
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाते हुए एक नया AI सलाहकार यानी “AI ज़ार” नियुक्त करने और विशेष “AI फ़ोर्स” गठित करने की योजना का ऐलान किया है। शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर पोस्ट साझा करते हुए ट्रंप ने इस नई रणनीति की जानकारी दी। हालांकि, इस नए तंत्र का प्रशासनिक ढांचा कैसा होगा और इसे किस स्तर पर लागू किया जाएगा, इसकी विस्तृत रूपरेखा अभी साझा नहीं की गई है।
उद्योग पर बंदिशें नहीं, विकास को मिलेगी पूरी रफ्तार
राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि उनका प्रशासन AI उद्योग के पांव बांधने या उसकी रफ्तार को थामने के पक्ष में कतई नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद इस उभरती तकनीक के विकास में हर मुमकिन सहयोग देना है। अगर इस तकनीक के जरिए किसी तरह की गड़बड़ी या गैरकानूनी गतिविधियां सामने आती हैं, तो उनसे निपटने के लिए मौजूदा आपराधिक न्याय प्रणाली का ही इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिया कि वे उद्योग पर भारी-भरकम बंदिशें थोपने के बजाय इसे आगे बढ़ाएंगे, इसकी मदद करेंगे और साथ ही इसके विस्तार पर पैनी नजर भी रखेंगे।
सुपरपावर बनने की होड़: अमेरिका-चीन में AI रेस तेज
डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला ऐसे बेहद नाजुक मोड़ पर आया है, जब गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी अहम बैठक प्रस्तावित है। वर्तमान में वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करने की भीषण होड़ मची है। दोनों ही महाशक्तियां अपनी भविष्य की आर्थिक समृद्धि और सैन्य शक्ति के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रीढ़ मानती हैं। ट्रंप और सिलिकॉन वैली के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि सख्त कानूनी पाबंदियों से अमेरिकी कंपनियों की गति धीमी पड़ जाएगी, जिसका सीधा फायदा चीनी टेक कंपनियों को मिलेगा। इसी रणनीतिक समीकरण के बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की रविवार को न्यूयॉर्क स्थित जेपी मॉर्गन चेस मुख्यालय में चीन के वाइस प्रीमियर हे लिफेंग से मुलाकात तय है, जहां AI सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार और अन्य अहम आर्थिक विषयों पर गहन मंथन होगा।
सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बरकरार
तकनीक के बेलगाम विस्तार को लेकर कई सुरक्षा विशेषज्ञ और अमेरिकी सांसद लगातार आगाह कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त निगरानी के यह तकनीक बड़े खतरे पैदा कर सकती है। हाल ही में एआई रिसर्च कंपनी एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने भी चेतावनी दी थी कि इसे विकसित करने वाले कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दशक में यह तकनीक मानव अस्तित्व के लिए संकट बन सकती है। इसके बावजूद, डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा से जुड़े इन संशयों को लगातार खारिज किया है और उनका रुख यही रहा है कि उद्योग को नियमों के जाल में उलझाने की आवश्यकता नहीं है।
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