Thursday , 1 October 2026

‘ईरान को नहीं चाहिए परमाणु बम, अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार’: संयुक्त राष्ट्र पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा बयान, अमेरिका पर मढ़ा जंग का दोष

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा बयान दिया है। फॉक्स न्यूज के प्रसिद्ध कार्यक्रम ‘स्पेशल रिपोर्ट’ में एंकर ब्रेट बेयर के साथ बातचीत करते हुए पेजेशकियन ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी सूरत में परमाणु बम नहीं बनाना चाहता। उन्होंने यह भी साफ किया कि तेहरान अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की अंतरराष्ट्रीय जांच कराने और तनाव घटाने के लिए यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का स्तर घटाने को पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने बीते सात महीनों से जारी संघर्ष के लिए वाशिंगटन की आक्रामक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

धार्मिक फतवे का दिया हवाला: महाविनाश के हथियार इस्लाम में हराम

इंटरव्यू के दौरान जब सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि क्या ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश में है, तो राष्ट्रपति पेजेशकियन ने स्पष्ट जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं।” उन्होंने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता द्वारा जारी किए गए ऐतिहासिक धार्मिक आदेशों (फतवों) का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि इस्लाम में सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) का निर्माण, भंडारण और इस्तेमाल पूर्णतः अनैतिक, धार्मिक रूप से निषिद्ध और गैरकानूनी माना गया है। उन्होंने दोहराया कि ईरान का घोषित रक्षा सिद्धांत परमाणु हथियारों के विकास की अनुमति नहीं देता।

यूरेनियम संवर्धन घटाने और स्वतंत्र विदेशी निगरानी की पेशकश

ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक विवाद और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की मुख्य वजह रहा है। ईरान द्वारा तय सीमा से अधिक स्तर तक यूरेनियम संवर्धन किए जाने को आधार बनाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) का आगाज किया था। अब वर्तमान कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में नरमी दिखाते हुए पेजेशकियन ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका बातचीत की मेज पर गंभीरता दिखाता है, तो ईरान यूरेनियम संवर्धन की शुद्धता दर घटाने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) या बाहरी स्वतंत्र निरीक्षकों को अपने परमाणु स्थलों तक सीधी पहुंच देने के लिए तैयार है।

जून शांति समझौते का उल्लेख: ‘वार्ता के बजाय अमेरिका ने हमलों का रास्ता चुना’

पेजेशकियन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के मध्य जून में बनी उस सहमति की ओर ध्यान दिलाया, जिसका प्राथमिक लक्ष्य संघर्ष विराम लागू करना और अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक शांति समझौते को अंतिम रूप देना था। ईरानी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि ईरान इस समझौते की शर्तों पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तत्पर था, लेकिन अमेरिका ने शांति वार्ता के मंच को त्यागते हुए सैन्य हमलों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व, वैज्ञानिकों, वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाकर हत्याएं कीं, जिससे क्षेत्रीय संकट और गहरा गया।

आर्थिक पाबंदियों के बीच संप्रभुता का संकल्प, तनाव खत्म करने की अपील

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने खुलकर स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते ईरान वर्तमान में गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन ईरानी आवाम किसी भी दबाव के आगे झुकेगी नहीं और हर कठिनाई का डटकर मुकाबला करेगी। उन्होंने युद्ध के विस्तार के लिए इजराइल की भूमिका को भी कठघरे में खड़ा किया। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले (जिसमें 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे) में चीनी सैटेलाइट डेटा के कथित उपयोग के सवाल पर उन्होंने किसी भी प्रत्यक्ष जानकारी से इनकार किया। अंत में पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध को आगे बढ़ाना नहीं चाहता और अब मध्य पूर्व में युद्ध खत्म करने का अंतिम फैसला पूरी तरह व्हाइट हाउस के रुख पर निर्भर करता है।

 

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