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जीसस से मिलाने के नाम पर 190 मासूमों को भूखा मारकर दफनाया: केन्या के शाकाहोला नरसंहार में पादरी पॉल मैकेंजी समेत 29 दोषी करार

मोम्बासा/नैरोबी: केन्या में धार्मिक कट्टरता और अंधविश्वास के खौफनाक चेहरे को बेनकाब करने वाले शाकाहोला नरसंहार मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। खुद को पादरी बताने वाले पंथ प्रमुख पॉल मैकेंजी और उसके 28 सहयोगियों को 190 बच्चों और एक वयस्क की सुनियोजित हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया है। मोम्बासा की अदालत द्वारा सोमवार को दिए गए इस फैसले से उन अनगिनत पीड़ित परिवारों को वर्षों बाद इंसाफ की उम्मीद दिखी है, जिन्होंने इस सनक में अपने पूरे कुनबे को हमेशा के लिए खो दिया।

कल्ट का खौफनाक ताना-बाना: बच्चों को भूखा रखकर प्रभु यीशु से मिलाने का दिया झांसा

यह मामला केन्या के इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में शुमार है। पॉल मैकेंजी ने अपने अनुयायियों का इस कदर मनोवैज्ञानिक ब्रेनवॉश किया था कि वे मानने लगे थे कि बच्चों को भूखा रखकर दुनिया से विदा करने पर वे सीधे जीसस से मिल सकेंगे। साल 2023 में जब शाकाहोला के घने जंगलों में उथली सामूहिक कब्रों की खुदाई शुरू हुई, तब इस काले साम्राज्य की परतें खुलीं। उस दौरान पुलिस व बचाव दलों ने जंगल से 400 से अधिक कंकाल और सड़ चुकी लाशें बरामद की थीं, जिनमें से कई की पहचान आज तक मुमकिन नहीं हो सकी।

सिलसिलेवार मौत का डिजाइन: पहले बच्चे, फिर किशोर, महिलाएं और आखिर में पुरुष

अदालत में फैसला सुनाते हुए जज डायना कावेड्जा मोचाचे ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने 29 आरोपियों के खिलाफ 191 लोगों की हत्या का आरोप पूरी तरह साबित कर दिया है। जांच में सामने आया कि मैकेंजी ने अपने 800 एकड़ के फार्म में ‘मौत का एक व्यवस्थित ढांचा’ तैयार किया था। इस योजना के मुताबिक मौत के घाट उतारने का एक तय क्रम था—सबसे पहले दुधमुंहे व छोटे बच्चे, उसके बाद किशोर, फिर महिलाएं और सबसे अंत में पुरुषों को भूखा रहकर दम तोड़ना था।

भूख, दम घुटने और सिर पर वार से छीनी गई सांसें, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रूह कंपाने वाले तथ्य

अदालती रिकॉर्ड में दर्ज फॉरेंसिक साक्ष्यों के अनुसार, मृतकों में से 72 लोगों की मौत स्पष्ट रूप से दाने-दाने को तरसने और भूख की वजह से हुई। वहीं 110 शव इस कदर सड़ चुके थे कि पैथोलॉजिस्ट मौत की सटीक वजह दर्ज नहीं कर सके, हालांकि परिस्थितियों के आधार पर कोर्ट ने माना कि वे भी इसी भुखमरी का शिकार बने। इसके अलावा कई पीड़ितों की सांसें गला घोंटने, दम दबाने और सिर पर भारी हथियारों से वार कर रोकी गई थीं।

मांओं ने खुद अपने कलेजे के टुकड़ों को रखा भूखा, जज ने बताया कट्टरपंथ का विकृत रूप

जज मोचाचे ने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि मैकेंजी का चर्च किसी भी खतरनाक पंथ यानी कल्ट के सभी लक्षणों को पूरा करता था। यहां अनुयायियों का बाहरी दुनिया, रिश्तेदारों और समाज से पूरी तरह संपर्क काट दिया जाता था। इस कट्टरता का सबसे वीभत्स असर यह हुआ कि मांओं ने खुद अपने बच्चों को कई-कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखकर तड़पने दिया। जज ने अपने आदेश में कहा, “यही धार्मिक कट्टरपंथ का असली दुष्प्रभाव है—जहां कभी जो बात अकल्पनीय थी, वह आदेश बन जाती है और जो स्वाभाविक मानवीय प्रेम था, उसे पाप मान लिया जाता है।”

अपनों को खोने का दर्द नहीं होगा कम, आरोपी के बेटे ने भी माना- पीड़ितों को मिला न्याय

पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला कानूनी जंग में एक बड़ी जीत है, लेकिन सीने में दफन दर्द अभी भी ताजा है। इस मामले में अपने परिवार के 8 सदस्यों (बेटी और दो नाती-पोतों समेत) को खोने वाले 62 वर्षीय फ्रांसिस वांजे ने कहा कि उनका परिवार कभी लौटकर नहीं आएगा, लेकिन फैसले से तसल्ली मिली है कि कातिल कानून के शिकंजे में हैं। उन्होंने शुरुआती दौर में पुलिस और प्रशासन की सुस्ती पर भी सवाल उठाए। वहीं, अदालत में मौजूद पॉल मैकेंजी का 24 वर्षीय बेटा डैन, जो पिता से वर्षों से अलग रह रहा था, उसने भी कहा कि निर्दोष पीड़ितों को आखिरकार न्याय मिला है।

6 नवंबर को सजा का एलान, 2019 में जमानत मिलने के बाद फैलाया था मौत का जाल

अदालत इस ऐतिहासिक मामले में 6 नवंबर को सजा की अवधि का ऐलान करेगी। मैकेंजी को अप्रैल 2023 में एक स्थानीय मानवाधिकार संगठन की सूचना पर तब गिरफ्तार किया गया था, जब जंगल से कुछ अर्धमूर्छित अनुयायियों को बचाया गया था। उस वक्त कब्रों से इतनी तादाद में शव निकले थे कि स्थानीय मुर्दाघरों में जगह खत्म होने पर खुदाई रोकनी पड़ी थी। साल 2003 में ‘गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च’ की नींव रखने वाले मैकेंजी को 2017 और 2019 में भी कट्टरता और बच्चों की संदिग्ध मौत के आरोप में पकड़ा गया था, लेकिन कमजोर पैरवी और जमानत पर रिहा होने के बाद उसने जंगलों में अपना यह भयानक नरसंहार नेटवर्क तैयार कर लिया।

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