
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में अहम औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग व्हाइट हाउस का दूसरा औपचारिक राजकीय दौरा करने वाले पहले चीनी राष्ट्राध्यक्ष बने हैं। दोनों नेताओं ने 2016 के बाद से विकसित हुई अपनी व्यक्तिगत मित्रता और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। यह पहला अवसर था जब दोनों नेता औपचारिक रूप से व्हाइट हाउस में एक-दूसरे से मिले। ट्रंप ने कहा कि उनके पिछले दौरे से लेकर अब तक बहुत कुछ बदल चुका है।
संतुलित व्यापार और सुपर इंटेलिजेंस पर चर्चा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-चीन संबंधों की मजबूती पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक अधिक संतुलित व्यापार संबंध विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का इतिहास और जुड़ाव काफी पुराना है।
सुरक्षा, नई तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI व सुपर इंटेलिजेंस) के मुद्दों को उठाते हुए ट्रंप ने कहा कि आज इन अहम क्षेत्रों में लिए जाने वाले फैसले आने वाले दशकों तक वैश्विक शांति और समृद्धि को आकार देंगे।
स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर बधाई और साझा भविष्य का विजन
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में खूबसूरत अमेरिका की राजकीय यात्रा पर खुशी जताई और ट्रंप परिवार के शानदार आतिथ्य सत्कार के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर भी बधाई दी।
जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों महान राष्ट्र हैं और उनके लोग भी असाधारण हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच मित्रता को आगे बढ़ाना और सहयोग का दायरा बढ़ाना है। जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि प्रमुख वैश्विक शक्तियां होने के नाते दोनों देशों पर मानव विकास और प्रगति को आगे बढ़ाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अमेरिका-चीन संबंधों के ‘विशाल जहाज’ को एक स्थिर भविष्य की ओर अग्रसर करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
निरंतर संवाद और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर जोर
पारस्परिक तालमेल को रेखांकित करते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को अपना संचार तंत्र मजबूत रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की व्यवस्थाएं अलग हैं, लेकिन निरंतर, स्पष्ट और गहन संवाद के माध्यम से आपसी अविश्वास को खत्म कर विश्वास कायम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वह और राष्ट्रपति ट्रंप एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और लगातार संपर्क में रहते हैं।
जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि हालांकि दोनों देशों की आपसी साझेदारी दुनिया की हर चुनौती का हल नहीं हो सकती, लेकिन दोनों के सहयोग के बिना दुनिया की बड़ी समस्याओं का समाधान निकलना नामुमकिन है।
व्यापारिक संबंधों पर चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि बीजिंग वाशिंगटन के साथ काम करने को तैयार है, बशर्ते अमेरिकी बाजार में चीनी कंपनियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया जाए। उन्होंने प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक रूप देने की वकालत करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आगे निकलने की स्वस्थ दौड़ होनी चाहिए, न कि एक-दूसरे को हराने की होड़।
AI का इंसानी नियंत्रण में विकास
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अपने विचार रखते हुए जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों का यह नैतिक दायित्व है कि तकनीक का विकास अच्छे और लोक-कल्याणकारी कार्यों के लिए हो। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि AI तकनीक को हमेशा इंसानों के नियंत्रण में रहना चाहिए ताकि यह पूरी मानवता के लिए सुरक्षित और लाभदायक साबित हो सके।
‘पांडा कूटनीति’ की वापसी और 1 लाख युवाओं को न्योता
इतिहास का स्मरण कराते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फासीवादी ताकतों के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाले चीनी और अमेरिकी सैनिकों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नागरिक इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को कभी नहीं भूल सकते।
जन-जन के जुड़ाव (पीपुल-टू-पीपुल टाइज) को मजबूती देने के लिए जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में स्टडी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 100,000 अमेरिकी युवाओं को चीन आने का निमंत्रण देने का ऐलान किया।
इसके साथ ही, चीन की पारंपरिक ‘पांडा डिप्लोमेसी’ के तहत घोषणा की गई कि दो विशाल पांडा (पिंग पिंग और फू शुआंग) अटलांटा चिड़ियाघर (Zoo Atlanta) में अपने नए घर में अमेरिकी नागरिकों से मिलेंगे। दोनों देशों के बीच पांडा का उपहार सदियों से सौहार्द और मित्रता का प्रतीक माना जाता रहा है।
voice of india