
यमन के प्रमुख बंदरगाह शहर अदन के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार रात ताबड़तोड़ दो मिसाइलें आकर गिरीं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। राहत की बात यह रही कि इस भयानक मिसाइल हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बीते 10 दिनों के भीतर अदन एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किया गया यह दूसरा हमला है। ईरान समर्थित क्षेत्रीय तनाव के बीच यमन में गृहयुद्ध की आग एक बार फिर भड़क उठी है, जहां विद्रोही पड़ोसी मुल्क सऊदी अरब और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सऊदी समर्थित यमन सरकार दोनों पर लगातार घातक प्रहार कर रहे हैं।
48 घंटे में दूसरा बड़ा हमला, गुरुवार को महल परिसर पर बरपा था कहर
अदन शहर में पिछले दो दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा हमला दर्ज किया गया है। इससे पहले गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने अदन स्थित सरकारी परिसर (महल परिसर) को निशाना बनाते हुए भीषण हमला बोला था, जिसमें कम से कम पांच लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे हमलों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
रनवे पर खड़े विमान से महज 500 मीटर दूर गिरीं मिसाइलें, बाल-बाल बचे यात्री
यमन सरकार के सूचना मंत्री के अनुसार, जिस समय हवाई अड्डे पर मिसाइलें आकर गिरीं, उस वक्त ‘यमेनिया एयरवेज’ का एक यात्री विमान उड़ान भरने की तैयारी में जुटा था। मिसाइलें विमान से महज 500 मीटर की दूरी पर जाकर गिरीं। एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि जोरदार धमाके के तुरंत बाद विमान में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा नागरिक विमान हादसा टल गया। उधर, यमन के परिवहन मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी भर्त्सना करते हुए इसे नागरिक ठिकानों और अहम सरकारी संपत्तियों को तबाह करने की सुनियोजित साजिश करार दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि विद्रोही निर्दोष नागरिकों की जान को जानबूझकर जोखिम में डाल रहे हैं।
हूती मीडिया का दावा: सऊदी गठबंधन के कमांड सेंटर को बनाया निशाना
हमले के संदर्भ में हूती विद्रोहियों के एक अनाम सैन्य अधिकारी ने हूती नियंत्रित ‘सबा’ समाचार एजेंसी को बताया कि उनका मकसद हवाई अड्डे के समीप स्थित उस सैन्य ठिकाने को तबाह करना था, जहां सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना का कमांड सेंटर और हथियारों का एक बड़ा डिपो मौजूद है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले 7 अक्टूबर को भी हूती लड़ाकों ने हवाई अड्डे पर दो मिसाइलें दागी थीं, जिसमें कोई जनहानि नहीं हुई थी।
सऊदी के तेल ठिकानों और रियाद एयरपोर्ट पर हमले, गृहयुद्ध फिर भड़का
यमन में संघर्ष के इस नए चरण ने भीषण गृहयुद्ध को फिर से हवा दे दी है। राजधानी सना के हवाई अड्डे पर हुए हमलों और विद्रोहियों पर लंबे समय से जारी आर्थिक नाकेबंदी के विरोध में हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपनी खुद की आक्रामक नाकेबंदी छेड़ रखी है। इसके बाद से विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इन हमलों से हजारों उड़ानों को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा और रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत अन्य जगहों पर हुए हमलों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी ‘अरामको’ (Aramco) के मुख्यालय पर हुए हमलों ने भी वैश्विक तेल बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
बाब अल-मंदेब और होर्मुज स्ट्रेट पर संकट, वैश्विक बाजार में हलचल
हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तटवर्ती इलाकों की ओर बढ़त बनाते हुए सामरिक रूप से बेहद अहम ‘बाब अल-मंदेब स्ट्रेट’ (Bab el-Mandeb Strait) के कई हिस्सों पर कब्जा जमा लिया है। ईरान के संभावित खतरों के बीच यह जलमार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक विकल्प के रूप में काम करता है। हूतियों को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से खदेड़ने और कब्जाए गए इलाकों को मुक्त कराने के लिए सऊदी नीत सैन्य गठबंधन ने इसी महीने एक व्यापक सैन्य अभियान छेड़ा है। इस सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को झकझोर कर रख दिया है, वहीं यमन के आम नागरिक—विशेष रूप से वर्षों से घेराबंदी झेल रहे ताइज शहर के निवासी—गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे हैं।
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