Sunday , 11 October 2026

नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप: फैसले को बताया शर्मनाक, कहा- ‘मैंने 8 युद्ध रोके, मुझे मिलने चाहिए थे 8 नोबेल’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर एक बार फिर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। शुक्रवार को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए अपना नाम न चुने जाने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने चयन समिति और नॉर्वे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस फैसले को शर्मनाक और अपमानजनक करार देते हुए कहा कि नॉर्वे की साख पर ऐसा दाग लगा है, जिसे मिटाना अब मुमकिन नहीं होगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में यह भी कहा कि वे नॉर्वे के इस फैसले को कभी नहीं भूलेंगे।

नवी पिल्लै के चयन पर उठाए सवाल: ‘कोई नहीं जानता ये कौन हैं’

इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुनी गईं अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की पूर्व न्यायाधीश नवानेथेम नवी पिल्लै के चयन पर ट्रंप ने सीधे सवाल खड़े किए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज नोबेल शांति पुरस्कार एक ऐसे चेहरे को सौंप दिया गया है, जिसका नाम उन्होंने कभी सुना तक नहीं और न ही दुनिया में कोई उन्हें जानता है।

ट्रंप का आरोप है कि वैश्विक शांति और कूटनीति के क्षेत्र में किए गए उनके ऐतिहासिक योगदान को जानबूझकर दरकिनार किया गया है और चयन प्रक्रिया में उनके साथ खुला पक्षपात हुआ है।

‘मैंने 8 युद्ध सुलझाए, मुझे 8 नोबेल मिलने चाहिए थे’

ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कूटनीतिक हस्तक्षेपों को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने दुनिया भर में एक-दो नहीं, बल्कि आठ बड़े युद्धों और संघर्षों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई है। अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने कहा कि इस अभूतपूर्व काम के लिए उन्हें सिर्फ एक नहीं, बल्कि पूरे आठ नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने चाहिए थे।

उन्होंने विशेष रूप से गाजा और ईरान से जुड़े संघर्षों का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्होंने ईरान को पूरे मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका के हिस्सों में भारी तबाही मचाने से रोका। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में ईरान के साथ तनाव की मौजूदा स्थिति और गाजा में सीजफायर पर ठोस प्रगति के अभाव को देखते हुए उनके इन बड़े दावों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

भारत-पाकिस्तान सहित कई देशों के विवादों का किया जिक्र

अपनी दावेदारी को मजबूत बताते हुए ट्रंप ने उन सभी वैश्विक विवादों की फेहरिस्त भी गिनाई, जिनमें उन्होंने मध्यस्थता का दावा किया है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने का श्रेय खुद को दिया। इसके अलावा उन्होंने रवांडा और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, थाईलैंड और कंबोडिया, आर्मेनिया और अजरबैजान, मिस्र और इथियोपिया तथा सर्बिया और कोसोवो के बीच जारी विवादों में अपने हस्तक्षेप की बात कही।

हालांकि, भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप द्वारा गिनाए गए अधिकांश विवादों का अब तक कोई स्थायी या औपचारिक समाधान नहीं निकल सका है, जिसके चलते उन्हें इन संघर्षों को पूरी तरह समाप्त कराने का श्रेय देने पर वैश्विक मंचों पर बहस जारी है।

नोबेल की पुरानी चाहत और नॉर्वे पर साधा निशाना

डोनाल्ड ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार पाने की हसरत कोई नई नहीं है। वे कई वर्षों से सार्वजनिक मंचों पर यह दावा करते रहे हैं कि ऐतिहासिक कूटनीतिक समझौतों के चलते वे इस सर्वोच्च सम्मान के सबसे स्वाभाविक और मजबूत हकदार हैं। दो दिन पहले भी उन्होंने कहा था कि उन्होंने वह कर दिखाया जो इतिहास में किसी अन्य राष्ट्रपति ने नहीं किया।

पुरस्कार की दौड़ से बाहर होने के बाद ट्रंप ने नॉर्वे की नोबेल समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस एकतरफा फैसले ने नोबेल पुरस्कार की वर्षों पुरानी गरिमा और साख को गहरी चोट पहुंचाई है।

 

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