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विधानसभा चुनाव : यूपी की जनता को रास नहीं आती गठबंधन की राजनीति

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मियां बढ़ने के साथ राजनीतिक गठजोड़ के प्रयास तेज हो गये है मगर पिछले इतिहास पर नजर दौड़ाये तो प्रदेश की जनता को गठबंधन की राजनीति कम ही रास आयी है।

राजनीति में कुछ असंभव न होने का तर्क भी दिया जाता है। ऐसा तर्क देने वाले लोग बीते लोकसभा चुनावों में सपा -बसपा के बीच हुए गठबंधन का उदहारण देते हैं।  यह गठबंधन चुनावों के तत्काल बाद टूट गया था। ऐसा नहीं है कि बीते लोकसभा चुनावों में ही गठबंधन की राजनीति फेल हुई है।

यूपी के राजनीतिक इतिहास पर यदि नजर डालें तो पता चलता है कि बीते तीन दशक में उत्तर प्रदेश में कई गठबंधन हुए, कुछ चुनाव पूर्व तो कुछ चुनाव बाद, पर इनमें से कोई भी प्रयोग टिकाऊ नहीं रहा है। दूसरे राज्यों के विपरीत उत्तर प्रदेश को गठबंधनों की राजनीति कभी रास नहीं आई। इस राज्य में कोई गठबंधन लंबा नहीं चला और यहां वही जीता है जो जनता के बीच अपने दम पर लड़ता हुआ दिखता है।

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