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बरेली मंडल की तीन राइस मिलों ने दबाए 10 करोड़, मुकदमा दर्ज

बरेली।  उत्तर प्रदेश में बरेली मंडल की तीन राइस मिलों पर दस करोड़ रूपये के चावल घोटाले का मुकदमा दर्ज किया गया है। धान खरीद के पिछले वित्तीय सत्र में केंद्रों पर खरीदा गया धान कूटने के लिए राइस मिलों को दिया गया था। राइस मिल मालिकों को दिए गए धान का 67 फीसद के हिसाब से चावल का उतार गोदामों में करना था। तीन राइस मालिकों ने चावल का उतार नहीं किया था। पिछले साल धान खरीद के बाद चावल निकालकर सरकारी गोदाम तक नहीं पहुंचाने में मंडल की तीन राइस मिलों को सीज कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। तीनों राइस मिल पर 10.55 करोड़ की देनदारी है।

संभागीय विपणन अधिकारी राममूर्ति वर्मा ने बताया कि पुरनपुर की जसवंती राइस मिल की पार्टनर जगमोहन राय की पत्नी रजनी अग्रवाल और विजय अग्रवाल की पत्नी चमन अग्रवाल पर चावल को गबन करने की रिपोर्ट कराई गई। राइस मिल मालिक पर 4.25 करोड़ रुपये कीमत का 1695 टन चावल हड़पने का आरोप है। चावल उतार को क्रय एजेंसी की ओर से 12 व 25 मार्च, नौ अप्रैल, 16 जून 2021 को सीएमआर जमा करने का नोटिस दिया गया था। इसके बाद एक और सात सितंबर को सीएमआर( कस्टम मिल राइस ) के मूल्य की धनराशि जमा करने का नोटिस दिया गया, मगर धनराशि जमा नहीं की गई। आठ सितंबर को मिल में चावल का स्टाक न मिलना पाया गया था। इसके बाद राइस मिल को कुर्क कर लिया गया था। वर्मा ने बताया कि सीएमआर का चावल हड़पने वाले राइस मिलरों की कुर्क संपत्ति का मूल्यांकन करा लिया गया है।

अब कुर्क राइस मिलों की संपत्ति का सत्यापन और मूल्यांकन करा लिया गया है। इनकी नीलामी 31 दिसंबर को सम्बंधित तहसील में कराई जाएगी। इसी प्रकार तिलहर की गोविंद राइस मिल पर 730 टन धान जिसकी कीमत 2.16 करोड़ रुपये है, हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसके बाद मिल मालिक गिरफ्तारी व स्टे के लिए हाईकोर्ट भी गया। जहां न्यायालय ने 31 दिसंबर तक रुपये जमा करने के निर्देश दिए हैं। इसी प्रकार फतेहगंज पूर्वी की राइस मिल मैसर्स साद इंपैक्स प्राइवेट लिमिटेड को पांच क्रय केंद्रों का 55520.40 क्विटल चावल बनाने को धान दिया था। जब सत्यापन रिपोर्ट तैयार हुई तो जांच में पता चला कि 1341.818 टन चावल का गबन किया गया है। चावल की रिकवरी को कई नोटिस जारी हुए। मिलर ने 4.14 करोड़ रुपये का चावल का गबन कर लिया। दबाव बनाने पर राइस मिलर ने केवल 54 लाख रुपये ही जमा किए। जबकि शेष घनराशि देने से मना कर दिया जिसके बाद साद इंपैक्स के मालिक आशीष मोहन के खिलाफ 420, आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया।

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