के विकास का पूरा सम्मान करता है। कमेटी की शुरुआती मंशा धार्मिक ढांचे को अधिकतम सुरक्षित रखने की थी, किंतु जब सड़क चौड़ीकरण के लिए कटाई अपरिहार्य पाई गई, तो व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रभावित हिस्से को खुद हटाने का सामूहिक निर्णय लिया गया।
प्रशासन की मशीनों के बिना समुदाय ने खुद शुरू किया कार्य
सिकंदर के अनुसार, प्रशासन की तरफ से तोड़फोड़ के लिए कोई भारी मशीनरी नहीं लगाई गई थी, बल्कि समुदाय के लोगों ने आपसी सहमति से खुद ही मस्जिद की दीवार का प्रभावित हिस्सा अलग करना शुरू किया। मस्जिद का कितना हिस्सा हटेगा, इसे लेकर फिलहाल 3 से 8 फीट के बीच तकनीकी विमर्श चल रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता कुलदीप पाठक ने बताया कि नगर निगम प्रशासन ने शुरुआत में लगभग 9.5 फीट हिस्से को हटाने की बात कही थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत करीब 3 फीट हिस्सा हटाने पर आम सहमति बन चुकी है। संपूर्ण कार्य को व्यवस्थित रूप से पूरा होने में करीब 7 से 8 दिन का समय लग सकता है।
संवाद में देरी से उपजा था भ्रम, आंसू गैस के बाद शांत हुआ तनाव
रविवार रात तक मस्जिद का हिस्सा स्वेच्छा से हटाने के निर्णय की जानकारी आम लोगों तक सही समय पर नहीं पहुंच सकी थी। इस संचार गैप और गलतफहमी के चलते सोमवार को मौके पर तनाव व्याप्त हो गया था और आक्रोशित भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया था। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस बल को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। बाद में वरिष्ठ मुस्लिम धर्मगुरुओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने जनता के बीच जाकर यह स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी प्रशासनिक दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से की जा रही है, जिसके बाद माहौल पूरी तरह शांत हो गया।
हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने समझौते के आधार पर निपटाईं दो याचिकाएं
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को शाही मस्जिद मामले से जुड़ी दो रिट अपीलों का आधिकारिक निपटारा कर दिया। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की संयुक्त पीठ के समक्ष मुस्लिम पक्ष ने नगर निगम के साथ हुए समझौते की जानकारी पेश की। अदालत ने रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि उज्जैन नगर निगम द्वारा दिए गए आश्वासन और जारी अंतरिम नोटिस दोनों पक्षों पर बाध्यकारी रहेंगे। अधिवक्ता कुलदीप पाठक ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों को तय सहमति की शर्तों का अक्षरशः पालन करने के आदेश दिए हैं।
सिंहस्थ 2028 की भव्यता के लिए मास्टर प्लान के तहत चौड़ी हो रही हैं सड़कें
उज्जैन में 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। महाआयोजन के दौरान यातायात को सुगम और निर्बाध बनाने के लिए नगर निगम मास्टर प्लान के तहत मुख्य मार्गों का चौड़ीकरण कर रहा है। शाही मस्जिद का हिस्सा भी इसी मुख्य कॉरिडोर के विस्तार क्षेत्र में आ रहा था। मंगलवार से शुरू होने वाले कार्य के दौरान सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं ताकि शांति और सौहार्द बना रहे।
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