Sunday , 25 October 2026

ईरान पर ट्रंप का दोतरफा रुख: सैन्य हमले की सीधी चेतावनी के बीच ‘ब्यूटीफुल डील’ का दिया विकल्प; ‘एपिक फ्यूरी’ दोहराने की कही बात

अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक टकराव एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और संभावित कूटनीति दोनों विकल्पों को एक साथ सामने रखकर पश्चिम एशिया में हलचल तेज कर दी है। ट्रंप ने शनिवार को साफ संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर किसी भी वक्त सैन्य हमला कर सकता है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक और बेहतर शांति समझौते की संभावना को भी खारिज नहीं किया है। उन्होंने इस संभावित समझौते को एक ‘ब्यूटीफुल डील’ करार देते हुए तेहरान के सामने अपनी शर्तें रखने का दबाव बनाया है।

फ्लोरिडा में वोटिंग के बाद बोले ट्रंप: ‘शायद कल हो जाए हमला या फिर कोई बड़ा समझौता’

फ्लोरिडा में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के लिए अपना मतदान करने के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी रणनीति साझा की। जब उनसे अंतिम निर्णय और संभावित कार्रवाई के समय को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि शायद कल ही ऐसा हो जाए, यानी सैन्य कार्रवाई की पूरी संभावना है। हालांकि, अपने चिरपरिचित अंदाज में रुख बदलते हुए उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह भी पूरी तरह मुमकिन है कि दोनों पक्षों के बीच एक बड़ा, ठोस और बेहतरीन समझौता अमल में आ जाए। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि वे अंतिम विकल्प का चयन परिस्थितियों के आधार पर करेंगे।

‘एक और छोटा एपिक फ्यूरी मुमकिन’, अमेरिकी सेना के पराक्रम की तारीफ

ईरान को सख्त सैन्य संदेश देते हुए ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका आवश्यकता पड़ने पर ‘एक और छोटा एपिक फ्यूरी’ दोहरा सकता है। उन्होंने पश्चिम एशिया में तेहरान के खिलाफ करीब आठ महीने तक चले संघर्ष में अमेरिकी थलसेना और नौसेना के रणनीतिक ऑपरेशनों की जमकर सराहना की। ट्रंप ने सेना की कार्यप्रणाली को बेमिसाल बताते हुए कहा कि अमेरिकी सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पर चुटकी लेते हुए कहा कि तेहरान के पास अब सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ महंगाई बची है।

हमले की आशंकाओं के बीच समुद्र के नीचे बिछी केबलों पर खतरा

ट्रंप की यह कड़ी चेतावनी ऐसे समय में आई है जब यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका और इजरायल किसी भी समय ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर अपनी सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर सकते हैं। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों और खुफिया हलकों में यह बात भी तेजी से उठ रही है कि जवाबी रणनीति के तहत ईरान खाड़ी क्षेत्र (गल्फ) में समुद्र के भीतर बिछी अंतरराष्ट्रीय संचार और इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है। इस तरह की किसी भी कार्रवाई से वैश्विक संचार और व्यापारिक व्यवस्था में बड़ा व्यवधान पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।

ईरान के इरादों पर ट्रंप का संशय: ‘डील तो चाहते हैं, पर क्या टिकेंगे?’

शांति समझौते की संभावनाओं पर बात करते हुए भी ट्रंप ने ईरान के रुख पर संशय जाहिर किया। उन्होंने तेहरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान एक समझौता चाहता तो जरूर है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वे उस पर पूरी तरह कायम रह पाएंगे? ट्रंप का मानना है कि यदि समझौता होता है तो वह पूर्ववर्ती समझौतों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी होगा, लेकिन अगर ईरान ने आक्रामकता जारी रखी तो सैन्य विकल्प टेबल पर तैयार रखा गया है। 

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