महोली विधानसभा : कौन जीतेगा बाजी, कौन बनेगा किसका मांझी

चुनाव में अब सिर्फ तीन दिन शेष, जीत के लिए करना पड़ेगा विशेष

महोली-सीतापुर। कहते हैं सियासत की अपनी जुबां होती है। जीत के लिए शाम दाम दंड भेद सभी हथकंडे अपनाने पड़ते हैं। इसी तर्ज पर हर दल कार्य कर रहा है। आमजन के दिलों को जीतने की जंग अभी जारी है। जिसके लिए प्रत्याशी जनता की हर ख्वाहिश को पूरा करने का आश्वासन दे रहे हैं। जनता भी चुनाव के दौरान प्रत्याशी से भड़ास निकालने में पीछे नही है। बात महोली विधान सभा की हो तो यहां भाजपा व सपा की चर्चा के सामने अन्य सभी दल काफी पीछे नजर आ रहे हैं।

मजे की बात यह है महोली विधानसभा में पिछले मुकाबले में भी भाजपा व सपा के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। ऐसा लगता है एक फिर ऐसा ही कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता हैं। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा व सपा को छोड़कर अन्य पार्टियों ने अपने पुराने चेहरे बदल दिए हैं। सपा व भाजपा में प्रत्याशी को लेकर यथास्थिति बनी हुई है। बात उस समय की है जब महोली विधानसभा हरगांव में आती थी। यहां से बसपा प्रत्याशी रामहेत भारती लगातार दो बार चुनाव जीतने में सफल हुए थे। महोली विधानसभा के सृजन होने के बाद। रामहेत भारती ने तीसरी बार हरगांव विधानसभा से चुनाव जीतकर जीत की हैट्रिक लगायी थी। इस बार रामहेत भारती सपा में चले गए और सपा ने उन्हें हरगांव विधानसभा का प्रत्याशी बनाया है। यहां पर रामहेत भारती महोली विधानसभा में सपा के मांझी बन सकते हैं। रामहेत भारती का महोली विधानसभा में काफी प्रभाव है।

खासकर वह दलितों के मसीहा माने जाते रहे हैं। रामहेत भारती की वजह से दलित वोट का रुख सपा की तरफ मुड़ सकता है। महोली विधानसभा का सृजन होने के बाद अभी तक दो चुनाव हुए हैं। दोनों चुनावों में बसपा ने जीत भले दर्ज न की हो, लेकिन उसे दोनों बार 60 हजार से अधिक मत मिले हैं। हालांकि इस दौरान बसपा से प्रत्याशी ब्रह्मण चेहरा महेश मिश्रा के रूप में था। महेश मिश्रा भी महोली विधानसभा के प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक हैं। इस बार महेश मिश्रा भाजपा प्रत्याशी शशांक त्रिवेदी के लिए समर्पित हैं। भाजपा की इस कड़ी में दूसरा नाम गया प्रसाद मिश्रा का है। गया प्रसाद मिश्रा सन 2012 में कांग्रेस से चुनाव लड़े थे। उन्हें भी 30 हजार के आसपास वोट मिले थे। इस कड़ी में तीसरा नाम जितिन प्रसाद का है। जितिन प्रसाद धौरहरा लोकसभा से कांग्रेस पार्टी के सांसद रह चुके हैं। उनका भी महोली के प्रभावशाली व्यक्तियों में नाम गिना जाता है। इन तीनों के एक साथ एक मंच पर आ जाने से भाजपा की जड़े मजबूत हो गयी हैं। ये तीनों भी मांझी बनकर भाजपा की नैया पार लगा सकते हैं।

बता दें कि पिछले चुनावों में बसपा को मिला वोट इस बार निर्णायक भूमिका अदा कर सकता है। दरअसल, इस बार बसपा की रफ्तार कुछ सुस्त दिख रही है। जिससे ये माना जा रहा है बसपा का वोट बैंक खिसक रहा है। उस वोट पर हर दल की निगाहें टिकी हुई हैं। उधर, सपा में रामहेत भारती इधर भाजपा में महेश मिश्रा, गया प्रसाद मिश्र व जितिन प्रसाद की तिकड़ी कोई तिकड़म कर सकती है। बहरहाल, विधानसभा का मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है। जिसमें भाजपा व सपा के बीच कांटे की टक्कर देखी जा रही है। ऊंट किधर भी करवट बैठ सकता है। फिलहाल बाजी जीतने के लिए दलों को कुछ विशेष करना होगा।