Monday , 5 October 2026

‘शरीर से आत्मा निकालने जैसा…’ वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की दो टूक, CEC के इस्तीफे पर सड़क से अदालत तक संग्राम

नई दिल्ली मतदाता सूची में गड़बड़ी और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर देश में सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सड़कों पर मोर्चा खोल दिया है, वहीं यह पूरा विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है। एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर सीईसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिस पर सोमवार को अहम सुनवाई होनी है। इसी गहमागहमी के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां का एक बड़ा और बेहद सख्त बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि करोड़ों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी व्यवस्था पूरी तरह मनमानी और असंवैधानिक है।

‘नागरिकों को वोट से वंचित करना शरीर से आत्मा खींचने जैसा’ हैदराबाद स्थित नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में आयोजित 19वीं नालसार-जस्टिस बीआर साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन पर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने लोकतांत्रिक अधिकारों पर बेबाक राय रखी। किसी का नाम लिए बिना उन्होंने दो टूक कहा कि अगर किसी प्रक्रिया से करोड़ों भारतीय मतदान के अधिकार से महरूम हो जाते हैं और अपनी ही सरजमीं पर दोयम दर्जे के नागरिक बन जाते हैं, तो वह प्रक्रिया पूरी तरह असंवैधानिक और मनमानी है। जस्टिस भुइयां ने जोर देकर कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु न हुई हो, तो वोटर लिस्ट में दर्ज उसका नाम बिना पूर्व नोटिस और विधिवत सुनवाई के किसी भी सूरत में नहीं काटा जा सकता। किसी भारतीय नागरिक से उसका मताधिकार छीनना उसके शरीर से आत्मा अलग करने के समान है।

‘संविधान में दो तरह के नागरिकों की कोई जगह नहीं’ जस्टिस भुइयां ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान दो श्रेणियों के नागरिकों की कल्पना नहीं करता—एक जिनके पास वोट का अधिकार हो और दूसरे जो इससे वंचित हों। उन्होंने कहा कि नागरिकों को मताधिकार से बेदखल करने की कोई भी कोशिश सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 की मूल भावना पर हमला है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि देश की कोई भी अथॉरिटी या संस्था संविधान से ऊपर नहीं है और कोई भी अदालत इस तरह के असंवैधानिक कदम को जायज नहीं ठहरा सकती।

‘स्वतंत्रता संग्राम की देन है हर वोट की बराबर कीमत’ मताधिकार के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भले ही इसे मौलिक अधिकार के बजाय संवैधानिक अधिकार मानता रहा हो, लेकिन वास्तव में यह संविधान के ‘मूल ढांचे’ (बेसिक स्ट्रक्चर) का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वोट देने का यह अधिकार विदेशी हुकूमत के खिलाफ हमारे पुरखों के लंबे संघर्ष और बलिदानों की देन है, इसलिए अनुच्छेद 326 से कोई छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं हो सकती। चाहे कोई देश का बड़ा अरबपति हो या फिर रोज मेहनत-मजदूरी करने वाला रिक्शा चालक, हमारे लोकतंत्र में दोनों के पास वोट का समान हक है और दोनों के वोट का मूल्य भी बिल्कुल बराबर है।

सड़क पर उतरा विपक्ष: दिल्ली से मुंबई तक भारी विरोध कानूनी मोर्चे के साथ-साथ इस मसले पर सड़क पर भी जबरदस्त टकराव देखने को मिल रहा है। मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के नेतृत्व में ‘गर्जना मोर्चा’ निकालकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई गई। वहीं देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का केंद्र जंतर-मंतर, अशोक रोड और इंडिया गेट बना हुआ है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं ने लगातार तीसरे दिन जोरदार मार्च निकाला। आंध्र भवन सर्कल से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे आइसा कार्यकर्ताओं ने एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में नरेला इंडस्ट्रियल एरिया थाने से रिहा किया गया।

आप और यूथ कांग्रेस का हल्लाबोल, हिरासत में लिए गए कई नेता एसआईआर प्रक्रिया में विसंगतियों को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली में आक्रामक प्रदर्शन किया। आप कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के नारे लगाते हुए इंडिया गेट तक पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस ने करीब 25 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप दिल्ली के संयोजक सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा शामिल रहे। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने कैमरों की नजर से बचाने के लिए बदसलूकी की, जबकि संजीव झा ने कहा कि नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे को पुलिसिया कार्रवाई या दबाव से दबाया नहीं जा सकता। उधर, इंडियन यूथ कांग्रेस ने भी जंतर-मंतर की ओर जोरदार मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोका। यूथ कांग्रेस ने मशाल जुलूस और कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब ने दो टूक चेतावनी दी कि जब तक एसआईआर में कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही तय नहीं होती और मुख्य चुनाव आयुक्त पद नहीं छोड़ते, उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।

 

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