Monday , 28 September 2026

होर्मुज में तनाव: ईरान का दावा- जासूसी कर रहा अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन ‘REMUS 600’ पकड़ा, डेटा खंगालने में जुटे विशेषज्ञ…जानिए इसकी खासियत 

सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में शुमार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने अमेरिकी नौसेना से जुड़े एक अत्याधुनिक स्वायत्त अंडरवॉटर ड्रोन (AUV) ‘REMUS 600’ को जब्त करने का दावा किया है। ईरान का सीधा आरोप है कि यह मानवरहित रोबोटिक सबमर्सिबल क्षेत्र में संवेदनशील समुद्री निगरानी और जासूसी मिशन को अंजाम दे रहा था। इस घटना के बाद IRGC की तकनीकी टीम ड्रोन के सिस्टम से गोपनीय डेटा और नेविगेशन लॉग निकालने में जुट गई है। हालांकि, अमेरिका की ओर से अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी नहीं किया गया है।

एक ही महीने में दूसरा ड्रोन जब्त करने का दावा

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी निगरानी उपकरणों को लेकर ईरान की आक्रामकता लगातार बढ़ रही है। IRGC के अनुसार, यह इसी महीने पकड़ा गया दूसरा अमेरिकी अंडरवॉटर वाहन है। इससे पहले 8 सितंबर को भी ईरानी सुरक्षाबलों ने इसी इलाके में एक अन्य अमेरिकी मानवरहित सबमर्सिबल को पकड़ने की घोषणा की थी। लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों से साफ है कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले इस संकरे जलमार्ग में दोनों देशों के बीच खुफिया जंग काफी तेज हो चुकी है।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और प्री-प्लांड ऑपरेशन से हुई जब्ती

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस जब्ती को एक बेहद जटिल और पहले से तैयार ऑपरेशन का परिणाम बताया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, पानी के भीतर चुपचाप चलने वाले इस ड्रोन को ट्रैक करने के लिए एडवांस्ड इंटेलिजेंस सर्विलांस और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। सिग्नल और नेविगेशन को बाधित कर इसे अपने नियंत्रण में लिया गया। वर्तमान में यह ड्रोन IRGC के साइबर और सैन्य विशेषज्ञों की निगरानी में है, जो इसके एनक्रिप्टेड हार्ड ड्राइव्स, सेंसर्स और रिकॉर्डेड डेटा को डिकोड करने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या है REMUS 600 और क्यों है यह इतना खास?

REMUS 600 कोई साधारण रिमोट-नियंत्रित पानी का खिलौना या बेसिक ड्रोन नहीं है, बल्कि यह एक हाई-टेक ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV) है। इसे ऑपरेटर द्वारा मिशन के अनुसार पहले से पूरी तरह प्रोग्राम किया जाता है, जिसके बाद यह पानी के भीतर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के खुद अपना रास्ता तय करने, डेटा जुटाने और लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम होता है।

  • डेवलपर व डिजाइन: इसे विश्व प्रसिद्ध वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन (WHOI) द्वारा विकसित किया गया है। इसका डिजाइन मॉड्यूलर है, जिसका अर्थ है कि मिशन की प्रकृति (वैज्ञानिक खोज, हाइड्रोग्राफिक सर्वे या सैन्य निगरानी) के हिसाब से इसमें कैमरे, साइड-स्कैन सोनार और खुफिया सेंसर बदले जा सकते हैं।

  • गहराई क्षमता: जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, यह समुद्र के भीतर 600 मीटर (लगभग 2,000 फीट) की गहराई तक उतरकर काम कर सकता है।

  • आकार व वजन: इसका व्यास लगभग 32.4 सेंटीमीटर और कुल वजन करीब 240 किलोग्राम होता है।

  • रेंज और बैकअप: यह सिंगल मिशन में करीब 70 घंटे तक पानी के भीतर सक्रिय रह सकता है और इसकी परिचालन सीमा 286 समुद्री मील (लगभग 530 किलोमीटर) तक दर्ज की गई है (यह आंकड़े पेलोड और बैटरी कॉन्फ़िगरेशन के आधार पर भिन्न हो सकते हैं)।

पानी के नीचे जासूसी और माइंस तलाशने की असली ताकत

इस मानवरहित ड्रोन की असली मारक क्षमता इसके एडवांस सेंसर्स और सी-बेड मैपिंग की खूबी में छिपी है। इसमें लगे हाई-फ्रीक्वेंसी साइड-स्कैन सोनार, डॉपलर वेलोसिटी लॉग और मैग्नेटोमीटर समुद्र की तलहटी का हूबहू 3D नक्शा तैयार करने, पानी के नीचे बिछाई गई समुद्री माइंस (विस्फोटक) का पता लगाने और छिपी हुई पनडुब्बियों या डूबे जहाजों की सटीक पहचान करने में सक्षम हैं।

यही तकनीकी खूबी होर्मुज जैसे रणनीतिक चोकपॉइंट पर इसे बेहद खतरनाक खुफिया हथियार बनाती है। इस जलमार्ग से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है, जिससे यहां पानी के नीचे की गतिविधियों पर नजर रखना रणनीतिक तौर पर बेहद अहम हो जाता है। यद्यपि ईरान ने इस मिशन को जासूसी करार दिया है, लेकिन ड्रोन के उस समय के वास्तविक टास्क और मिशन प्रोफाइल की कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आ सकी है।

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