Friday , 2 October 2026

नरवाल से उजड़ते ही रोहिंग्याओं का नया चक्रव्यूह: पंजाब, नूंह से लेकर हैदराबाद तक फैलने की गुप्त तैयारी; सुरक्षा एजेंसियों का सिरदर्द बढ़ा

जम्मू ब्यूरो। जम्मू के संवेदनशील नरवाल इलाके से प्रशासन द्वारा अवैध बस्तियों और दुकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद रोहिंग्या अब गुपचुप तरीके से देश के अन्य राज्यों में नए ठिकाने तलाशने की जुगत में जुट गए हैं। पिछले 18 वर्षों से जम्मू में जड़ें जमाकर स्थानीय भाषा, बोली और संस्कृति में पूरी तरह रच-बस चुके इन रोहिंग्याओं का अलग-अलग हिस्सों में बिखरना सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया तंत्र के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बन गया है। प्रशासनिक कार्रवाई से बचने और अपनी असल पहचान छिपाने के लिए ये लोग जहां एक तरफ सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंजाब, हरियाणा के नूंह से लेकर हैदराबाद और बेंगलुरु तक अपने पुराने संपर्कों के जरिए फैलने की सोची-समझी रणनीति बना रहे हैं।

खामोशी के पीछे बड़ा षड्यंत्र, पहले रिश्तेदार फिर दूसरे राज्यों का रुख नरवाल से अवैध झुग्गियां और दुकानें हटाए जाने के बाद इन परिवारों द्वारा साधी गई रहस्यमयी चुप्पी को जांच एजेंसियां एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा मान रही हैं। इस गुप्त योजना के तहत रोहिंग्याओं की पहली प्राथमिकता जम्मू के ही अन्य इलाकों में रह रहे अपने रिश्तेदारों के पास छिपकर शरण लेने की है। यदि स्थानीय स्तर पर छिपने में विफलता मिलती है, तो वे तुरंत दूसरे राज्यों के चिन्हित शहरों की ओर कूच करेंगे। नरवाल से अपना सामान समेट रहे सद्दाम ने स्वीकार किया कि उनकी पहली कोशिश जम्मू के सुरक्षित ठिकानों पर रिश्तेदारों के पास जाने की है। वहां पनाह न मिलने की स्थिति में वे पंजाब, हरियाणा के मेवात-नूंह, हैदराबाद या बेंगलुरु जाने का विकल्प चुनेंगे, जहां उनके समुदाय के पुराने नेटवर्क पहले से सक्रिय बताए जाते हैं।

18 वर्षों से जमा रखी थीं जड़ें, वेशभूषा और स्थानीय भाषा ने बढ़ाई एजेंसियों की मुश्किल वर्ष 2008 से जम्मू में डेरा डाले इन रोहिंग्याओं ने बीते 18 सालों में स्थानीय डोगरी व कश्मीरी बोली, पहनावे और खानपान को पूरी तरह अपना लिया है। नरवाल में एक ही क्लस्टर में रहने के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के लिए इनकी निगरानी करना अपेक्षाकृत आसान था, लेकिन अब इनका छोटे-छोटे समूहों में बिखरना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है। स्थानीय लोगों जैसे रहन-सहन और भाषा पर पकड़ के कारण भीड़भाड़ में इनकी पहचान करना, ट्रैवल हिस्ट्री खंगालना और संभावित ठिकानों को ट्रैक करना सुरक्षाबलों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है।

तीन राज्यों में सुरक्षा अलर्ट जारी, पड़ोसी जिलों में पैनी नजर रोहिंग्याओं के जम्मू के आंतरिक इलाकों में घुसपैठ करने की आशंका को देखते हुए उधमपुर, कठुआ, रियासी, पुंछ और राजौरी जिलों के प्रशासनिक व पुलिस तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसके साथ ही अंतरराज्यीय स्तर पर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को भी संभावित आवाजाही पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संदिग्ध लोगों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया जा सके।

कंटेनमेंट सेंटर में रखकर सीधे म्यांमार डिपोर्ट करे सरकार: पूर्व डीजीपी एसपी वैद जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. एसपी वैद ने प्रशासन के इस कदम को जरूरी बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। जम्मू जैसे बेहद संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में ऐसे अनधिकृत लोगों की मौजूदगी हमेशा से सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा रही है। पूर्व डीजीपी ने जोर देकर कहा कि सरकार को अब इस बात की सख्त निगरानी करनी चाहिए कि ये लोग किस दिशा में जा रहे हैं। इन्हें देश के अन्य राज्यों या शहरों में नई अवैध बस्तियां बसाने से रोकने के लिए तुरंत कंटेनमेंट सेंटर बनाकर डिटेन किया जाना चाहिए और विधिक प्रक्रिया पूरी कर सीधे म्यांमार डिपोर्ट किया जाना चाहिए।

 

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