Friday , 2 October 2026

बिहार में बाढ़ का तांडव: 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बेहाल, उफान पर गंगा-कोसी; सियासी पारा भी चढ़ा

पटना नेपाल के तराई क्षेत्रों और राज्य में लगातार जारी मूसलाधार बारिश के चलते बिहार में बाढ़ के हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे लगभग 15 जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में करीब 49.36 लाख की आबादी बाढ़ की विभीषिका झेल रही है। प्रभावित इलाकों में गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालयों से कट गया है और चारों तरफ सिर्फ पानी का सैलाब नजर आ रहा है।

गंगा, कोसी और बागमती का रौद्र रूप, खतरे के निशान से ऊपर बहाव पहाड़ी व मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश से राज्य की लगभग सभी नदियां उफान पर हैं। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर महीने में अब तक 112.7 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य से लगभग छह प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा नदी पटना के दीघा, गांधी घाट, हाथीदह के अलावा भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में लाल निशान के पार बह रही है। भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान से 1.69 मीटर ऊपर 36.19 मीटर के स्तर पर पहुंच गई। वहीं, कोसी नदी बलतारा व कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में, पुनपुन श्रीपालपुर में, बागमती बेनीबाद में और घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

15 जिलों में भारी तबाही, ये इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य के पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया जिले सैलाब की चपेट में हैं। इनमें से पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय और अररिया की स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक बनी हुई है। रिहायशी इलाकों में पानी घुसने के कारण हजारों परिवार अपने मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों और तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

राहत-बचाव में एनडीआरएफ व एसडीआरएफ तैनात, 1,260 कम्युनिटी किचन शुरू प्रशासन ने जलमग्न इलाकों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। राज्य भर में एसडीआरएफ (SDRF) की 27 और एनडीआरएफ (NDRF) की 10 टीमें तैनात की गई हैं, जो फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। प्रभावितों के लिए 1,260 सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही 13 विशेष राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां 11,000 से अधिक लोगों के ठहरने, भोजन, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।

बराजों से भारी डिस्चार्ज, तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी नदियों के बढ़ते दबाव के बीच वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से शाम चार बजे 1.09 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं सुपौल के वीरपुर स्थित कोसी बराज से 1,63,315 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। हालांकि यह स्तर बीते 20 जुलाई के अधिकतम 2,55,425 क्यूसेक से कम है, लेकिन नदियों के पहले से भरे होने के कारण डिस्चार्ज से निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर तटबंधों की 24 घंटे लगातार निगरानी कर रहे हैं।

बाढ़ पर गरमाई सियासत: तेजस्वी यादव ने केंद्र पर लगाया सौतेले व्यवहार का आरोप प्राकृतिक आपदा के बीच बिहार का सियासी पारा भी चढ़ गया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर बाढ़ राहत पैकेज और सहायता के मामले में बिहार के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप जड़ा। तेजस्वी ने दावा किया कि बाढ़ से राज्य में 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, व्यापक स्तर पर पशुधन व फसलों की हानि हुई है और हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गुजरात जैसे राज्यों की तुलना में बिहार की उपेक्षा कर रही है। फिलहाल इन आरोपों पर केंद्र अथवा सत्तापक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

 

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