उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और दहला देने वाली घटना सामने आई है। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में एक सनकी कातिल ने अंधाधुंध गोलीबारी कर एक ही झटके में अपने पूरे परिवार और दो पुजारियों समेत पांच लोगों की जिंदगी खत्म कर दी। इस खूनी तांडव की दास्तान इतनी भयावह है कि मरने के बाद अपनों का कंधा तक नसीब नहीं हुआ। गांव वालों ने शवों को गांव में घुसने तक नहीं दिया, जिसके बाद एक सामाजिक संगठन ने आगे आकर अंतिम संस्कार कराया।
कैसे शुरू हुआ 7 घंटे का हाई-वोल्टेज खूनी तांडव?
घटना मंगलवार शाम की है जब अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव निवासी 40 वर्षीय अरविंद सिंह बाजार से अपने घर लौटा। उस वक्त घर में पिछले चार दिनों से चल रहा पूजा-पाठ और अनुष्ठान चल रहा था। घर पहुंचते ही अरविंद ने अनुष्ठान कर रहे पुजारियों से सवाल-जवाब शुरू कर दिया, जिससे विवाद बढ़ गया। गुस्से में आकर अरविंद ने घर में रखी अपनी रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
इस गोलीबारी में उसकी पत्नी 40 वर्षीय बबीता सिंह और दो पुजारियों 60 वर्षीय महेंद्र पाठक व 55 वर्षीय अखिलेश मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई। तीन लोगों की हत्या करने के बाद आरोपी अरविंद अपने तीन बच्चों के साथ एक कमरे में अंदर से बंद हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस और एटीएस कमांडो मौके पर पहुंचे। 7 घंटे तक चले लंबे ऑपरेशन के दौरान अरविंद ने पुलिस पर भी फायरिंग की और अपने ही बेटे शौर्य को भी गोली मार दी, जिसकी अस्पताल में मौत हो गई। जवाबी कार्रवाई में एटीएस की गोली से घायल हुए अरविंद ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया।
भूत-प्रेत के साए और पूजा-पाठ के विवाद से सुलग रहा था घर
इस वीभत्स घटना के पीछे की वजह बेहद अजीब और अंधविश्वास से जुड़ी बताई जा रही है। साल 2018 में अरविंद के भाई की हत्या हो गई थी, जिसके बाद से वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। परिजनों के मुताबिक किसी ने घर में भूत-प्रेत के साए की बात कही थी, जिसे हटाने के लिए पिछले चार दिनों से घर में अनुष्ठान कराया जा रहा था।
अरविंद इस पूजा-पाठ का लगातार विरोध कर रहा था, जबकि उसकी मां और पत्नी बबीता इसे कराना चाहती थीं। मंगलवार शाम जब उसने घर में फिर से पूजा होते देखी, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने इस खूनी वारदात को अंजाम दे डाला। वहीं, मृतका बबीता के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी बेटी को झूठा बदनाम किया जा रहा था और भूत-प्रेत के नाम पर उसे मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी।
एक ही चिता पर जली लाशें, अपनों ने मुंह मोड़ा
इस खूनी खेल का सबसे दर्दनाक और दिल दहला देने वाला पहलू अंत में सामने आया। पति अरविंद, पत्नी बबीता और उनके बेटे शौर्य के अंतिम संस्कार में न तो परिवार का कोई सदस्य शामिल हुआ और न ही ससुराल पक्ष से कोई आगे आया। स्थिति ऐसी थी कि गांव वालों ने शवों को गांव की सीमा में तक घुसने नहीं दिया और शव वाहनों को लौटा दिया।
ऐसी लाचारी की हालत में ‘भारत रक्षा दल’ नामक एक सामाजिक संगठन ने मानवता दिखाते हुए आगे बढ़कर तीनों शवों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कराया। इस खूनी संघर्ष और तबाही के बाद अब घर में सिर्फ 70 साल की बूढ़ी मां और अरविंद की दो मासूम बच्चियां—5 साल की परी और 7 महीने की नन्ही बच्ची—बची हैं, जिनका भविष्य अब भगवान भरोसे है।
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