सीतापुर : अद्भुत रहस्यों को छुपाए परिक्रमा का दूसरा पड़ाव हर्रैया

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 पहले पड़ाव पर रात्रि विश्राम कर शनिवार को हरैया के लिए प्रस्थान किया रामादल

संदना-सीतापुर। अव्यस्थाओ के बीच परिक्रमार्थी गुरुवार रात कोरौना पड़ाव पर रात्रि विश्राम कर शुक्रवार की सुबह पहला आश्रम के महन्त नन्हकू दास के डंका बजाते ही राम नाम का जप करते हुए अगले पड़ाव स्थल हरैया (जनपद हरदोई) पहुँचे। मार्ग पथरीला होने के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत उन परिक्रमथियो को हुई जो नंगे पांव परिक्रमा कर रहे थे। तैयारियों को लेकर प्रशासन के बडे-बडे दावो की पोल खुल गई। संत महात्माओं में इसके प्रति काफी रोष भी दिखा। परिक्रमार्थियों को पंडाल लगाने की जगह तक नही मिली क्योंकि किसानों ने अपने खेतों के आसपास कटीले तार लगा रखे थे और परिक्रमार्थियों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। अब तक कि परिक्रमा यात्रा कैसी रही इस पर दैनिक भास्कर के संवाददाता ने सन्तो व महंतो की रायसुमारी ली तो उनका दर्द कुछ इस तरह छलक पड़ा। परिक्रमार्थियों ने अपना पंडाल लगाकर राम नाम की धुन में रमित हो गए। परिक्रमार्थियों ने आदि गंगा गोमती में स्नान कर कैलाश आश्रम के दर्शन किये और बाबा खबीसनाथ पर शराब चढ़ाकर पूजा अर्चना की। पड़ाव स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का टोटा रहा।

गंगा गोमती में लगाई श्रद्धालुओ ने डुबकी
84 कोशीय परिक्रमा के दूसरे पड़ाव हर्रैया जाते समय श्रद्धालुओ ने आदि गंगा गोमती में डुबकी लगाकर कैलाश आश्रम में स्थित मंदिर में दर्शन कर पूजा अर्चना की। वहीं रास्ते मे भक्तो ने श्रदालुओ के लिए चाय, बिस्किट, पूड़ी सब्जी, शर्बत आदि की व्यवस्था की।

कैलाश आश्रम की पौराणिक मान्यता
1857 की लड़ाई में नानाजी पेशवा द्वारा कैलाश मंदिर का निर्माण कराया गया था। बताते है कि जब अंग्रेजो से नानाजी पेशवा की लड़ाई चल रही थी तो नानाजी पेशवा छुपते-छुपाते यहाँ आये थे। तब यहाँ जंगल ज्यादा था, तब उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया था। ऐसे वहाँ के बुजुर्ग नागरिक बताते है कि कैलाश आश्रम से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोनिकपुर नाम का स्थान है जो कि हरदोई जिला में आता है वहाँ के राजा वाणासुर हुआ करते थे। स्कन्दपुराण के अनुसार वो यहाँ कैलाश आश्रम में रोज भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए आया करते थे। उनकी लड़की ऊषा, कृष्ण के पोते अनुरुद्ध की सगाई यही पर हुई थी। ऐसा पुराणों में लिखा है। प्राचीन मान्यता के अनुसार यहाँ पर कोई झूठी कसम नही खा सकता। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे महादेव तुरन्त दण्ड देते है।