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मिर्जापुर के विधानसभाओं में सुगबुगाहट शुरू, पुराने को दोबारा मौका या नये लगाएंगे छक्का-चौका


० टीकट के इंतजार में हैं संभावित प्रत्याशी
० चाय पान की दुकानों पर अब होने लगी है चुनावी चर्चा

मिर्जापुर। विधानसभा चुनाव-2022 की आचार संहिता लगने के बाद जनपद के समस्त पांच विधानसभाओं में मतदाताओं के बीच इस बात की सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि पुराने ही विधायकगण इस बार चुनावी मैदान में होंगे या फिर नए चेहरों को भी राजनीतिक दल मौका देंगे।
उल्लेखनीय है कि जनपद में सभी विधायक भाजपा अपना दल एस गठबंधन से ही है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां किसी अन्य दल का खाता भी नहीं खुल पाया था। नगर विधानसभा से पंडित रत्नाकर मिश्र, मड़िहान से रमाशंकर सिंह पटेल, चुनार से अनुराग सिंह और मझवां से शुचिस्मिता मौर्य भाजपा से विजई हुए थे, जबकि 96 विधानसभा से अपना दल (एस) के राहुल प्रकाश कोल ने बाजी मारी थी।

इस बार विधानसभा चुनाव की फिजां बदल चुकी है और राजनीतिक दलों में टिकट वितरण के जिम्मेदार भी लंबे समय से प्रत्याशियों के कामकाज और जातिगत सर्वे की समीक्षा करते हुए निर्णय लेने जा रहे हैं। हालांकि जिले के सभी सीटिंग विधायक अपने अपने क्षेत्र में पूरी तन्मयता से संपर्क में जुटे हैं और केंद्र व प्रदेश सरकार के विकास कार्यों के दम पर खुद को एक बार फिर जीताने की अपील कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के रिपोर्ट कार्ड में इन्हें कितना नंबर मिलता है, यही भविष्य के गर्त में है। हालांकि प्रदेश में सिटिंग विधायकों में से कई ऐसे चेहरे हैं, जिनकी किसी न किसी कारण से इस बार पत्ता साफ होना माना जा रहा है। बहरहाल इस बार भारतीय जनता पार्टी से नगर विधानसभा क्षेत्र में सिटिंग विधायक रत्नाकर मिश्र सहित भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मनोज श्रीवास्तव, चेयरमैन मनोज जायसवाल, चिन्मयानंद की पत्नी प्रियंका पांडेय, भाजपा किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेति राजेश सिंह समेत कई चेहरे समर में कूदने को तैयार हैं, तो वहीं मझवां विधानसभा क्षेत्र में सिटिंग विधायक शुचिस्मिता मौर्य, वरिष्ठ भाजपा नेता उत्तर कुमार मौर्य, 42 साल तक भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में विभिन्न दायित्व पर जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके एवं लखनऊ में भाजपा की सदस्यता लिए सोहन लाल श्रीमाली, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह आदि क्षेत्र में सक्रिय हैं।

चुनार विधानसभा में सिटिंग विधायक अनुराग सिंह के अलावा वंदना सिंह पत्नी विवेकानंद सिंह, संजय भाई पटेल आदि रण में कूदने को तैयार हैं। मड़िहान विधानसभा में सिटिंग विधायक रमाशंकर सिंह पटेल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष एवं एमएलसी चुनाव 2010 में प्रदेश में सर्वाधिक मत पाने के बाद भी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह से पराजित हुए विंध्य भूषण एवं जनपद के मालवीय उपाधिख्यात डाॅ जगदीश सिंह पटेल सहित कई अन्य प्रयासरत है। हालांकि 2017 की तरह हुआ तो जिले की कोई एक या अधिक सीट अद एस को भी मिल सकती है। ऐसे में कई परिवर्तन के भी आसार हैं कि तैयारी कोई और कर रहा हो और टीकट गठबंधन दल को मिल जाय, इससे उस विधानसभा में संभावित उम्मीदवार की गयी सारी तैयारी धरी की धरी रह जाय। ऐसे में देखना यह है कि भाजपा एवं गठबंधन अपना पत्ता किसके किसके नाम खोलता है।समाजवादी पार्टी की बात करें, तो नगर विधानसभा से पूर्व राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभावती यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष आशीष यादव, इलियास खान जनता के बीच है और चुनावी समय के लिए आतुर हैं।

मझवां से विनोद कुमार बिंद और रोहित शुक्ला लल्लू हैं। चुनार से पूर्व विधायक जगदंबा सिंह पटेल, हाल ही में सपा की सदस्यता लिए रामराज सिंह पटेल, युवा नेता सुनील सिंह पटेल और जिला पंचायत सदस्य पंकज उपाध्याय भी प्रयासरत हैं। मड़िहान से शैलेश पटेल और सत्येंद्र पटेल सहित अन्य चेहरे हैं। वहीं बहुजन समाज पार्टी से मझवां विधानसभा से पुष्पलता बिंद लंबे समय से प्रचार प्रसार में है। पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र ने इनके आवास पर पहुंचकर एक कार्यक्रम के दौरान इनकी घोषणा भी की थी। मड़िहान विधानसभा मे नरेंद्र कुशवाहा भी जनता के बीच लगातार संपर्क में बने हैं। माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व से फाइनल होने के बाद ही तमाम संभावित उम्मीदवार मतदाताओं के बीच जाएंगे। वहीं अन्य दलों राष्ट्रीय लोकदल से रवींद्र पटेल भी चुनार क्षेत्र में दिन रात एक किये हुए हैं। कांग्रेस की ओर से भी सभी विधान सभाओं में कई चेहरे जनता के बीच है और टीकट घोषित होने के इंतजार में हैं। अब देखना यह है कि राजनीतिक दलों के टीकट बंटवारे में किन किन को मिलती है चुनावी समर में कूदने की परमिट। मैदान में आते हैं नये चेहरे या पुराने प्रत्याशियों को एक बार फिर राजनीतिक दलों द्वारा मौका दिया जाता है। बहरहाल जो भी हो, यह तो भविष्य के गर्त में है।

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