Thursday , 1 October 2026

ब्रिक्स समिट में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: UNSC में दावेदारी का चीन-रूस ने किया समर्थन, ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ में आतंकवाद और डॉलर के दबदबे पर सीधा वार

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को लेकर बेहद अहम सहमति बनी है। भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस सम्मेलन के अंत में जारी ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ में जहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी दावेदारी को रूस और चीन का खुला समर्थन मिला, वहीं सीमा पार आतंकवाद, लोकल करेंसी में व्यापार और एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया।

UNSC में भारत और ब्राजील की दावेदारी को रूस-चीन का समर्थन घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधारों पर जोर देते हुए भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन दोहराया गया। चीन और रूस ने 2022 के बीजिंग और 2023 के जोहान्सबर्ग सम्मेलनों के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा कि वे सुरक्षा परिषद सहित संपूर्ण संयुक्त राष्ट्र तंत्र में भारत और ब्राजील जैसी उभरती शक्तियों के अधिक प्रभावी और सार्थक प्रतिनिधित्व की आकांक्षाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं।

पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा, सीमा पार आतंकवाद पर सख्त रुख सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की एक स्वर में निंदा की, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। घोषणापत्र में साफ कहा गया कि आतंकवाद के किसी भी रूप को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। देशों ने आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, टेरर फंडिंग और सेफ हेवंस को पूरी तरह खत्म करने का आह्वान किया। इसके साथ ही आतंकवाद से निपटने में ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने और ‘दोहरे मापदंडों’ (डबल स्टैंडर्ड्स) को पूरी तरह खारिज करने की बात कही गई।

CCIT को तुरंत लागू करने और आतंकियों पर कार्रवाई की मांग भारत की लंबे समय से लंबित पहल ‘कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म’ (CCIT) को संयुक्त राष्ट्र में बिना किसी देरी के पारित कराने पर ब्रिक्स देशों ने सहमति जताई। सदस्य देशों ने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित सभी आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

डॉलर पर घटेगी निर्भरता, लोकल करेंसी और पेमेंट सिस्टम पर जोर वैश्विक व्यापार में वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने के मकसद से ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (BPTF) के कार्यों को आगे बढ़ाने का फैसला हुआ। सदस्य देश अब आपसी व्यापार और निवेश के निपटान के लिए अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (लोकल करेंसी) के इस्तेमाल को प्राथमिकता देंगे। इसके लिए एक सुरक्षित और तेज क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्वायत्तता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

गिफ्ट सिटी में ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’ और चीन को अगली अध्यक्षता वित्तीय ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए भारत के गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी (GIFT City) में ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’ स्थापित करने के प्रस्ताव का सभी देशों ने स्वागत किया, जिससे इंश्योरेंस और री-इंश्योरेंस सेक्टर को नया बल मिलेगा। इसके अलावा संस्थागत निरंतरता को बनाए रखते हुए 2027 में 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीन को सौंपने पर सर्वसम्मति बनी।

साइबर फ्रॉड सिंडिकेट्स और एकतरफा प्रतिबंधों पर प्रहार डिजिटल भुगतान प्रणालियों में सेंध लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय ‘स्कैम कंपाउंड्स’ और संगठित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ साझा ऑपरेशन चलाने पर सहमति बनी। घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के दायरे से बाहर जाकर लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और सेकेंडरी सैंक्शंस की तीखी आलोचना की गई, क्योंकि इनसे विकासशील देशों की खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।

ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज और न्यू डेवलपमेंट बैंक का विस्तार खाद्य सुरक्षा संकट और उर्वरक आपूर्ति में रुकावटों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच एक साझा ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ स्थापित करने की योजना पर काम तेज होगा। वहीं न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में नए देशों को जोड़ने और डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में फंडिंग व ऋण वितरण बढ़ाने का फैसला किया गया। साथ ही ब्रिक्स देशों के बीच सीधी जमा प्रणाली और निवेश के लिए एक समर्पित ‘न्यू इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म’ पर भी काम शुरू होगा।

WTO रिफॉर्म्स, कार्बन टैक्स का विरोध और ग्लोबल साउथ की पैरवी विश्व व्यापार संगठन (WTO) की विवाद निपटान प्रणाली को तुरंत बहाल करने तथा ईरान और इथियोपिया को WTO में शामिल करने का समर्थन किया गया। पर्यावरण के नाम पर लगाए जा रहे एकतरफा ‘कार्बन बॉर्डर टैक्स’ (CBAM) जैसे संरक्षणवादी कदमों का कड़ा विरोध करते हुए इसे विकासशील देशों के व्यापार के खिलाफ बताया गया। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में ग्लोबल साउथ (एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका) की आवाज और भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

गाजा संकट, टू-स्टेट सॉल्यूशन और लेबनान में शांति की अपील पश्चिम एशिया के हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए ब्रिक्स ने गाजा में तुरंत युद्धविराम, जबरन विस्थापन पर रोक और निर्बाध मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग की। साथ ही 1967 की सीमाओं पर आधारित संप्रभु फिलिस्तीन के निर्माण (टू-स्टेट सॉल्यूशन) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। लेबनान में इजरायली बलों की वापसी, सीजफायर बनाए रखने और यूएन शांतिरक्षकों (Peacekeepers) पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।

भारतीय डीपीआई मॉडल और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा भारत के सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल को ब्रिक्स के मंच पर व्यापक सराहना मिली। सम्मेलन में स्टार्टअप इनोवेशन फंड, ‘ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क’ और छोटे व मझोले उद्योगों (MSME) की नकदी समस्या सुलझाने के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग सिस्टम को संयुक्त रूप से विकसित करने पर मुहर लगी।

 

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