Saturday , 26 September 2026

यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस हादसा: 19 चालान, न फिटनेस न बीमा, फिर भी दौड़ रही थी ‘मौत की बस’; 9 मौतों के बाद परिवहन तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

दिल्ली से महोबा जा रही एक निजी स्लीपर बस के यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसे का शिकार होने से 9 बेकसूर यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। इस रूह कंपा देने वाली त्रासदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किस तरह सड़कों पर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बस पर 1.75 लाख रुपये से अधिक के 19 पुराने चालान लंबित थे, बस की फिटनेस समाप्त हो चुकी थी और उसका वैध बीमा भी नहीं था। इसके बावजूद यह अनफिट बस कई जिलों और आरटीओ (RTO) क्षेत्रों की सीमाओं को पार करते हुए बेरोकटोक दौड़ती रही।

लालची ऑपरेटर और लापरवाह अफसरों का गठजोड़ बना जानलेवा

हादसे की शिकार बस ‘राज कल्पना ट्रेवल्स’ की बताई जा रही है, जो छतरपुर (मध्य प्रदेश) के बिजावर क्षेत्र के दियोरान निवासी राजकुमार शर्मा के नाम दर्ज है। यह बस दिल्ली से महोबा के लंबे रूट पर यात्रियों को लेकर जा रही थी। भारी-भरकम चालान और दस्तावेजों की कमी के अलावा बस में यात्री सुरक्षा के बुनियादी उपकरण तक नहीं थे।

आग से बचाव के जरूरी अग्निशमन उपकरण नदारद थे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। यह कोई इकलौता मामला नहीं है; इससे पूर्व लखनऊ के मोहनलालगंज में बिहार के बेगूसराय से दिल्ली जा रही एक अनफिट बस (UP-17 AT 6372) हादसे का शिकार हुई थी, जिसमें 5 लोगों ने जान गंवाई थी।

सिंगल ड्राइवर के भरोसे लंबी दूरी, झपकी आते ही मौत का तांडव

बिहार से पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच चलने वाली अधिकांश अंतरराज्यीय स्लीपर बसों में नियमों की खुली अनदेखी की जाती है:

  • डबल ड्राइवर के नियम की अवहेलना: नियमानुसार लंबी दूरी की रात में चलने वाली बसों में दो चालकों का होना अनिवार्य है, लेकिन ऑपरेटर खर्च बचाने के चक्कर में पूरी यात्रा एक ही ड्राइवर के भरोसे कराते हैं।

  • थकावट और नींद की झपकी: रातभर लगातार गाड़ी चलाने के कारण चालकों को नींद की झपकी आना आम है, जो अक्सर भीषण सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह बनती है।

  • सुरक्षा उपकरणों से परहेज: स्लीपर बसों में ऑटोमैटिक ‘फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम’ (FDSS) और कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता वाले अग्निशामक यंत्र लगाना अनिवार्य किया गया है, लेकिन धरातल पर ऑपरेटर इन प्रावधानों की खुली अनदेखी करते हैं।

फिटनेस प्रमाणपत्रों का गोरखधंधा और एटीएस पर सवाल

परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही के कारण अनफिट वाहनों को सड़कों पर चलने की हरी झंडी मिल जाती है। हाल ही में गोरखपुर के एक मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (MVI) पर ऐसी ही अनियमितता के चलते कार्रवाई हो चुकी है, जिसने अनफिट वाहन को फिटनेस जारी कर दिया था। इसके अलावा निजी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जहां मानकों की अनदेखी कर फिटनेस सर्टिफिकेट बांटे जाने के आरोप लगते रहे हैं।

लखनऊ जोन के आरटीओ (प्रवर्तन) प्रभात पांडेय के अनुसार, स्लीपर बसें अक्सर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ की सीमाओं को पार कर निकल जाती हैं। प्रवर्तन दलों द्वारा निरंतर चेकिंग और चालान की कार्रवाई की जाती है, लेकिन कई ऑपरेटर बसों की मूल बनावट और सुरक्षा उपकरणों से छेड़छाड़ करते हैं, जो अंततः गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।

 

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