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वायु सेना ने सुखोई से दागी ब्रह्मोस मिसाइल, देखे कैसे हवा में ही लक्ष्य को मार गिराया

नई दिल्ली । भारतीय वायु सेना ने बुधवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लम्बी दूरी तक मारक क्षमता वाले हवाई संस्करण का चौथा सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय ने इस परीक्षण को देश में ब्रह्मोस के विकास में प्रमुख ‘मील का पत्थर’ बताया। इस मिसाइल परीक्षण को देखने के लिए एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और अन्य रक्षा अधिकारी मौजूद थे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वायुसेना प्रमुख ने सटीकता के साथ परीक्षण होने पर बधाई दी है।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के एयर-टु-एयर वर्जन का आज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। लाइव टारगेट मिशन के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई से लॉन्च करके किया गया। मिसाइल ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा करते हुए पूर्व-नियोजित प्रक्षेपवक्र का अनुसरण किया और पूरी सटीकता के साथ हवा में ही लक्ष्य को मार गिराया।

यह ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल के हवाई संस्करण का इस तरीके का चौथा सफल परीक्षण है। इससे पहले ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एयर वर्जन का तीसरा उड़ान परीक्षण 8 दिसंबर, 2021 को ओडिशा तट पर वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई से किया गया था। सुखोई ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ एकीकृत करके किसी एयरबेस से उड़ान भरी और हवा में ही ईंधन भरने के बाद ओडिशा तट पर लक्ष्य को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया था।

इसी तरह दूसरा परीक्षण 30 अक्टूबर, 2020 को बंगाल की खाड़ी में किया गया था। सुखोई ने पंजाब के हलवारा एयरबेस से उड़ान भरने के बाद एक लक्षित जहाज को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया था। ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल के पहले हवाई संस्करण के परीक्षण में सुखोई-30 एमकेआई ने कलिकुंडा हवाई अड्डे से उड़ान भरकर लक्षद्वीप द्वीप क्षेत्र के पास एक लक्षित जहाज को निशाना बनाया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिसाइल के सफल परीक्षण पर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), ब्रह्मोस एयरोस्पेस और आईएएफ को बधाई दी है। वायुसेना प्रमुख इन दिनों परिचालन तैयारियों की समीक्षा करने के लिए अंडमान और निकोबार के द्वीप क्षेत्र में हैं। सटीकता के साथ परीक्षण देखने के बाद उन्होंने भी बधाई दी है। डीआरडीओ ने इस परीक्षण को ब्रह्मोस मिसाइल के विकास में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इसके बाद देश के भीतर ब्रह्मोस मिसाइलों के हवाई संस्करण के उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।

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