Tuesday , 22 September 2026

लव मैरिज की तो पूरे परिवार की खैर नहीं! शादी करने वाले जोड़े के साथ रिश्तेदारों पर भी फरमान, कहां का है मामला?

हरियाणा के हिसार जिले से सामाजिक परंपराओं और कानूनी अधिकारों के टकराव का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले के आर्य नगर गांव में आयोजित एक ‘सामाजिक पंचायत’ ने प्रेम विवाह (लव मैरिज) के खिलाफ सख्त प्रस्ताव पारित करते हुए तुगलकी फरमान सुनाया है। पंचायत के फैसले के मुताबिक, गांव में जो भी युवक-युवती प्रेम विवाह करेंगे और जो परिवार उनका साथ देंगे, पूरे गांव द्वारा उनका पूर्ण सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

एक हजार ग्रामीणों की मौजूदगी में पारित हुआ प्रस्ताव

मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को आर्य नगर गांव में एक बड़ी बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें करीब 1000 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में गांव के ही युवक-युवतियों के बीच आपसी प्रेम विवाह के तीन मामले सामने आए थे। इसके बाद गांव में भारी नाराजगी फैल गई और आनन-फानन में यह पंचायत बुलाई गई।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुलवंत गोसला और अन्य ग्रामीणों का तर्क था कि वे गांव की प्रत्येक बेटी को अपनी बेटी मानते हैं, इसलिए एक ही गांव और भाईचारे के भीतर वैवाहिक संबंध बनाने की अनुमति कतई नहीं दी जा सकती। ग्रामीणों ने दावा किया कि एक ही गांव में शादी की यह नई परिपाटी उनकी सदियों पुरानी सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं के पूरी तरह खिलाफ है।

फैसले पर अमल के लिए बनेगी कमेटी, घर-घर होगी निगरानी

पंचायत केवल फरमान जारी करने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसे सख्ती से लागू कराने का खाका भी तैयार किया गया है। तय किया गया है कि इस फैसले पर पूरी तरह अमल हो रहा है या नहीं, यह देखने के लिए एक विशेष निगरानी कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी के सदस्य घर-घर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और नियम तोड़ने वालों पर गांव स्तर पर सख्ती बरती जाएगी।

चुनी हुई ग्राम पंचायत ने झाड़ा पल्ला

हैरानी की बात यह रही कि बैठक में मौजूद रहने के बावजूद आर्य नगर के सरपंच रतन सिंह ने इस फैसले से चुनी हुई ग्राम पंचायत को पूरी तरह अलग कर लिया है। सरपंच ने स्पष्ट किया कि यह कोई आधिकारिक या प्रशासनिक ग्राम पंचायत का फैसला नहीं है, बल्कि ग्रामीणों द्वारा सामाजिक स्तर पर लिया गया एक स्वतंत्र निर्णय है। इसमें चुनी हुई संवैधानिक पंचायत का कोई आधिकारिक दखल या भूमिका नहीं है।

पुलिस ने दिया सुरक्षा का भरोसा, कानूनी विशेषज्ञों ने बताया अवैध

मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। हिसार के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धांत जैन ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच करवाई जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानून के दायरे में रहकर अपनी मर्जी से विवाह करने वाले बालिग जोड़ों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं होगी।

वहीं, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कमल आनंद ने इस फरमान को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर बालिग नागरिक को अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। पंचायतों द्वारा सामाजिक बहिष्कार के ऐसे फरमानों की कानून की नजर में कोई वैधता नहीं है। इस तरह के फैसलों और दबाव बनाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत डराने-धमकाने, गैर-कानूनी जमावड़े और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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