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UN में भारत का शहबाज शरीफ पर तीखा तंज: आखिर क्या है ‘फॉर्म 47’ जिसका नाम लेकर पेटल गहलोत ने उड़ा दीं पाकिस्तान की धज्जियां?

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने अपने तीखे ‘राइट टू रिप्लाई’ से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के तमाम दावों की हवा निकाल दी। आतंकवाद, मानवाधिकार और कश्मीर राग पर पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने शहबाज सरकार को सीधे तौर पर ‘फॉर्म 47 की सरकार’ करार दे दिया। वैश्विक मंच पर भारत द्वारा इस्तेमाल किए गए इस शब्द ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। यह सियासी तंज पाकिस्तान के साल 2024 के आम चुनाव में कथित धांधली और वोट चोरी के गहरे विवादों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

क्या होता है चुनावी प्रक्रिया का ‘फॉर्म 47’?

तकनीकी रूप से समझें तो पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था में ‘फॉर्म 47’ नतीजों से जुड़ा एक अनिवार्य वैधानिक दस्तावेज है। मतदान खत्म होने के बाद संबंधित चुनाव क्षेत्र का रिटर्निंग ऑफिसर (RO) इसे जारी करता है। किसी भी विधानसभा या संसदीय क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों से आने वाले मतों को संकलित करके इसी फॉर्म के माध्यम से शुरुआती यानी अंतरिम (प्रोविजनल) नतीजे घोषित किए जाते हैं। इसमें प्रत्येक उम्मीदवार को प्राप्त कुल वैध मतों और खारिज किए गए मतों का विवरण होता है। इस दस्तावेज को बनाने के लिए पहले मतदान केंद्रों के पीठासीन अधिकारियों से फॉर्म 45 (मतदान केंद्रवार नतीजे) और फॉर्म 46 (बैलट पेपर का हिसाब) एकत्र किया जाता है। इसमें पोस्टल बैलेट शामिल नहीं होते। इसके बाद फॉर्म 48 और फिर अंतिम आधिकारिक गजट के लिए फॉर्म 49 जारी होता है। यानी प्रक्रियागत दृष्टि से फॉर्म 47 कोई अवैध दस्तावेज नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया का एक तय चरण है।

शहबाज शरीफ को क्यों कहा गया ‘फॉर्म 47 की सरकार’?

इस सामान्य चुनावी दस्तावेज का नाम पाकिस्तान की सियासत में ‘वोट चोरी’ का पर्याय तब बना, जब 8 फरवरी 2024 के आम चुनाव के परिणाम सामने आए। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि पोलिंग बूथों पर जारी मूल ‘फॉर्म 45’ में उनके समर्थित उम्मीदवार भारी मतों से जीत रहे थे, लेकिन जब आरओ दफ्तर से ‘फॉर्म 47’ जारी हुआ तो रहस्यमयी तरीके से आंकड़े पलट दिए गए। आरोप लगा कि सेना के दबाव में फर्जीवाड़ा कर नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ की पार्टी को जिताया गया। इसके बाद से ही पाकिस्तान की अवाम और विपक्ष शहबाज प्रशासन को जनादेश चुराने वाली ‘कठपुतली फॉर्म 47 सरकार’ कहकर चिढ़ाने लगे। संयुक्त राष्ट्र के मंच से पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की इसी दुखती रग पर हाथ रख दिया और याद दिलाया कि यह ताना भारत का नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के आम नागरिकों का है।

2024 के चुनाव में 12.86 करोड़ वोटर और हेराफेरी के बड़े आरोप

पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ECP) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 के आम चुनावों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 12.86 करोड़ से अधिक थी। इनमें से लगभग 6.13 करोड़ लोगों ने मतदान किया, जिससे कुल मतदान प्रतिशत महज 47.65% दर्ज हुआ। देश भर में 90 हजार से ज्यादा पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे और 10 लाख से अधिक मतदान कर्मियों को चुनावी ड्यूटी पर तैनात किया गया था। इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के बावजूद नतीजों में घंटों की असामान्य देरी और अचानक बदलते आंकड़ों ने इस चुनाव को इतिहास के सबसे विवादित चुनावों में शामिल कर दिया।

लादेन की पनाहगाह से लेकर ईशनिंदा कानूनों तक पर भारत का तीखा प्रहार

संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने शहबाज शरीफ के भाषण को बेतुका और पाखंड से भरा करार दिया। उन्होंने न्यूयॉर्क में 9/11 हमले की 25वीं बरसी का जिक्र करते हुए कहा कि अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन किसी सुदूर इलाके में नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना की शीर्ष सैन्य अकादमी के ठीक बगल में ऐबटाबाद में शान से रह रहा था। उन्होंने पाक हुक्मरानों को कठपुतली बताते हुए कहा कि यह शासन सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी उजागर किया कि पाकिस्तान दिन के उजाले में अमन की बात करता है और रात के अंधेरे में सीमाओं पर खूनी आतंकवाद को अंजाम देता है। अल्पसंख्यकों पर हो रहे जुल्म और जानलेवा ईशनिंदा कानूनों का हवाला देते हुए भारत ने कहा कि मानवाधिकारों पर उपदेश देने से पहले पाकिस्तान को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।

PoK पर अत्याचार का पर्दाफाश और ऑपरेशन सिंदूर पर सख्त रुख

जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बेबुनियाद प्रलाप को सिरे से खारिज करते हुए भारत ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न, अक्षुण्ण और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। भारतीय प्रतिनिधि ने दुनिया का ध्यान पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की दुर्दशा की ओर खींचा, जहां रावलकोट समेत तमाम इलाकों में स्थानीय जनता मनमानी हत्याओं, हिंसक दमन और बुनियादी हकों की छीना-झपटी का विरोध कर रही है। गहलोत ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि भारत अपने नागरिकों की रक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सीमा पार आतंकवादियों को साफ संदेश दिया जा चुका है कि उनके पास अब न छिपने की जगह है और न भागने का रास्ता।

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