नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, 9 महिलाओं समेत 76 आरोपी गिरफ्तार
– नोएडा में बैठकर अमेरिकी नागरिकों को बनाते थे निशाना डेढ़ हजार लोगों को ठगा
नोएडा,13 दिसंबर (हि.स.)। नोएडा पुलिस ने शुक्रवार को सेक्टर-63 में चल रहे एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया हैं, जो अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी कर रहा था। यह गिरोह इंस्टा सॉल्यूशन नाम से एक कॉल सेंटर चला जा रहा था। अब तक यह गिरोह 1500 से अधिक लोगों को ठग चुका है। गिरोह के 76 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में पता चला है कि यह गिरोह विशेष रूप से विदेशी नागरिकों को ही निशाना बनाता था, जिससे उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर कोई शिकायत दर्ज न हो सके।डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने शुक्रवार को पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए 76 लोगों में 67 पुरुष और नौ महिलाएं शामिल हैं। जिनमें से अधिकतर नॉर्थ-ईस्ट के रहने वाले हैं।
इनके कब्जे से 58 लैपटॉप, 45 चार्जर, 2 राउटर, 45 हेडफोन, 24 मोबाइल फोन और एक एप्पल मैकबुक बरामद की गई है। उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्य अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटरों में बग भेजते थे, जिससे उनकी स्क्रीन नीली हो जाती थी। इसके बाद स्क्रीन पर एक हेल्पलाइन नंबर दिखता था। जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता तो कॉल सेंटर के कर्मचारी स्वयं को माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन या अन्य बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर कंप्यूटर ठीक करने के लिए 99 डॉलर से 500 डॉलर तक की मांग करते थे। भुगतान बिटकॉइन, गिफ्ट कार्ड या अन्य डिजिटल माध्यम से लिया जाता था।गिरोह के सदस्य स्काइप एप के जरिए अमेरिकी नागरिकों का डाटा खरीदते थे और फिर इसे अपने काम में इस्तेमाल करते थे।
ग्राहकों को फर्जी संदेश या वॉइस नोट्स भेजे जाते थे। जिनमें उन्हें बताया जाता कि उनका अकाउंट हैक हो गया है या उनके नाम पर कोई पार्सल तैयार है। इस डर के कारण पीड़ित भुगतान करने को मजबूर हो जाते थे।उन्होंने बताया कि यह कॉल सेंटर कुरुनाल, सौरम, सादिक और साजिद अली मिलकर चला रहे थे। इन सभी पर पहले भी गुजरात में धोखाधड़ी के मामलों में जेल जाने का आरोप है। गिरोह अमेरिकी नागरिकों को लोन देने के नाम पर भी ठगी करता था। स्काइप से प्राप्त डाटा के आधार पर पीड़ितों को लोन संबंधी संदेश भेजे जाते थे। यदि कोई व्यक्ति लोन लेने में रुचि दिखाता, तो उससे 100 से 500 डॉलर तक की मांग की जाती। पैसे नहीं देने पर फर्जी चेक भेजकर उनके बैंक खातों को निशाना बनाया जाता।