Sunday , 25 October 2026

बस्ती में वोटर लिस्ट पर उठे सवाल: 7 हजार नाम संदिग्ध, एक ही चेहरे और पते पर जारी हो गए अलग-अलग EPIC नंबर; 152 दोहरी प्रविष्टियां चिह्नित, पढ़ें पूरी रिपोर्ट !

ब्यूरो, बस्ती। निर्वाचन आयोग की पारदर्शी मतदान व्यवस्था और मतदाता सूची की शुद्धता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में चल रहे मतदाता सूची के विशेष अभियान के दौरान ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जहां एक ही व्यक्ति का नाम दो से तीन जगह दर्ज मिला है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि कई मामलों में नाम, पता और तस्वीर बिल्कुल एक जैसी है, लेकिन मतदाता पहचान पत्र यानी ईपीआईसी (EPIC) नंबर अलग-अलग जारी कर दिए गए हैं। वहीं, कुछ मामलों में एक ही नाम पर अलग-अलग फोटो चस्पा मिली हैं। तकनीकी खामी और लचर सत्यापन के बीच बस्ती के खैर कॉलेज स्थित पोलिंग सेंटर पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने वाले नागरिकों की कतार लग गई है।

7 हजार नाम जांच के दायरे में, दोहरी प्रविष्टियों पर चलेगा आयोग का चाबुक

जिले के निर्वाचन कार्यालय से जुड़े कर्मचारी पीयूष गुप्ता ने जानकारी दी है कि वर्तमान में जिले भर में लगभग 7 हजार नाम संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी गहनता से पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी नाम डबल या फर्जी पाए जाएंगे, उन्हें मतदाता सूची से विलोपित (डिलीट) करने की नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उधर, निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 17 और 24 अक्टूबर को आयोजित विशेष अभियान में नए नाम जोड़ने के साथ-साथ त्रुटियों को दुरुस्त करने का काम तेज गति से चल रहा है, लेकिन सामने आ रहे मामलों ने प्रशासनिक अमले को पशोपेश में डाल दिया है।

एक चेहरा, एक पता… पर वोटर कार्ड तीन; खैर कॉलेज सेंटर पर खुली पोल

खैर कॉलेज केंद्र पर शिकायत दर्ज कराने पहुंची आसिया खातून का मतदाता सूची में नाम तीन अलग-अलग जगहों पर दर्ज मिला। तीनों ही जगह उनकी तस्वीर और पता एक जैसा है, लेकिन तीनों रिकॉर्ड में ईपीआईसी नंबर अलग-अलग अंकित हैं। इसी तरह गुड़िया नामक महिला का नाम दो जगह दर्ज है, जहां पति का नाम राकेश और पता समान होने के बावजूद फोटो और वोटर कार्ड नंबर दोनों में अंतर है।

तुर्कहिया से लेकर पुरानी बस्ती तक गड़बड़ियों की भरमार

तुर्कहिया निवासी कुसुम देवी की मतदाता सूची में दो बार एंट्री मिली है, जिसमें पति सौरभ का नाम और तस्वीर समान है, लेकिन दोनों जगह ईपीआईसी नंबर अलग-अलग हैं। इसी तरह अदीबा वहीद (पिता अब्दुल वहीद) और अब्दुल हमीद के मामलों में भी तस्वीर व नाम समान होने के बावजूद दोहरे ईपीआईसी नंबर दर्ज पाए गए हैं। एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग पहचान पत्र जारी होने की इस चूक ने सत्यापन प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ अलग नंबर मिलने से जानबूझकर किया गया फर्जीवाड़ा साबित नहीं होता; यह डेटा एंट्री की तकनीकी गड़बड़ी या डुप्लीकेशन रोकने वाले सॉफ्टवेयर की शिथिलता का नतीजा भी हो सकता है।

एडीएम ने की पुष्टि, बोले- डबल नाम वाली प्रविष्टियों को किया जाएगा डिलीट

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी (एडीएम) ज्ञान चंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित आलेख के बाद कई विसंगतियां संज्ञान में आई हैं। अब तक की पड़ताल में 152 नाम सूची में डबल होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इन सभी मामलों की जमीनी स्तर पर जांच की जा रही है और बीएलओ तथा संबंधित अधिकारियों की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त और दोहरे नामों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाएगा। निर्वाचन अमला अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि किसी वैध मतदाता का नाम कटे बिना पूरी सूची को त्रुटिरहित बनाया जा सके। 

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