सीतापुर : ‘मंत्र’ से लें गर्भधारण से शिशु के टीका तक की जानकारी

स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया इसके इस्तेमाल के बारे में प्रशिक्षण

सीतापुर। मातृ और शिशु मृत्यु दर पर विराम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक और सराहनीय पहल की है। मां-नवजात ट्रैकिंग एप (मंत्र एप) पर अब गर्भवती और नवजात शिशु के स्वास्थ्य जांच संबंधी सभी जरूरी जानकारियां घर बैठे आसानी से मिल जाएंगी। इस एप पर गर्भधारण से लेकर प्रसव और नवजात के एक वर्ष से टीका लगने तक पूरी जानकारी मौजूद रहेगी। एप पर गर्भधारण के समय पंजीकरण कराने के बाद उसे टीका लगवाने के लिए दिन और तारीख को याद करने की जरूरत नहीं है। निर्धारित अवधि पर टीका और जांच के लिए एप महिला और क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता को अलर्ट संदेश देगा।

सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मंत्र एप लांच किया है। जिले के 40 प्रसव केंद्रों को इस एप से जोड़कर डिजिटल बनाया जा चुका है। इस संबंध में जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। गर्भवती के प्रसव केंद्र पर भर्ती होने का समय, उसकी स्थिति, उपचार व प्रसूता को रेफर करने या न करने का कारण सहित अन्य सभी जानकारियां एप पर अपलोड की जा रहीं हैं। ऐप के जरिए ही गर्भवती और उसके नवजात की ऑनलाइन निगरानी हो रही है, जिससे संस्थागत प्रसव की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके। प्रसव के दौरान गर्भवती को अगर कोई परेशानी होती है तो उसे मंत्र एप में भरकर महिला को जिला चिकित्सालय भेजा जाएगा। प्रसव के बाद नवजात की भी निगरानी की जाएगी। अगर बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी होगी तो उसे भी उच्च स्वास्थ्य इकाइयों पर भी भेजा जाएगा। गर्भधारण से लेकर प्रसव एवं उसके उपरांत नवजात के टीकाकरण की पूरी जानकारी एप पर विस्तार से भरी जाएगी। गर्भवती से जुड़ी सभी जांच रिपोर्ट एप पर अपलोड की जायेंगी।

एसीएमओ और कार्यक्रम के नोडल अफसर डॉ. कमलेश चंद्रा ने बताया कि एप का मुख्य उद्देश्य मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। अभी तक इसके तहत किसी महिला के गर्भधारण के समय से लेकर बच्चे के एक वर्ष होने तक उसकी नियमित जांच और टीकाकरण की व्यवस्था कराई जा रही है। संस्थागत प्रसव से लेकर घरेलू प्रसव तक आशा कार्यकत्री को निर्धारित तिथि पर महिला के घर जाकर पूरी जानकारी देनी होती है। आशा इसकी पूरी डिटेल अपने उच्चाधिकारियों को सौंपती थी। अब एप के लांच होने से सभी काम बेहद आसान हो जाएंगे। आशा कार्यकत्री गर्भवती के पंजीकरण से लेकर बच्चे के टीका लगा कर पूरा विवरण एप पर ही देगी। एप के लांच होने के बाद से विभाग की तरफ से एमओआइसी, बीसीपीएम, नर्स और स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता उपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि इस एप को पूरी तरह से चालू कर दिया गया है, एप पर आंकड़ों का भरने का काम शुरू हो गया है, जिससे अब आंकड़ों का अध्ययन करना और आसान हो गया है। इससे यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में एनीमिया ज्यादा है और कहां पर कुपोषण की समस्या है। शिशु मृत्यु की अधिकता वाले क्षेत्र भी एक क्लिक में चिन्हित हो जाएंगे और इस तरह से ऐसे क्षेत्रों में विशेष प्रयास कर मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकेगा।