
नई दिल्ली: देश की जीवनदायिनी गंगा नदी की सफाई और संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया है। शीर्ष अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि गंगा की स्थिति पहले ही बहुत खराब हो चुकी है और अब इसे ठीक करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित सरकारों की है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए गंगा नदी के किनारों पर बने सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को अविलंब हटाने का स्पष्ट फरमान सुनाया है।
‘गंगा के साथ न करें खिलवाड़’, कोर्ट ने पूर्व आदेशों की अनदेखी पर जताई गहरी नाराजगी गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्रों और किनारों की बदहाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और अन्य संबंधित राज्यों को स्पष्ट चेतावनी दी कि वे नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न करें। सुनवाई के दौरान अदालत ने असंतोष जताते हुए कहा कि पहले जारी किए गए कई न्यायिक आदेशों के बावजूद शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कोई ठोस असर दिखाई नहीं दिया, जिसके चलते अब न्यायपालिका को सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।
बिहार को बाढ़ के चलते अवैध कब्जे हटाने के लिए 12 हफ्ते की मोहलत बिहार के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति और पानी के तेज बहाव को संज्ञान में लिया। अदालत ने मानवीय और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बिहार सरकार को गंगा के किनारों से अवैध कब्जे हटाने के लिए 12 सप्ताह की मोहलत दी। पीठ ने साफ किया कि यह अतिरिक्त समय केवल बाढ़ की स्थिति को देखते हुए दिया जा रहा है, लिहाजा तय मियाद के भीतर नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाए।
यूपी, बिहार और दिल्ली समेत 11 राज्यों को नोटिस, मांगी विस्तृत रिपोर्ट इस मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने गंगा बेसिन और उससे जुड़े 11 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया था। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित सरकारों से नदी के किनारों पर हुए अतिक्रमण, अवैध कब्जों और फ्लडप्लेन (बाढ़ के मैदानों) के सीमांकन को लेकर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट तलब की है।
केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा: उत्तराखंड में नई जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक इधर, केंद्र सरकार के पर्यावरण, जल शक्ति और बिजली मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक संयुक्त हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अदालत को बताया कि सरकार उत्तराखंड की अलकनंदा और भागीरथी नदी घाटियों में पूर्व से स्वीकृत केवल सात परियोजनाओं के अतिरिक्त किसी भी नई जलविद्युत परियोजना (Hydroelectric Project) को अनुमति देने या आगे बढ़ाने का समर्थन नहीं करती है।
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