
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल की राजनीति और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए भदोही जिले का नाम बदलने की घोषणा की है। अब यह जिला आधिकारिक तौर पर ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से पहचाना जाएगा। भदोही में आयोजित 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो के मंच से रविवार को मुख्यमंत्री ने इस नामकरण की घोषणा की। इससे पहले जुलाई में भी उन्होंने जिले के नाम के साथ संत रविदास का नाम जोड़ने के संकेत दिए थे। सरकार इस कदम को संत रविदास के सम्मान, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जोड़कर देख रही है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे पूर्वांचल के दलित मतदाताओं तक पैठ मजबूत करने की भाजपा की रणनीति के रूप में आंक रहे हैं।
तीन दशकों में पांच बार बदला नाम: क्या है भदोही का नामकरण इतिहास
भदोही जिले का नाम बदलने का सिलसिला करीब तीन दशक पुराना है, जिसमें राज्य की बदलती सरकारों के साथ कई मोड़ आए:
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30 जून 1994: तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने वाराणसी से अलग कर भदोही को एक स्वतंत्र जिले का दर्जा दिया।
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4 दिसंबर 1997: मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार ने जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ किया।
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1999: तत्कालीन भाजपा सरकार के दौर में स्थानीय पहचान को बनाए रखने के लिए नाम में भदोही जोड़ते हुए इसे ‘संत रविदास नगर भदोही’ किया गया।
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6 दिसंबर 2014: अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सरकार ने संत रविदास नगर हटाकर पुनः जिले का नाम सिर्फ ‘भदोही’ कर दिया।
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4 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरानी व्यवस्था को बहाल करते हुए जिले का नाम फिर से ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया।
संत रविदास की विरासत और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत रविदास ने सामाजिक समानता, बंधुत्व और जातिगत भेदभाव मिटाने का पुरजोर संदेश दिया था। उत्तर भारत, विशेषकर पूर्वांचल और दलित समाज के बड़े वर्ग में उनकी शिक्षाओं के प्रति अगाध आस्था है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संत रविदास की सोच बिना किसी भेदभाव के सभी को बुनियादी सुविधाएं और सम्मान देने की थी, जिसे वर्तमान डबल इंजन सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और मुफ्त राशन वितरण के जरिए धरातल पर उतार रही है। वाराणसी के निकट स्थित होने के कारण इस फैसले का असर पूर्वांचल के सियासी समीकरणों पर भी पड़ेगा, जहां 2027 के चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को अपने पाले में लाने की होड़ में हैं।
वैश्विक कालीन उद्योग और ऐतिहासिक विरासत का संतुलित संगम
भदोही को विश्व पटल पर ‘कालीन नगरी’ के रूप में जाना जाता है, जिससे लाखों बुनकरों और हस्तशिल्पियों की आजीविका व करोड़ों रुपये का विदेशी निर्यात जुड़ा हुआ है। नाम परिवर्तन के दौरान सरकार ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि जिले के नाम से ‘भदोही’ शब्द को हटाया न जाए। नए नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ के जरिए एक तरफ जहां संत रविदास की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय कालीन उद्योग की सदियों पुरानी वैश्विक ब्रांडिंग और पहचान को भी पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
1340 करोड़ की 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
नाम बदलने की इस ऐतिहासिक घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री ने भदोही, औराई और ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सपा सरकार पर विकास योजनाओं की अनदेखी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश नीतिगत जड़ता, दंगों और माफियाराज से जूझ रहा था, जबकि आज प्रदेश ने ‘बीमारू’ राज्य की छवि को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रदेश सरकार आगामी छह महीनों के भीतर एक लाख और युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां देने जा रही है।
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