Saturday , 26 September 2026

त्योहारों से पहले सोने-चांदी में भारी गिरावट: 4 दिन में ₹7,000 सस्ती हुई चांदी, सोना ₹2,500 टूटा; क्या करवाचौथ-दिवाली पर फिर लौटेंगे रिकॉर्ड भाव?

त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले कीमती धातुओं के बाजार में निवेशकों और खरीदारों के लिए चौंकाने वाला रुझान देखने को मिला है। सोमवार से गुरुवार तक लगातार चार कारोबारी सत्रों में सोने और चांदी की कीमतों में तीव्र गिरावट दर्ज की गई। महज चार दिनों के भीतर चांदी करीब ₹7,000 प्रति किलोग्राम और सोना लगभग ₹2,500 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है। आगामी करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे प्रमुख पर्वों के मद्देनजर जब पारंपरिक रूप से सर्राफा बाजार में खरीदारी अपने चरम पर होती है, तब आई इस नरमी ने खरीदारों और निवेशकों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी या बाजार दोबारा तेजी की राह पकड़ेगा।

चार दिनों का लेखा-जोखा: जानिए ताजा बाजार भाव

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को बाजार बंद होने तक दोनों धातुओं में जोरदार बिकवाली देखी गई:

धातु ताजा भाव दैनिक गिरावट 4 दिनों की कुल गिरावट
24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम) ₹1,51,000 ₹1,231 ~₹2,500
चांदी (प्रति 1 किलोग्राम) ₹2,28,000 ₹4,518 ~₹7,000

त्योहारी मांग से ठीक पहले आई इस गिरावट ने आम उपभोक्ताओं को खरीदारी का एक राहत भरा अवसर जरूर दिया है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशक इसे वैश्विक समीकरणों के नजरिए से देख रहे हैं।

हेज फंड मैनेजर का दावा: मौजूदा गिरावट महज ‘अस्थायी’

वैश्विक बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की कीमतों में आई यह हालिया सुस्ती बहुत ज्यादा समय तक नहीं टिकने वाली है। ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख हेज फंड मैनेजर राफेल लैम—जो मार्क लांडाऊ के साथ मिलकर करीब 1.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर) के प्रतिष्ठित ‘एल1 गोल्ड फंड’ का प्रबंधन करते हैं—का आकलन है कि यह गिरावट सिर्फ एक तात्कालिक सुधार (करैक्शन) है। गौरतलब है कि उनके लॉन्ग-शॉर्ट गोल्ड फंड ने लॉन्च के बाद से निवेशकों को 200 फीसदी से अधिक का शुद्ध रिटर्न दिया है।

लैम का तर्क है कि सोने की दीर्घकालिक तेजी की नींव रखने वाले बुनियादी कारक आज भी पूरी तरह बरकरार हैं और वे जल्द ही कीमतों को नई दिशा देंगे।

किन ताकतों से दोबारा रफ्तार पकड़ेंगे सोने-चांदी के दाम?

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग से बातचीत में राफेल लैम ने उन प्रमुख वजहों को रेखांकित किया, जो मीडियम से लॉन्ग टर्म में सोने को मजबूत सहारा देंगी:

  • अस्थिर राजकोषीय स्थिति: विकसित अर्थव्यवस्थाओं और प्रमुख वैश्विक बाजारों की वित्तीय स्थिति नाजुक दौर से गुजर रही है। विशेषकर अमेरिकी सरकार पर बढ़ता $40 ट्रिलियन से अधिक का भारी कर्ज भविष्य में मुद्रा अवमूल्यन और वित्तीय अस्थिरता का जोखिम बढ़ा रहा है।

  • केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए लगातार भौतिक सोने का संचय कर रहे हैं।

  • भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं: अमेरिका-ईरान युद्ध के हालात, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वास्तविक ब्याज दरों (Real Interest Rates) का उतार-चढ़ाव सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प (Safe Haven) के रूप में शीर्ष पर बनाए रखेगा।

जंग और ब्याज दरों का दबाव: 16% तक टूटे भाव

जनवरी में रिकॉर्ड उच्चतम स्तर को छूने के बाद से सोने के बाजार पर लगातार बिकवाली का दबाव देखा गया है। ऊर्जा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते मुद्रास्फीति का खतरा बना रहा, जिसके कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं ने सोने जैसी गैर-उपज (Non-yielding) धातु के आकर्षण को तात्कालिक रूप से सीमित किया।

फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 16 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि युद्ध के शुरुआती झटके के बाद अब बाजार के बुनियादी कारक फिर से हावी होंगे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल: 4,286 डॉलर पर कारोबार

सिडनी बाजार में गुरुवार शाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $4,286.01 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। लैम ने अपनी रणनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जब सोने का भाव $4,000 प्रति औंस के नीचे फिसला था, तब उनके फंड ने काफी आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी लॉन्ग पोजिशन में भारी बढ़ोतरी की थी। वर्तमान में फंड अपनी नेट लॉन्ग पोजिशन को 60 से 65 फीसदी के दायरे में बनाए हुए है और कीमतों में अपेक्षित उछाल आने पर ही रणनीति में बदलाव पर विचार करेगा।

अस्वीकरण: यह सामग्री केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत की गई है। वित्तीय बाजारों और कमोडिटी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश या खरीदारी से पूर्व अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। 

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