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मीरजापुर के मत्स्य पालकों की बदली किस्मत, पश्चिम बंगाल तक फैला मछली कारोबार

– बेरोजगारों के आंगन में छाई खुशहाली, मिला स्वरोजगार

– मत्स्य पालन कर स्वावलंबी बने मीरजापुर के पांच हजार परिवार

मीरजापुर,  (हि.स.)। मत्स्य पालन कर विंध्य क्षेत्र के युवा स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन सकेंगे। स्वरोजगार के साथ जल स्तर भी सुधरेगा। मछली पालन के क्षेत्र में रोजगार करने के लिए 30 जून तक 1803 युवाओं ने आवेदन किया है। योजना के तहत युवा फिश सीड रियरिंग यूनिट (मछली बीज उत्पादन केंद्र) के साथ बाॅयोफ्लाक विधि से मत्स्य पालन, निजी भूमि पर तालाब निर्माण, फिश शीड मील (आहार), निषाद राज बोट सब्सिडी योजना आदि स्थापित कर सकेंगे।

1045 तालाबों में प्रतिवर्ष होता है 7.5 हजार टन मछली का उत्पादन

विंध्याचल मंडल के मीरजापुर में 32, सोनभद्र में 12 और भदोही में 12 सहित 56 स्थानों पर बाॅयोफ्लाक विधि से मत्स्य पालन हो रहा है। मीरजापुर में ग्रामसभा और निजी सहित कुल 1274 तालाब हैं। इसमें से 1045 तालाबों में मत्स्य पालन हो रहा है। इन तालाबों में रोहू, कतला और नैन मछली का प्रमुखता से उत्पादन किया जा रहा है। साथ ही पंगेशियस (पियासी) मछली के उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है। मीरजापुर में प्रतिवर्ष लगभग साढ़े सात हजार टन मछली का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग साढ़े चार हजार टन मछली की खपत मीरजापुर में होती है। वर्तमान में यहां से वाराणसी, चंदौली, गोरखपुर सहित अन्य गैर जनपद, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों की मंडियों में मछलियों की आपूर्ति की जा रही है।

मत्स्य पालन के लिए आए 1803 आवेदन

मत्स्य सहायक निदेशक राजीव गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मात्स्यिकी परियोजनाओं के लिए मीरजापुर में 1803 लोगों ने आवेदन किया है। वर्तमान में शासन ने अभी तक कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। लक्ष्य निर्धारण के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

 

पूर्वांचल में बढ़ रहे मछली के शौकीन

मत्स्य निरीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग पांच हजार लोग जुड़े हैं। विंध्याचल मंडल समेत पूर्वांचल में मछली के शौकीनों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इसके मद्देनजर मछलियों की खपत को मंडल से ही पूरा करने का लक्ष्य है। मत्स्य पालन विभाग की ओर से स्थानीय स्तर पर ही मत्स्य कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। मत्स्य पालकों को किसानों की तरह क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

फिश सीड रियरिंग यूनिट के साथ बना सकेंगे बाॅयोफ्लक, मिलेगा अनुदान

मत्स्य पालन के लिए फिश सीड रियरिंग यूनिट की स्थापना पर प्रति हेक्टेयर लगभग सात लाख रुपया खर्च आता है। इसमें से सरकार तीन लाख का अनुदान देती है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यूनिट की स्थापना का लक्ष्य शासन से अभी निर्धारित नहीं किया गया है।

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