सीतापुर : शुरू हुई विश्व प्रसिद्ध 84 कोसी होली परिक्रमा यात्रा, सेल्फी व फेसबुक लाइव का भी दिखा जुनून


 

राम नाम जयघोष के साथ मुक्तिपथ पर चल पड़ा रामादल
दो दिलों में 15 दिनों तक चलेगी परिक्रमा यात्रा
भक्ति के अनंत सागर में 15 दिनों तक डूबे रहेंगे श्रद्धालु

नैमिषारण्य-सीतापुर। बृहस्पतिवार सुबह घड़ी की सुइयों ने जैसे 4 बजाए वो शुभ घडी आ ही गई जब देश के विभिन्न प्रान्तों के लाखो श्रद्धालुओं के साथ ही पडोसी देश नेपाल के श्रद्धालुओं के मंगल गान के साथ नैमिषारण्य तीर्थ की 84 कोसीय परिक्रमा यात्रा का महंत नन्हकू दास द्वारा डंका बजाने के साथ ही भक्ति में डूबे शंख, ढोल, मंजीरे, नगाड़े खंजड़ी की पारंपरिक धुन के बीच अखंड राम नाम संकीर्तन के भक्तिमय शुभारम्भ हो गया। कोविड काल के बाद हो रही इस यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। हालात कुछ यूँ थे कि इस यात्रा में धर्मपथ की कठिन डगर पर एक ओर जहां देश विदेश के लाखों श्रद्धालुगण जयकारों, लोकगीतों और संकीर्तन की मस्त फुहारों में भीगते नजर आ रहे थे, जिसमे कोई सन्त जहां फक्कड़ भाव से चिमटा बजाते हुए अपनी ही धुन में गुनगुनाता जा रहा था तो कोई सन्त घोड़े हाथी पर बैठ कर परम्परा का निर्वहन करते दिख रहा था। कहीं कोई सन्त डमरू की धुन पर सबको मंत्रमुग्ध कर रहा था।

यहां का आलम कुछ ऐसा था कि एक ओर जहां कोई श्रद्धालु परिक्रमा पथ पर ही दण्डवत प्रणाम की मुद्रा में दिख रहा था तो कोई ग्रामीण श्रद्धालु अपने नन्हे-मुन्हे बच्चो के साथ साइकिल पर ही परिक्रमा मार्ग पर बढ़ रहा था। कोई युवा सरपट दौड़कर परिक्रमा पथ पर बढ़ रहा था वही कोई बुजुर्ग डंडे के सहारे तो कोई दिव्यांग ट्राई साइकिल से ही परिक्रमा की राह पर बढ़ता जा रहा था। इस परिक्रमा में देश की विभिन्न संस्कृतियों के दर्शन एक साथ देखना बड़ा ही अलग अनुभव होता है। यहां विभिन्न प्रदेशों के यात्रियों द्वारा परम्परागत लोकगीतों का मधुर स्वर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है तो ‘नैमिष धाम की जय, ‘बोल कड़ाकड सीताराम’, ‘जय श्री राम, राधे राधे, नैमिष धाम की जय के तेज जयकारे एक अलग ही धार्मिक माहौल का अहसास दे रहे थे जब ये धर्मयात्रा गांवों से गुजर रही थी तो परिक्रमा मार्ग के किनारे खड़े ग्रामीण बच्चे भी जोर जोर से जयकारे लगाकर अपने स्तर से परिक्रमार्थियों का उत्साह बढ़ा रहे थे।

परिक्रमार्थियों पर हुई पुष्पवर्षा, परिक्रमा अध्यक्ष, साधु सन्तो व पुरोहितों का किया सम्मान, डंके का किया पूजन
इस सनातन यात्रा के क्रम में आज लगातार चौथे वर्ष प्रशासन द्वारा अनूठी पहल की गई जिसके चलते आज सुबह मिश्रिख एसडीएम गौरव रंजन श्रीवास्तव द्वारा चक्रतीर्थ पुजारी राजनाथ पांडेय के सानिध्य में बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रोचार के मध्य सबसे पहले 84 कोसीय परिक्रमा समिति के अध्यक्ष व पहला आश्रम महंत नन्हकू दास का फिर व्यासपीठाधीश अनिल कुमार शास्त्री का पूजन व माल्यार्पण कर स्वागत अभिनंदन किया गया। इसके बाद परंपरागत ढंग से डंका लेकर चलने वाले घोड़े और डंके का पूजन किया गया। इसी क्रम में इस अद्भुत परिक्रमा में प्रतिभाग कर रहे सभी प्रारंभिक परिक्रमार्थियों का एसडीएम समेत प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। साथ ही सभी परिक्रमार्थियों के ऊपर पुष्प वर्षा भी की गई।

परिक्रमा महंत का हाईटेक भव्य रथ रहा आकर्षण का मुख्य केंद्र
लगातार दूसरे वर्ष 84 कोसीय परिक्रमा समिति के अध्यक्ष की परम्परागत पालकी की बजाय मॉडीफाईड क्रूजर पर सजे धजे हाईटेक रथ पर इस परिक्रमा मार्ग पर निकली जब परिक्रमा का शंखनाद हुआ तो सभी अधिकारियों व श्रद्धालुओं ने महंत जी का पुष्प वर्षा कर स्वागत अभिनंदन किया इस नए अनूठे रस्मो रिवाज व भक्तो के जयकारों के बीच परिक्रमा में एक अलग ही समां बंध गया ,

पुलिस दिखी सतर्क पर स्वास्थ्य विभाग रहा बेफिक्र
आज परिक्रमा मार्ग पर जहां पुलिसकर्मी मुस्तैद दिखे वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम कहीं दिखाई न दी। मंदिर चौराहे या मार्ग पर स्वास्थ्य सहायता के लिए कोई भी मौजूद नही दिखा जिसके चलते सामान्य रोगों की दवा लेने के लिए भी परिक्रमार्थियों को झोलाछाप दवाबाजों का ही सहारा रहा।

सेल्फी व फेसबुक लाइव का भी दिखा जुनून
इस परिक्रमा में जहां बड़े बूढ़ों का उत्साह देखते ही बन रहा था वही युवा और महिलाओं की भी ऊर्जा देखने लायक थी। नन्ही श्रद्धालु प्रतीक्षा जहां सेल्फी लेकर यादें संजो रही थी वहीं फक्कड़ साधुओं का दल भी सेल्फी लेता नजर आया। इसी कड़ी में कई पुलिसकर्मी भी ड्यूटी निभाने के साथ ही फोटो क्लिक करते रहे।

भाव एक पर नमन पूजन के तरीके अनेक
पुण्यपथ पर निकले श्रद्धालुओं द्वारा परिक्रमा पथ पर बढ़ते समय नमन पूजन भी आकर्षण का केंद्र बिंदु रहता है इस दौरान कोई जहां परिक्रमा मार्ग को हाथ जोड़कर प्रणाम करता है तो कोई मार्ग को छू कर प्रणाम करता है कोई शीश नवाकर प्रणाम करता है तो कोई परिक्रमा पथ को चूमकर वही कई भक्त तो लेटकर प्रणाम करते दिखे तो कोई कुछ दूरी तक दण्डवत करते हुए कुल मिलाकर नमन वन्दन के ये सब दुर्लभ नजारे सभी के लिए काफी अविस्मरणीय होते है।

जर्जर पुलिया से गुजरा श्रद्धा का जन सैलाब
परिक्रमा में कई जगह प्रशासन द्वारा यात्री सुविधाओं के वादे वादों तक ही सिमटते दिखे , गनीमत रही कि कोई हादसा नही हुआ , आलम ये था कि कभी भी टूटकर गिरने वाली पुलिया की मरम्मत फौरी तौर पर हुई जिसके चलते मरम्मत भी टूटती दिखाई दी और यहां से लाखों श्रद्धालुओं का कारवां वजनी ट्रैक्टर ट्रालियों , डनलप आदि के काफिले के साथ बेफिक्र निकलता चला गया।