दिल्ली में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख को एक बार फिर आगे बढ़ाते हुए 4 नवंबर से 4 दिसंबर कर दिया है। इसके साथ ही जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से गायब हैं या जिनके रिकॉर्ड में खामियां मिली हैं, उन्हें अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 30 अक्टूबर तक का अतिरिक्त समय मिल गया है।
नोटिस मिलने पर दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति, BLO घर आकर लेंगे पेपर्स
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गईं और जिन्हें नोटिस जारी हुए हैं, उनके लिए चुनाव आयोग ने नियमों में बड़ी ढील दी है। अब ऐसे मतदाताओं को अपनी बात रखने के लिए हर हाल में चुनाव दफ्तर की सुनवाई में पेश होने की बाध्यता नहीं रहेगी। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद संबंधित मतदाता के घर जाकर सत्यापन के लिए जरूरी दस्तावेज एकत्र करेंगे। इन पेपर्स को सीधे ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा, जिसके आधार पर निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) अंतिम निर्णय लेंगे।
तकनीकी दिक्कतें और कम आवेदनों के चलते CEO ने मांगा था अतिरिक्त समय
निर्वाचन आयोग ने यह फैसला दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) की ओर से 23 सितंबर को भेजे गए विशेष अनुरोध पत्र के बाद लिया है। अधिकारियों के अनुसार, ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए नए आवेदनों की संख्या उम्मीद से काफी कम रही। इसके अलावा ऑनलाइन सिस्टम में आई तकनीकी बाधाओं और बीएलओ पर काम के अत्यधिक दबाव को देखते हुए समयसीमा बढ़ाना जरूरी हो गया था। अब सभी दावों, आपत्तियों और नोटिसों का निस्तारण 30 नवंबर तक पूरा किया जाएगा।
14 मई से चल रहा अभियान, चौथी बार बदली फाइनल लिस्ट की तारीख
दिल्ली में 14 मई को शुरू हुए इस विशेष अभियान के शेड्यूल में यह चौथा बड़ा बदलाव है। शुरुआत में तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार अंतिम वोटर लिस्ट 7 अक्टूबर को आनी थी। इसके बाद तारीखों को संशोधित करते हुए क्रमशः 19 अक्टूबर, 27 अक्टूबर और 4 नवंबर किया गया था। अब अंतिम रूप से संशोधित मतदाता सूची 4 दिसंबर को सार्वजनिक की जाएगी।
ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए 47.5 लाख नाम, 33 लाख से ज्यादा को नोटिस
अगस्त के अंत में जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आंकड़े चौंकाने वाले रहे हैं। दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 47.5 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए। डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन के दौरान ये लोग या तो घर पर नहीं मिले, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके थे, मृत पाए गए या फिर इनके नाम दोहरी प्रविष्टि (डुप्लीकेट) में दर्ज थे। वहीं, ड्राफ्ट सूची में जगह पाने वाले करीब 97.5 लाख मतदाताओं में से भी 33.13 लाख वोटरों को नोटिस भेजे गए हैं। इनमें से 13.79 लाख लोग पुराने रिकॉर्ड से अपना मिलान साबित नहीं कर सके, जबकि 19.33 लाख फॉर्मों में तार्किक गलतियां पाई गईं। प्रभावित मतदाताओं के पास अपनी नागरिकता और पते से जुड़े वैध कागजात जमा कर नाम सुरक्षित कराने के लिए अब 30 अक्टूबर तक का मौका है।
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