नई दिल्ली: उत्तर भारत में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में भीषण बर्फबारी का दौर जारी है, जबकि मैदानी राज्यों में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बारिश और बर्फीली हवाओं के असर से कई इलाकों में तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मौसम में समय से पहले ही ठिठुरन बढ़ गई है। दूसरी तरफ, प्राकृतिक आपदाओं और उफनती नदियों ने कई राज्यों में खतरे की घंटी बजा दी है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन, मलबे की चपेट में आने से बच्चे की मौत, 1500 यात्री बचाए गए
उत्तराखंड में भारी बारिश के बीच केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर लगातार दूसरे दिन हुए भूस्खलन के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। पहाड़ी से अचानक गिरे भारी बोल्डर और मलबे की चपेट में आने से एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, रास्ते पर भारी मलबा जमा होने से 1,500 से अधिक तीर्थयात्री रास्ते में ही फंस गए। सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में सघन अभियान चलाकर सभी फंसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
मौसम विभाग का देर रात ढाई बजे बुलेटिन, गहरे निम्न दबाव ने म्यांमार तट पार किया
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार देर रात करीब ढाई बजे विशेष मौसम बुलेटिन जारी किया। आईएमडी के अनुसार, उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बना गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र (डीप डिप्रेशन) 13 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा। 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से रात 9:30 बजे के बीच इस सिस्टम ने 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तूफानी हवाओं के साथ क्यैकटो के पूर्व में म्यांमार तट को पार कर लिया। अगले दो दिनों के दौरान यह सिस्टम तटीय म्यांमार, पूर्वी-मध्य व पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा की ओर बढ़ते रहने की संभावना है।
यूपी में कमजोर पड़ा सिस्टम, लेकिन चक्रवाती हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब भले ही कमजोर पड़ चुका है, लेकिन चक्रवाती हवाओं का घेरा अब भी पूरी तरह प्रभावी बना हुआ है। इसके साथ ही एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के चलते उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, बिहार और अंडमान-निकोबार में गरज-चमक के साथ जोरदार बौछारें पड़ी हैं। इसके अलावा मराठवाड़ा, ओडिशा, पूर्वी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।
उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के 9 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मंगलवार को उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के 9 से अधिक राज्यों में आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। बुधवार से मौसमी गतिविधियों में कुछ कमी आने से राहत मिलने की उम्मीद तो है, लेकिन वातावरण में उमस का स्तर बढ़ सकता है। राज्यों के अनुसार स्थिति इस प्रकार रहेगी:
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: 29 सितंबर के साथ-साथ 2 से 4 अक्तूबर के दौरान तेज आंधी-तूफान और बारिश के आसार बने हुए हैं।
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उत्तराखंड: 29 सितंबर से 4 अक्तूबर के बीच पर्वतीय और मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।
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हिमाचल प्रदेश: 29 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी और झमाझम बारिश की संभावना है।
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पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: 29 सितंबर को कुछ स्थानों पर आंधी के साथ बारिश और वज्रपात की आशंका जताई गई है।
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दिल्ली, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश: छिटपुट स्थानों पर 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने और हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है।
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पूर्वी उत्तर प्रदेश: 29 और 30 सितंबर को कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट है।
आईएमडी के मुताबिक, जम्मू के ऊपर बना पश्चिमी विक्षोभ अगले 36 घंटों में पहाड़ी इलाकों से आगे निकल जाएगा। इसके बाद मंगलवार से मैदानी भागों में निचले स्तर पर तेज उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं चलने लगेंगी, जिससे धीरे-धीरे मौसम साफ होने की उम्मीद है।
हिमाचल में तीन दिन से बर्फबारी, 61 सड़कें और 49 ट्रांसफार्मर ठप
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का सबसे कड़ा प्रहार देखने को मिला है। किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बर्फबारी हुई। वहीं शिमला और धर्मशाला सहित मैदानी व मध्यवर्ती जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। राज्य के अधिकतम पारे में 8 से 10 डिग्री की तेज गिरावट से कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। बर्फबारी और भूस्खलन के चलते राज्य में 61 प्रमुख सड़कों पर वाहनों का पहिया थम गया है, जबकि बिजली के 49 ट्रांसफार्मर ठप होने से कई गांव अंधेरे में डूब गए हैं।
उत्तराखंड की व्यास घाटी में पांच फीट तक बर्फ, आदि कैलाश मार्ग बंद और किसान परेशान
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र व्यास घाटी में मौसम ने विकराल रूप ले लिया है। आदि कैलाश, नाभीढांग और कुटी गांव में दो से लेकर पांच फीट तक बर्फ की मोटी सफेद चादर जम गई है। भारी बर्फबारी के चलते कुटी से आदि कैलाश को जोड़ने वाला मुख्य यात्रा मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। बर्फबारी का नजारा देख पर्यटक तो रोमांचित हैं, लेकिन स्थानीय ग्रामीण सेब की तुड़ाई और फसलों को होने वाले भारी नुकसान की आशंका से गहरे संकट में आ गए हैं।
नेपाल में लगातार बारिश से बिहार में बाढ़ का संकट, गंडक-कोसी उफान पर
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बिहार के सीमावर्ती जिलों में तबाही मचा दी है। गंडक, कोसी और बागमती नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं, जिससे तटवर्ती निचले इलाकों में पानी घुस गया है। सुपौल और पश्चिम चंपारण जिले में अब तक 82,000 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आकर प्रभावित हो चुके हैं। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव शिविर स्थापित किए जा रहे हैं।
नेपाल में कुदरत का कहर: बागलुंग में ढही इमारत, नदी में बहा क्रूज और हिमस्खलन में 4 की मौत
नेपाल में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से हाहाकार मचा हुआ है। बागलुंग में नदी के तेज कटाव के चलते नगरपालिका का एक विशाल बहुमंजिला भवन ताश के पत्तों की तरह ढहकर नदी के तेज बहाव में समा गया। उधर, नारायणी नदी में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ने के कारण वहां बंधे एक विशाल क्रूज शिप की मजबूत रस्सियां टूट गईं। क्रूज पानी के तेज बहाव में करीब 100 मीटर तक बहता चला गया और पुल के पिलर से टकरा गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
पहाड़ों पर भी बड़ा हादसा पेश आया है। मनांग जिले में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के बेस कैंप पर रविवार को आए भीषण हिमस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है। सोमवार को बचाव दल ने दो और शव बरामद किए हैं। हिमस्खलन के बाद लापता हुए कुल 22 पर्वतारोहियों में से 10 से संपर्क स्थापित कर लिया गया है, जबकि 8 पर्वतारोही अब भी लापता हैं। इलाके में लगातार हो रही बर्फबारी, बारिश और घने कोहरे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाव दलों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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