मैनपुरी : समान पक्षी बिहार में पक्षियों की संख्या बढ़ी, गणना में 2281 पक्षी मिले

– समान पक्षी बिहार के पक्षियों का डेटा जायेगा नीदरलैंड
– रविवार को ईकोलॉजिस्ट ने पीएचडी शोधार्थियों के साथ पक्षियों की संख्या की गणना की

किशनी/मैनपुरी। समान पक्षी बिहार के कायाकल्प के लिये जोर लगाया जा रहा है। प्रदेश की सबसे बड़ी वर्ड सेंचुरी में रविवार को नई दिल्ली से इकोलॉजिस्ट और पीएचडी शोधार्थी आये। उन्होंने पक्षियों की संख्या की गणना की। सभी पक्षियों का डेटा नीदरलैंड भेजा जायेगा।
प्रदेश के तीन पक्षी बिहार कीठम झील आगरा, पटना झील जलेसर से समान पक्षी बिहार सबसे विशाल आकर में है। इस 526 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसे इस पक्षी बिहार में कई विदेशी पक्षी सर्दियों में प्रवास करते हैं। पिछले दिनों डीएम अविनाश कृष्ण सिंह ने यहाँ निरीक्षण किया था। रविवार को दिल्ली से स्टेट समन्वयक एंव इकोलॉजिस्ट टी के रॉय पक्षी बिहार आये। उनके साथ भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा के पीएचडी शोधार्थी सम्मी सय्यद, हिमांशी सागर, अनुज कुमार, निधी यादव, कृतिका यादव, कुमारी सुनीता कुल 6 लोग टीम में रहे। उन्होंने अपने यंत्रों और फोटोग्राफी के माध्यम से पक्षियों की गणना की। उन्हें कई प्रजातियों के विदेशी पक्षी झील में दिखाई पड़े। इस बार जल पक्षी की कुल प्रजातियां 49 पक्षी बिहार में मिली। वर्ष 2019 में 45 प्रजातियां जिसमे 25 लोकल व 20 प्रवासी उसमे कुल संख्या 1907 हैं। पिछले वर्ष 2021 में 40 प्रजातियां मिली थी।

लोकल 18 प्रजाति, 22 प्रवासी, इस बार कुल प्रजातियों की संख्या में 6 प्रजाति विलुप्त होने वाली प्रजाति भी मिली थी। वर्ष 2020 में 46 प्रजाति जिसमे 25 लोकल और 21 प्रवासी कुल संख्या 4828 थी। वर्ष 2022 की शुरुआत में बारिश होने चलते जलपक्षी की कुल प्रजातियां 49 मिली। पिछले वर्ष तालाब सूखा था।पक्षी बिहार में मिली 24 स्थानीय और प्रवासी 25 मिले जिसमें विलुप्त होने वाले पक्षियों की संख्या 5 रही। इस वर्ष कुल 2281 पक्षी मिले जिसमें तीन प्रजातियों की संख्या बढ़ी है जिसमें विदेश मेहमान पक्षी बतख की तीन प्रजाति बढ़ी है। जिसमें नॉर्दन पिनटेल,नॉर्दन सोभेलर,कॉमनटील कुल संख्या 1540 ही बढ़ी है।टी के रॉय ने बताया कि वेटलैंड इंटरनेशनल संस्था एशियन वाटरवर्ड सेंसर्स द्वारा एशिया की सभी बड़ी झीलों पक्षियों की गणना की जा रही है। यह गणना 27 देशों में की जा रही है, जो प्रतिवर्ष जनवरी में 4 से 19 तक की जाती है। समान झील मुख्य वर्ड सेंचुरी में से एक है क्योंकि यहां विविध प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। इस बार जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी काफी समय तक पड़ी जिसके चलते पक्षियों की संख्या असमान्य हो रही है। दूर से आने वाले पक्षियों का माइग्रेशन देर से हुआ है। इंटरनेशनल फोटोग्राफी के आधार पर पक्षियों की गणना की जाती है।

उससे पता चल जाता है कि कितनी प्रजाति है कितनी संख्या में है। पक्षी एशिया महाद्वीप,मध्य एशिया, साइबेरियन व भारत के कई प्रान्तों की तरफ से आते है। पक्षियों के कम ज्यादा होने का कारण का वह पता लगाते हैं। मध्य एशिया व नॉर्थ एशिया के बारे डिडगिस पक्षी भी यहाँ दिखे। उन्होंने पक्षी बिहार के कर्मचारियों से पूरी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि समान पक्षी बिहार में सीमांकन और बेरिकेटिंग न होने के कारण गणना में कठिनाई होती है। झील का एरिया खुला हुआ है जिससे पक्षियों के लिये सुरक्षित नहीं है। यह वर्ड सेंचुरी के रूप में घोषित है। लेकिन स्थानीय लोगों के साथ चल रहा मामला न निपटने के कारण कठिनाई हो रही है। वेटलैंड को विकसित करने पर ही इसको अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिल पायेगा उसकेे लिये इसको कई मानकों पर परखा जायेगा। वह पक्षियों की गणना का डेटा साउथ एशिया के नई दिल्ली कार्यालय में जमा करेंगे जहाँ से पूरे भारत का डेटा एकत्रित होकर नीदरलैंड जायेगा। वहीं पीएचडी शोधार्थी पक्षी बिहार में पक्षियों की मौजूदगी देखकर खुश दिखे। शोध छात्रा हिमांशी सागर ने बताया कि उन लोगों को समान पक्षी बिहार में अच्छा वातावरण देखकर खुशी हुई। पक्षी बिहार के अनुभव से उन्हें शोध में मदद मिलेगी। इस मौके पर रेंजर सर्वेश भदौरिया मौजूद रहे।

पक्षी बिहार में लाल सूचीबद्ध प्रजाति के पक्षी भी दिखे- टी के राय

– अक्टूबर के सबसे गर्म रहने का प्रभाव पक्षियों पर पड़ा
किशनी। इकोलॉजिस्ट टी के रॉय ने कहा कि 39 में से इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर की केवल सात प्रजातियां लाल-सूचीबद्ध खतरे वाले पक्षियों की सूची में शामिल हैं। जबकि पिछले साल 42 प्रजातियों में आईयूसीएन रेड-लिस्टेड खतरे में पक्षियों की 08 प्रजातियां दर्ज की गई थीं। रविवार को समान पक्षी बिहार में विलुप्त हो रहे। ब्लैक हिडिड आईबिस, फेरोजन स्टार्क, राज्य पक्षी सारस भी दिखाई पड़ा। उन्होंने इन पक्षियों के संरक्षण की बात कही। वॉटर बर्ड वेटलैंड्स के स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतकों में से एक है जो इन प्रजातियों के लिए आदर्श भोजन, आराम, रोस्टिंग और आवास प्रदान करता है। अधिकारियों के अनुसार समान पक्षी बिहार क्षेत्र में निवास करने वाले 93 जातियाँ, शीतकालीन प्रवासी, ग्रीष्मकालीन प्रवासी और मार्ग प्रवासी पक्षी आते हैं। यह 526 हेक्टेयर में फैला हुआ है। जिसमें से वेटलैंड 50 हेक्टेयर में फैला है, जबकि बाकी वुडलैंड, घास का मैदान और दलदली भूमि है। रॉय के अनुसार पिछले वर्ष असामान्य जलवायु परिस्थितियों के कारण परिवर्तन हो सकता है। वर्ष 2019 का अक्टूबर रिकॉर्डेड इतिहास के सबसे गर्म अक्टूबर्स में से एक था। जब प्रवासी पक्षी अक्टूबर से उसे भगाना शुरू करते हैं तो इस साल उन्होंने विविधता में उतार-चढ़ाव देखा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कम संख्या सर्दियों के मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण हो सकती है।