सीतापुर : ‘गांजर’ की सियासी सरजमीं को नहीं मिली उद्योग की ‘छांव’

 नेताओं ने उद्योग लगाने के नाम पर सपने दिखाए और सियासी दांव के तहत वोट ले जनता को दिखाया ठेंगा

बिसवां-सीतापुर। गांजर की सियासी जमीं पर किसी ने भी उद्योग का पौधरोपण नहीं किया। जिससे यहां रोजगार की छांव की वीरानी आज भी छाई हुई है। वीरान इस सरजमीं पर रोजगार एक अहम मुद्दा है। अगर चीनी मिल को निकाल दिया जाए तो यहां पर उद्योग के नाम पर कुछ भी नहीं है। जनप्रतिनिधि आए, उद्योग लगाने के नाम पर सपने दिखाए और सियासी दांव के तहत वोट बटोर कर निकल लिए। सियासतें चाल पर चाल चलती रहीं और गांजर के लोग उसे सच मान पिसते रहे। अंजाम यह हुआ कि गांजर के लोग पलायन करने लगे। आज लाखों की संख्या में क्षेत्र के मतदाता बाहर रोजगार कर रहे है।

सीतापुर जनपद की विधानसभा बिसवां सबसे बड़ी पुरानी तहसील बिसवां गांजर का द्वार बेरोजगारी जैसी तमाम मूलभूत समस्याओं से ग्रसित है। यहां रोजी-रोटी के लिए लगभग दस प्रतिशत जनसंख्या के लोग पूरे देश-विदेश तथा गैर प्रदेशों में कार्य कर रहे हैं। अगर यहां जनप्रतिनिधियों ने उधोग धंधे स्थापित कराये होते तो लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ता। बिसवां तहसील क्षेत्र बहुत पिछड़ा है। सोहन निवासी गंगापुर (जयपुर), समीर खान शंकरगंज (सऊदी अरब), मोलहे देवियापुर (अलीगढ़), रामकुमार मलेथू (दिल्ली), महेश नसीरपुर (लखनऊ), रामजीवन महमूदपुर (लखनऊ), अहमद अली अकबापुर (मुम्बई), सलीम अंसारी कौवाखेड़ा (महाराष्ट्र), सावित्री पत्नी गजोधर रेउसा (अमृतसर), मैकू सकरन (जयपुर), वीरेंद्र यादव कौवाखेड़ा (सऊदी अरब) जैसे लोग लगभग 75 हजार पुरूष व महिला बेरोजगारी के कारण देश-विदेश व गैर राज्यों को अपनी सेवाओं द्वारा होटल फैक्ट्रियां व्यापारिक प्रतिष्ठान तथा ड्राइवरी क्षेत्र में अपनी तथा परिवार की रोजी रोटी के लिए कमा रहे हैं। होली-दीपावली ईद जैसे त्योहारों पर भारी संख्या में लोग अपने घर आते जाते हैं।

कभी मूंगफली के लिए विख्यात था बिसवां
तहसील क्षेत्र में हजारों मोटर मूंगफली खरबूजा पैदा होता था जो शारदा सहायक नहर के सीपेज के कारण फसल बोने के बाद सड़ जाती है जिससे दर्जनों मूँगफली तेल की फैक्ट्रियां बंद हो गईं। बिसवां विधानसभा क्षेत्र अपनी मेहरबानी पर जिंदा है किसी जनप्रतिनिधि के सहारे नही।यहां जूट की भारी संख्या में खेती होती थी वो भी धीरे धीरे समाप्त हो गई। बाढ़ को रोकने के लिए योजना बनाना चाहिए। क्षेत्र में शासन द्वारा उद्योग धंधे स्थापित कराये जाएँ जिससे यहां के लोगों का पलायन रुकेगा और क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। दि सेक्सरिया शुगर फैक्ट्री इस क्षेत्र के लिए बरदान है जो बेरोजगारी दूर करने में पूरा योगदान दे रही है।

क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षण संस्थान (महाविद्यालय,कृषि), बाढ़, बेरोजगारी, ट्रामा सेंटर, सीपेज, ट्रेनों का ठहराव (रेलवे ब्रिज बनाना), जलभराव, बिसवां को जिला बनाना, बस स्टेशन।

सीतापुर लोकसभा में कौन कितने वर्ष रहा सांसद
बिसवां विधानसभा सदस्य में पहली बार 1952-1957 तक (बिसवां-बेहटा विधानसभा क्षेत्र) मुन्नू लाल, 1957-1962 सुरेश प्रकाश सिंह, 1962-1967 गया प्रसाद मेहरोत्रा, 1967-1969 गया प्रसाद मेहरोत्रा, 1969-1974 कृपा दयाल श्रीवास्तव, 1974-1977 गया प्रसाद, 1980-1985 रामकुमार भार्गव, 1985 से 1995 तक पद्मासेठ, 1993-1998 सूंदरपाल, 1998-2002 अजीत मेहरोत्रा, 2002-2007 रामपाल यादव, 2007-2012 निर्मल वर्मा, 2012-2017 रामपाल यादव तथा 2017 से महेंद्र सिंह यादव भाजपा के विधायक हैं।