Sunday , 27 September 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: पुलिस चार्जशीट में बैंककर्मियों को ‘क्लीन चिट’ पर खड़े हुए सवाल, जांच के दायरे में थे दो बैंककर्मी, फिर बाहर कैसे?

अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में हेरफेर और चोरी के मामले में पुलिस की चार्जशीट ने जांच प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चढ़ावे की पेटियों से निकलने वाली राशि की गिनती से लेकर बैंक के खाते में जमा होने तक बैंक कर्मियों और अधिकारियों की भूमिका निर्धारित थी। पहली एसआईटी की जांच में भी गणना प्रक्रिया और बैंक अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था में कई खामियां उजागर हुई थीं। इसके बावजूद दाखिल चार्जशीट में बैंक कर्मियों को आरोपी न बनाए जाने से पूरी कानूनी कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है।

पहली एसआईटी की पड़ताल और नियमों की अनदेखी

प्रारंभिक जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई थी कि चढ़ावे की गणना के लिए तैनात कर्मचारियों के साथ बैंक अधिकारियों की रोटेशन के आधार पर अनिवार्य ड्यूटी लगनी थी। इतना ही नहीं, गणना कक्ष में काम करने वाले कर्मियों के लिए निर्धारित वर्दी और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने का दायित्व भी बैंक प्रबंधन से जुड़ा था। आरोप है कि मौके पर इन निर्धारित नियमों का पालन नहीं कराया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी और व्यवस्था में सीधी भूमिका थी, तो इस स्तर पर हुई घोर लापरवाही की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?

जांच के दायरे में थे दो बैंककर्मी, फिर बाहर कैसे?

मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने बैंक कर्मियों से लंबी पूछताछ की थी और दो कर्मचारियों की संलिप्तता जांच के घेरे में होने की पुष्टि भी हुई थी। अब चार्जशीट में उन्हें शामिल न किए जाने पर कानूनी प्रक्रिया पर संदेह गहरा रहा है:

  • दस्तावेजी सत्यापन: क्या संदिग्ध कर्मियों के बयानों का मिलान गणना रजिस्टर और बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड से किया गया?

  • सीसीटीवी फुटेज: क्या गणना कक्ष और बैंक तक रकम ले जाने के दौरान कर्मियों की गतिविधियों का फुटेज से सत्यापन हुआ?

  • निष्कर्ष का आधार: यदि उनकी भूमिका में आपराधिक संलिप्तता नहीं मिली, तो चार्जशीट में उन्हें क्लीन चिट देने का पुख्ता आधार क्या दर्ज किया गया है?

बैंक की आंतरिक विभागीय जांच पर भी पर्दा

जानकारी के अनुसार, जुलाई माह में बैंक प्रबंधन ने भी अपने स्तर पर विभागीय जांच शुरू की थी, जिसके दायरे में कई कर्मचारी आए थे। अब यह तथ्य भी सार्वजनिक होना जरूरी है कि उस आंतरिक जांच में क्या निष्कर्ष निकले और क्या वे निष्कर्ष पुलिस डायरी या चार्जशीट का हिस्सा बने? यदि विभागीय जांच और पुलिस जांच में विरोधाभास था, तो उसका निवारण किस आधार पर किया गया?

नई एसआईटी के समक्ष जवाबदेही तय करने की बड़ी चुनौती

अब इस पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ने का दारोमदार नवगठित विशेष जांच दल (SIT) पर है। नई एसआईटी को यह स्पष्ट करना होगा कि:

  1. चढ़ावे की रकम की गिनती के वक्त निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी किसकी थी?

  2. गणना से लेकर बैंक में रकम जमा होने तक की पूरी चेन में सत्यापन किसके हस्ताक्षर से हुआ?

  3. तय व्यवस्था के बावजूद ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?

  4. ट्रस्ट के व्यवस्थापकों और शीर्ष पदाधिकारियों की इस व्यवस्था में क्या भूमिका और जवाबदेही थी?

चार्जशीट की कमियों को दूर कर असल दोषियों और मददगारों तक पहुंचना ही अब जांच दल की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

 

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