
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त और मर्यादित बनाए रखने के लिए बड़ा प्रशासनिक और धार्मिक बदलाव किया गया है। चंदा विवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच मंदिर ट्रस्ट ने गर्भगृह में सेवा देने वाले पुजारियों के लिए नए व कड़े नियम लागू कर दिए हैं। नई आचार संहिता के तहत पुजारियों के गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा पुजारियों की वेशभूषा, तिलक, क्षौर कर्म (पंचकेशी) और शारीरिक शुचिता को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक भी शुरू हो चुकी है।
पुजारियों के लिए सख्त नियम: तिलक अनिवार्य, बाहर के प्रसाद पर रोक
मंदिर की शुचिता और गरिमा बनाए रखने के लिए जारी निर्देशों के अनुसार, सभी पुजारियों को धर्म समिति द्वारा निर्धारित पारंपरिक वस्त्र ही धारण करने होंगे। साथ ही पंचकेशी (क्षौर परंपरा) का पालन और माथे पर तिलक लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
शुचिता के नियमों को सख्त करते हुए स्पष्ट किया गया है कि शौच आदि के बाद बिना स्नान किए किसी भी पुजारी को मंदिर या कोठार में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। गर्भगृह में पवित्रता का पूरा ख्याल रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा अधिकृत भोग-प्रसाद के अलावा बाहर से लाई गई किसी भी सामग्री को अंदर ले जाने पर पूरी पाबंदी रहेगी।
ड्यूटी के दौरान हंसी-मजाक पर पाबंदी, देना होगा लिखित ब्योरा
सेवाकाल के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए जारी गाइडलाइन में पुजारियों के आपसी व्यवहार को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। पुजारियों से कहा गया है कि वे मंदिर में सेवा के दौरान समूह बनाकर अनावश्यक गपशप, क्रिया-प्रतिक्रिया या हंसी-मजाक से पूरी तरह दूर रहें।
ड्यूटी के वक्त मंदिर व्यवस्थापक, धर्मगुरु और मुख्य आचार्यों के अलावा ट्रस्ट के अन्य कार्यकर्ताओं अथवा सुरक्षाकर्मियों से भी गैर-जरूरी बातचीत या संपर्क पर रोक रहेगी। पुजारियों को तय समय और निर्धारित स्थल पर ही रहना होगा। यदि किसी तरह की असंतुष्टि या असहयोग की स्थिति बनती है, तो सीधे आचार्य से संपर्क करना होगा। सेवा समाप्त होने के बाद पुजारियों को अपने सहयोगियों को लिखित में कार्य समीक्षा (हैंडओवर) सौंपनी होगी।
रामानंदी परंपरा का पालन, व्यवस्था सुधार का प्रयास
नियमों को लेकर राम मंदिर के व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इसे कोई दंडात्मक फरमान या विशेष आदेश न समझा जाए, बल्कि यह रामानंदी परंपरा के तहत पूजा-अर्चना की मर्यादा और शुचिता का पालन कराने की एक स्वाभाविक व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी के बाद से ही मंदिर की आरती और पूजा पद्धति को व्यवस्थित करने का काम चरणबद्ध तरीके से चल रहा है।
निर्माण समिति की बैठक: 4 किमी लंबी सुरक्षा दीवार और स्मारक स्तंभ पर मंथन
इस बीच, श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने निर्माणाधीन स्मारक स्तंभ और पुराने अस्थायी मंदिर क्षेत्र में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया।
बैठक के एजेंडे में मंदिर परिसर के चारों तरफ बनने वाली करीब 4 किलोमीटर लंबी बाहरी सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य प्रमुख रूप से शामिल है। नृपेंद्र मिश्र ने श्रद्धालु सुविधा केंद्र (PFC) के सभागार में कार्यदायी संस्थाओं के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ निर्माण प्रगति की समीक्षा की। 15 सितंबर को राम कथा संग्रहालय में होने वाली बैठक में ट्रस्ट के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भी पहली बार शामिल होंगे।
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