Friday , 9 October 2026

सूरजपुर डबल मर्डर केस : हेड कांस्टेबल की पत्नी और 10 साल की बेटी की निर्मम हत्या में 3 को फांसी, 1 को उम्रकैद; कोर्ट बोला- ‘हैवानियत पर मुस्कुराने वालों को जीने का हक नहीं’

सूरजपुर/अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित और दिल दहला देने वाले हेड कांस्टेबल तालिब शेख के परिवार पर हुए खूनी हमले के मामले में सूरजपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नजीर पेश करने वाला ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दोहरे हत्याकांड की इस रूह कंपा देने वाली वारदात के ठीक 725 दिन बाद न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियर की अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा मुकर्रर की है, जबकि एक अन्य दोषी को उम्रकैद सुनाई गई है। अदालत ने अपने फैसले में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस बर्बरता से निहत्थी मां और मासूम बच्ची पर चाकुओं से दर्जनों प्रहार किए गए, वह अमानवीयता की सारी हदें पार करता है। अदालत ने विशेष तौर पर रेखांकित किया कि सजा के ऐलान के बाद भी दोषियों के चेहरों पर रत्ती भर पछतावा नहीं दिखा और वे मुस्कुरा रहे थे, जिससे साबित होता है कि ऐसे समाज-विरोधी तत्वों में सुधार की कोई गुंजाइश बाकी नहीं है।

अंबिकापुर सेंट्रल जेल से वीसी के जरिए पेशी, कोर्ट ने तय की सजा न्यायालय ने अंबिकापुर सेंट्रल जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए पेश किए गए अभियुक्तों पर सख्त फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को धारा 103(1) और 3(5) बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) के तहत फांसी की सजा और 25,000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया। साथ ही धारा 70(1) के अंतर्गत प्राकृतिक मृत्यु तक जेल और अन्य संगीन धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दूसरे दोषी फूल सिंह उर्फ रिंकू और तीसरे दोषी चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके को भी धारा 103(1), 3(5) बीएनएस में फांसी, 25,000 रुपये जुर्माना तथा अन्य धाराओं में उम्रकैद व कठोर कारावास का आदेश दिया गया। चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई, जबकि पुख्ता साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने दो आरोपियों—सूरज साहू और निल्केश्वर साहू को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया।

जगराता से शुरू हुआ विवाद और बदले की खूनी साजिश इस खौफनाक हत्याकांड की पटकथा 9 अक्टूबर 2024 की रात शहनाज अख्तर के जगराता कार्यक्रम से लिखी जानी शुरू हुई थी। कार्यक्रम स्थल पर मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का नवापारा के स्थानीय युवकों से विवाद हुआ था। इसके दो दिन बाद पुलिस टीम पूछताछ के सिलसिले में संदीप साहू को थाने ले गई, जहां उसके साथ कथित रूप से मारपीट हुई। संदीप का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, जिसके चलते कुलदीप साहू बदले की आग में झुलसने लगा। उसका सूरजपुर थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल तालिब शेख से पुराना विवाद भी चल रहा था और उसने पुलिस की इस कार्रवाई का बदला लेने के लिए सीधे तालिब शेख के परिवार को तबाह करने की सुनियोजित साजिश रच डाली।

मां पर 33 और मासूम पर 28 वार: दरिंदगी की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तान अंधे बदले की सनक में कुलदीप साहू अपने हथियारों से लैस साथियों के साथ हेड कांस्टेबल तालिब शेख के घर में जबरन घुस गया। उस वक्त हेड कांस्टेबल अपनी ड्यूटी पर तैनात थे और घर पर केवल उनकी पत्नी मेहू फैज और 10 वर्ष की अबोध बेटी मौजूद थीं। दरिंदों ने दोनों को बंधक बना लिया। लोक अभियोजक सुरेश शर्मा के अनुसार, आरोपियों ने हैवानियत की सारी सीमाएं लांघते हुए 10 साल की मासूम बच्ची के जिस्म पर 28 बार और मां पर 33 बार चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए। दोनों की तड़प-तड़प कर मौत होने के बाद साक्ष्य मिटाने के मकसद से शवों को सुनसान झाड़ियों में फेंककर आरोपी फरार हो गए थे।

फैसले पर भी हत्यारे की बेशर्म मुस्कान, जज ने फैसले में किया खास जिक्र अदालत ने इस मामले में 29 सितंबर को ही आरोपियों को दोषी ठहरा दिया था। उस दौरान जब मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला जा रहा था, तब मीडिया कैमरों के सामने वह बेखौफ होकर बेशर्मी से मुस्कुराते हुए पोज दे रहा था। इस अमानवीय आचरण को न्यायाधीश ने अपने विस्तृत आदेश में विशेष रूप से दर्ज किया। कोर्ट ने सख्त लहजे में लिखा कि इतने वीभत्स और जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद भी जो शख्स अदालती कार्रवाई और सजा के सामने मुस्कुराए, उसकी मानसिकता में सुधार की रत्ती भर उम्मीद नहीं बची है और ऐसे अपराधियों को सभ्य समाज में सांस लेने का कोई अधिकार नहीं है।

 

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