Friday , 23 October 2026

पीएम मोदी से मुलाकात में बोले शी जिनपिंग- भारत-चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार हैं; व्यापार और सीमा शांति पर बनी सहमति

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत संपन्न हुई। सात वर्षों में पहली बार भारत दौरे पर आए शी जिनपिंग के साथ हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कूटनीतिक रिश्तों को सामान्य बनाने पर गहन विमर्श हुआ। भारत में चीनी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस ऐतिहासिक मुलाकात का ब्यौरा साझा करते हुए दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बनी रणनीतिक सहमतियों की जानकारी दी।

साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं: चीनी राष्ट्रपति का संदेश चीनी राजदूत के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक में स्पष्ट कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं, न कि प्रतिद्वंद्वी। दोनों देशों को एक-दूसरे के प्रति खतरे का दृष्टिकोण रखने के बजाय आपसी विकास और संभावनाओं के अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों प्राचीन सभ्यताओं और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को आपस में उलझने (ड्रैगन और हाथी की लड़ाई) के बजाय मिलकर समृद्धि और विकास का नया अध्याय लिखना चाहिए।

सीमा विवाद पर समझ और व्यापारिक असंतुलन दूर करने पर जोर वार्ता के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई गई। शी जिनपिंग ने सीमावर्ती इलाकों में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी समझ और संवेदनशीलता को जरूरी बताया। इसके साथ ही दोनों देशों की आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं को संतुलित तरीके से हल करने, निवेश के अनुकूल माहौल बनाने और आर्थिक सहयोग का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।

वैश्विक मंचों पर तालमेल: ब्रिक्स, एससीओ और जी20 में सहयोग बैठक में बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय को मजबूत करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र (UN), ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और जी-20 (G20) जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। इसका उद्देश्य वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को और प्रभावी बनाना है।

7 साल बाद भारत आगमन और गलवान के बाद रिश्तों को साधने की पहल साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुए हिंसक सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के संबंध दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। ऐसे में 7 वर्षों बाद चीनी राष्ट्रपति का यह भारत दौरा द्विपक्षीय गतिरोध को दूर करने की दिशा में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। हालांकि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन के सैन्य रुख को लेकर भारत की रणनीतिक चिंताएं अभी भी बरकरार हैं। इससे पूर्व दोनों नेताओं की मुलाकात 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ समिट के दौरान हुई थी, जिसने इस द्विपक्षीय संवाद की जमीन तैयार की।

 

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