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तिकुनिया खीरी : बाघ द्वारा मारे गए लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन?

तिकुनिया खीरी।  बाघ एकाएक उग्र और हिंसक हो गया एक के बाद एक एक कर उसने लगभग दो दर्जन इंसानी जिन्दगियों को मौत के घाट उतार दिया और वन विभाग एक ही बात कहकर अपना पल्ला झाड़ता रहा कि पता लगाया जा रहा है कि की बाघ ने हिंसक रास्ता क्यों अपनाया कभी कैमरा टैपिंग कभी हाथियों से मॉनिटरिंग तो कभी ये कहते हुए सुना गया कि लोग खेतों में न जाए अपनी सुरक्षा खुद करें एक जान की कीमत पांच लाख रुपए वन विभाग देकर अपने को बेगुनाह साबित करता रहा।
अब सवाल उठता है कि बाघ द्वारा मारे गए लोगों की मौत का जिम्मेदार वन विभाग नही तो कौन वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि बाघ जब वन्यजीवों का शिकार करने में सक्षम नहीं रहता या फिर बूढ़ा हो जाता या कहीं चोट या जख्म हो जाता है इसके अलावा जंगल या जंगल के बाहर मानव शरीर का कोई अंग पा जाता है उसे खाकर वो मानवभक्षी हो जाता है क्योंकि वन्यजीव के मुकाबले मानव का शिकार करना आसान हो जाता है जबकि प्रकृति ने बाघ को मानवभक्षी नहीं बनाया वन विभाग को चाहिए था कि जब पहली बार उत्तर निघासन के मंझरा पूरब के बाघ ने एक युवक को मारा था उसी समय वन विभाग संवेदनशीलता दिखाते हुए पता लगाने की कोशिश करता किन कारणों से बाघ हिंसक व मानवभक्षी हुआ है,उस समय वन विभाग ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जंगल किनारे मवेशी चराने क्यों गया अगर वन विभाग सजग हो जाता तो आज बीस जानें न जाती।

या फिर पांच मौतों के बाद ही बाघ को आदमखोर घोषित कर पकड़ने की रणनीति तैयार की जाती तो आज 15 परिवार न उजड़ते आखिर इसका जिम्मेदार वन विभाग नहीं तो कौन। जानकार बताते हैं कि बाघ जब एक बार मानव का मांस खा लेता है उसके बाद वो मानव के शिकार की तलाश में रहता है, जबकि बाघ द्वारा पांच लोगों को मारने के बाद उसे आदमखोर घोषित कर किसी शोधघर में पकड़कर छोड़ा जाय लेकिन वन विभाग ने एक के बाद एक-एक कर लगभग दो दर्जन इंसानी जिंदगियों को बाघ द्वारा मौत के घाट उतारने के बाद कुम्भकर्णीय नीदं से जागा और बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की रणनीति बनाई वन विभाग बाघ को पकड़ने की रणनीति बनाता ही रहा इस बीच बाघ ने दो और लोगों का शिकार कर लिया जबकि वन विभाग बाघ को जल्दी पकड़ने का दावा करता रहा वन विभाग का दावा खोखला साबित होता देख इलाके के लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
इस सम्बंध में वन्यजीव संरक्षक/फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि वन विभाग लगातार बाघ की मॉनिटरिंग कराता रहा कैमरे लगाए गए प्रशिक्षित हाथियों के साथ वन विभाग की कई टीमों को बाघ पकड़ने के लिए लगाया गया है धैर्य से काम ले बहुत जल्द बाघ पकड़ा जाएगा।
वन विभाग के सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक
कैमरा टैपिंग व फिंगर प्रिंट में एक नहीं दो बाघिन की पुष्टि हुई है जिससे वह विभाग व इलाके के लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
वन विभाग के सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक दो बाघिन होने के सुबूत मिले हैं सूत्रों के मुताबिक मामले की गम्भीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन्यजीव संरक्षक(पीसीएफ वाइल्डलाइफ चीफ) केपी दुबे ने वन विभाग को दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि सभी टीमें बाघिन को पकड़ने के लिए युद्ध स्तर पर जुट जाएं और किसी भी ग्रामीण को जंगल के किनारे तक व संदिग्ध जगहों पर भी न जाने दिया जाय जब तक बाघिन पकड़ी नहीं जाती तब तक लोग सुरक्षा की नजर से वन विभाग की टीम का सहयोग करें वन्यजीव संरक्षक/फील्ड डायरेक्टर तथा डिप्टी डायरेक्टर बफरजोन सुंदरेशा लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, बाकी वन विभाग की टीम में दुधवा के डॉ दयाशंकर ट्रेंकुलाइज टीम की व रेंजर विमलेश कुमार अपनी टीम के साथ पिंजरे में बाघ को लाने की कोशिश में साथ ही चार हाथियों की टीम बाघ की लोकेशन व ट्रेसिंग में लगी हुई है। वन्यजीव संरक्षक/फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का मानना है कि बहुत जल्द उनकी टीम को सफलता मिलेगी।

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