
उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने जमीनी स्तर पर अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े के लगातार दौरों और बैठकों के बाद अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद चुनावी कमान संभालने लखनऊ पहुंच रहे हैं। लखनऊ में 30 और 31 अक्टूबर को भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस महामंथन में ‘मिशन 2027’ के पूरे रोडमैप को अंतिम रूप देने के साथ-साथ प्रत्याशियों के चयन की रूपरेखा और कसौटियों पर गहन चर्चा होगी।
तावड़े के फीडबैक के बाद शाह का रणनीतिक मंथन
अमित शाह के दौरे की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े पिछले कुछ समय से संगठन के पदाधिकारियों और नवनियुक्त सह-प्रभारियों के साथ लगातार मैराथन बैठकें कर रहे हैं। तावड़े ने क्षेत्रीय स्तर पर संगठन की वास्तविक स्थिति, जमीनी समीकरणों और कमजोर बूथों का विस्तृत फीडबैक तैयार किया है। कार्यसमिति में इस रिपोर्ट के आधार पर संगठन की कमजोर कड़ियों को दुरुस्त करने, शासन व संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और चुनावी तंत्र को पूरी तरह सक्रिय मोड में लाने की रणनीति तय की जाएगी।
टिकट बंटवारे के फॉर्मूले और नए चेहरों पर विचार
कार्यसमिति की इस महत्वपूर्ण बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों के चयन के मापदंडों पर भी गंभीर विमर्श हो सकता है। पार्टी मौजूदा विधायकों के कामकाज, उनके क्षेत्र में जनता के बीच छवि और सीटवार राजनीतिक समीकरणों का बारीकी से आकलन कर रही है। जिन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को भीतरघात, एंटी-इनकंबेंसी या संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहां मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर नए, ऊर्जावान चेहरों को चुनावी समर में उतारने का कड़ा फैसला लिया जा सकता है।
नाराजगी दूर करने और योजनाओं के प्रचार पर फोकस
बैठक में विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग को लेकर बनाए जा रहे माहौल और युवाओं (जेन-ज़ी) के बीच उठ रहे विरोध के सुरों को काउंटर करने की रणनीति भी बनाई जाएगी। इसके लिए डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार को मुख्य हथियार बनाया जाएगा। साथ ही, उन सामाजिक वर्गों और मतदाताओं को दोबारा पार्टी से जोड़ने पर खास जोर रहेगा, जो किसी कारणवश 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी से छिटक गए थे।
2024 के नतीजों से सीख, कमजोर सीटों पर खास घेराबंदी
2024 के आम चुनाव में सीटों के नुकसान से सबक लेते हुए भाजपा इस बार बूथ प्रबंधन को लेकर बेहद सतर्क है। पार्टी नेतृत्व का मुख्य फोकस उन विधानसभा क्षेत्रों की घेराबंदी करने पर है, जहां पिछले चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था या जीत का अंतर बेहद कम रहा था। अमित शाह की मौजूदगी में तैयार होने वाली यह रणनीति 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के पूरे अभियान की दिशा तय करेगी।
voice of india