
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों वाले नए कानून पर दस्तखत कर दिए हैं। इस कानून का प्राथमिक लक्ष्य रूस के ऊर्जा निर्यात को पंगु बनाना और उससे बड़े पैमाने पर तेल व गैस खरीदने वाले देशों को कड़ा सबक सिखाना है। नए प्रावधानों के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विवेकाधिकार मिल गया है कि वे रूस से ऊर्जा आयात करने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100 फीसदी तक का आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकते हैं।
नए प्रतिबंध कानून को व्हाइट हाउस से मंजूरी
व्हाइट हाउस की ओर से आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध कानून, 2026’ को अंतिम मंजूरी दे दी है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने बुधवार को ही इस विधेयक को भारी समर्थन से पारित किया था। यह कानून अमेरिकी प्रशासन को रूस पर कानूनी पाबंदियां, कड़े टैरिफ और व्यापारिक रोक लगाने के व्यापक अधिकार सौंपता है, साथ ही तेहरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों का दायरा भी और कड़ा करता है।
रूसी तेल के खरीदारों पर 100% शुल्क का प्रावधान
इस कानून की सबसे सख्त धारा रूसी तेल और गैस के खरीदार मुल्कों से जुड़ी है। राष्ट्रपति ट्रंप के पास अब यह तय करने का अधिकार सुरक्षित है कि किस देश पर कितना शुल्क लगाया जाए। यदि वाशिंगटन भारत जैसे प्रमुख खरीदारों पर अधिकतम 100% टैरिफ लगाने का विकल्प चुनता है, तो इसका सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। इससे अमेरिकी बाजारों में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिसका दबाव भारतीय निर्यातकों और व्यापार संतुलन पर देखने को मिल सकता है।
रूसी ‘शैडो फ्लीट’ और बैंकिंग तंत्र पर सीधा वार
इस नए कानून का नामकरण साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में किया गया है, जिन्होंने इस मसौदे को तैयार करने में साल भर से अधिक समय तक काम किया था। कानून के जरिए रूसी ऊर्जा का गुप्त रूप से परिवहन करने वाले ‘शैडो फ्लीट’ टैंकरों, शीर्ष अधिकारियों और प्रमुख वित्तीय संस्थानों को सीधे तौर पर लक्षित किया गया है ताकि मॉस्को की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके।
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