Saturday , 3 October 2026

भारत समझौता नहीं करेगा, अपने हिसाब से खरीदेगा तेल…रूस से तेल खरीदने पर 100 प्रतिशत टैरिफ पर भारत की अमेरिका को दो टूक

नई दिल्ली। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) द्वारा रूस और ईरान से तेल-गैस की खरीद करने वाले मुल्कों पर 100 फीसदी तक भारी टैरिफ लगाने संबंधी संशोधन विधेयक पारित किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इस नए कानूनी प्रावधान से भारत पर भी भारी शुल्क लगने का जोखिम गहरा गया है, जिसे लेकर देश की आंतरिक राजनीति में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। हालांकि, भारत सरकार ने कड़ा कूटनीतिक रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है। नई दिल्ली ने साफ शब्दों में कहा है कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर ही तेल आयात का फैसला करेगा।

140 करोड़ नागरिकों की जरूरतें सर्वोपरि: विदेश मंत्रालय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी कांग्रेस में पारित इस प्रतिबंध विधेयक पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और इससे किसी भी सूरत में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारत अपनी आर्थिक वृद्धि और घरेलू खपत की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

किसी एक देश पर नहीं रहेंगे निर्भर, बाजार देखकर तय होंगे सौदे भारत सरकार ने अपनी दीर्घकालिक रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति के लिए बहु-स्रोतीय आयात नीति पर अमल जारी रहेगा। देश किसी एक सप्लायर या देश पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न वैश्विक स्रोतों से कच्चा तेल और गैस हासिल करेगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऊर्जा आयात से जुड़े तमाम निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार के बदलते समीकरणों, कीमतों और उपलब्धता को ध्यान में रखकर किए जाएंगे। गौरतलब है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभावों को लेकर बीते कुछ महीनों में दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों और अधिकारियों के बीच कई उच्चस्तरीय दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, जिनमें भारत ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है।

द्विपक्षीय तक सीमित नहीं दायरा, वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता पर जोर भारत ने वाशिंगटन को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि इस तरह के कड़े प्रतिबंधों का असर केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर समूचे वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। नई दिल्ली इसे केवल दो देशों के बीच का विवाद न मानकर व्यापक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नजरिए से देख रही है।

भारतीय उद्योगों के साथ मिलकर रणनीति तैयार करेगी सरकार 100 प्रतिशत टैरिफ के संभावित खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय, व्यापारिक और आर्थिक हितों की हिफाजत के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की घोषणा की है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह घरेलू अर्थव्यवस्था को किसी भी बाहरी झटके से सुरक्षित रखने के लिए दृढ़ है। अमेरिकी कानून से पैदा होने वाली व्यापारिक चुनौतियों से पार पाने के लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित विभाग अब देश के प्रमुख व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर एक मजबूत साझा रणनीति तैयार करेंगे।

 

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