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सीतापुर : जिन किसानों का बिका धान, उनका नहीं हो रहा भुगतान

 सरकार के धान खरीद के 72 घंटे के भीतर भुगतान किए जाने की घोषणा साबित हो रही हवा-हवाई़
 टोकन व्यवस्था में रहा घालमेल

महमूदाबाद, सीतापुर। किसानों की धान फसल की खरीद के लिए कृषि उत्पानद मंडी परिषद में छह धान खरीद केंद्र संचालित हो रहे हैं। किसानों की फसल की खरीद के लिए प्रशासन ने टोकन व्यवस्था लागू कर रखी है। किंतु टोकन में भी घालमेल हो रही है। इतना ही नहीं जिन किसानों ने अपने धान की खरीद केंद्रों पर तौल करवा भी दी वह भी भुगतान के लिए दौड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार के धान खरीद के 72 घंटे के भीतर भुगतान किए जाने की घोषणा हवा-हवाई साबित हो रही है। किसान धान केंद्रों पर तौल का नंबर आने की प्रतीक्षा में हफ्तों से लाइन लगाए सर्द रातें गुजार रहे हैं। केंद्रों पर प्रभारी किसानों से दो सौ से ढाई सौ रुपए प्रति कुंतल कमीशन लेने के बाद ही धान की तौल करते हैं। कमीशन न देने पर किसानों का धान रिजेक्ट कर दिया जाता है। धान क्रय केंद्रों के पास खरीद के लिए दलालों का जमावड़ा लगा रहता है।

टोकन व्यवस्था में हो रही मनमानी
कृषि उत्पानद मंडी परिसर महमूदाबाद में छह धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। यहां धान खरीद के लिए आरएफसी महमूदाबाद व पहला के खरीद केंद्र प्रभारी मंगलवार को अपने केंद्रों से नदारद मिले। लेकिन धान की तौल जारी दिखी। एसएफसी महमूदाबाद केंद्र पर मुरादपुर के किसान के बेटे आकाश वर्मा पुत्र सतगुरू शरण ने बताया कि बीते 12 दिनों से उसकी धान लदी ट्राली खरीद केंद्र पर खड़ी है। आकाश ने बताया कि टोकन जारी होने के समय सभी केंद्रों को मिलाकर केवल 96 ट्रालियां थीं। ऐसे में उसकी ट्राली में तौल के लिए 97 नंबर होना चाहिए था किंतु पहले उसे 100 नंबर का टोकन दिया गया था जिसे बलदकर मनमाने तरीके से 200 कर दिया गया है।

किसानों से हो रही दो-ढाई सौ रूप्या की वसूली
मंडी परिसर में संचालित धान क्रय केंद्रों पर प्रभारियों द्वारा किसानों से प्रति कुंतल दो सौ से ढाई सौ रुपए की वसूली की जा रही है। जिन किसानों द्वारा कमीशन देने से इंकार किया जाता है उनका धान खरीद से रिजेक्ट कर दिया जाता है। कुछ केंद्र प्रभारियों द्वारा स्वयं मंडी में निजी आढ़तों पर औने-पौने दामों पर धान खरीदा जाता और उसके बाद उसी धान को अपनी सेटिंग वाले किसानों के खातों में बिक्री दिखकार पैसा ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता है। वर्तमान में मंडी परिसर में किसानों का निजी आढ़तों पर 13 सौ से 14 सौ तक धान की खरीद की जाती है। इसके बाद इसी धान को क्रय केंद्रों पर तौल दिया जाता है जबकि लाइन में लगा किसान हफ्तों तौल के लिए अपनी बारी के आने का इंतजार करता रहता है।

समय पर दिया जाए भुगतान
किसानों का लाखों-लाख रुपया धान कंेद्रों पर बकाया है जिसका भुगतान करने की सरकार ने घोषणा करते हुए कहा था कि 72 घंटे में कर दिया जाएगा किंतु महीनों बाद भी किसान के हांथ खाली हैं। किानों की समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा, कांग्रेस नेता प्रदीप पांडेय, बसपा के चेतराम भारती ने किसानों की बकाया रकम का भुगतान बैंकिंग ब्याज के साथ कराए जाने की मांग की है। तौल की आस में किसान हफ्तों से सर्द रातें मंडी परिसर में गुजारने को विवस हैं।

एसडीएम ने मंडी सचिव को लगाई फटकार
धान खरीद में चल रही तौल में चल रही अनियमितता की शिकायत पर एसडीएम दिव्या ओझा के निर्देश पर मंडी सचिव रवींद्र वर्मा द्वारा केंद्रों पर खड़ी धान लदी ट्रालियों की नंबरिंग 27 नवंबर की गई थी। मंडी परिसर में 125 धान लदी ट्रालियांे को टोकन जारी करते हुए 97 से 117 तक महमूदाबाद मंडी मंे संचालित खाद्य विभाग के धान क्रय केंद्र पर तथा पीसीएफ सदरपुर पर 118 से 138 तक, खाद्य विभाग पहला खरीद केंद्र पर 139 से 159 तक, पीसीयू सहकारी संघ भंडिया केंद्र पर 160 से 180 तक तथा पीसीएफ सहकारी संघ सैदनपुर पर 181 से 201 तक, मंडी समिति के खरीद केंद्र पर 202 से 221 सभी धान खरीद केंद्रों को 21-21 किसानों से धान खरीद करने का लक्ष्य देकर टोकन जारी किए गए थे। खरीद केंद्र प्रभारी इस व्यवस्था में भी मनमानी करते दिखाई दे रहे हैं।

 

अपर निदेशक मंडी ने किया निरीक्षण
अपर निदेशक मंडी श्रीमती निधि श्रीवास्तव ने शनिवार को धान किसानों की समस्याओं को जानने के लिए सीतापुर की गल्ला मंडी में सरकारी धान क्रय केंन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने धान क्रय केंन्द्रों पर मौजूद किसानों से वार्ता की और उनकी समस्याएं सुनी तथा धान बिक्री के भुगतान के विषय में जानकारी ली। वहां पर दो दिनों से तौल के इंतजार में खडी धान ट्रालियों को दूसरे केंन्द्रों पर तौल के लिए भेजने के निर्देश दिए। अपर निदेशक ने आठ केंन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। इस मौके पर गल्ला मंडी के सचिव संजय सिंह भी मौजूद रहे।

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