गोरखपुर : पूर्वांचल, बिहार, नेपाल के सात करोड़ लोगों को मिल रहा एम्स से लाभ

गोरखपुर । कभी पूर्वांचल में इलाज का रोना था वही आज स्थितियां बदली और काफी राजनीतिक उठापटक के बाद आखिरकार गोरखपुर में एम्स की स्थापना हुई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल पर मरीजों के बोझ को इस नव निर्मित एम्स ने काफी हद तक कम कर दिया है।एम्स की ओपीडी में इलाज कराकर निकलने वाले बीमार और उनके तीमारदार काफी सुकून महसूस कर रहे हैं। बीमारों और उनके तीमारदारों का कहना है कि यह एम्स गांव-गिरांव की गरीब जनता के लिए काफी मुफीद साबित हो रहा है। गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज यहां हो रहा है। लोगों को सुविधाएं तो मिल ही रही है आर्थिक बोझ भी कम पड़ रहा है।गोरखपुर एम्स में अभी 14 विभागों का बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) चल रहा है। इनमें नाक, कान व गला रोग, मानसिक रोग, दंत रोग, बाल रोग, सीना रोग, सर्जरी, चर्म रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास, नेत्र रोग, रेडियोथेरेपी (कैंसर रोग), मेडिसिन, फेमिली मेडिसिन व हड्डी रोग विभाग शामिल हैं। यहां गंभीर रूप से बीमार इलाज कराने के लिए आ रहे हैं।

रोजाना ओपीडी में अलग-अलग जिलों से 1200 से अधिक मरीज आ रहे हैं। कोविड 19 के चलते गोरखपुर एम्स में कुछ समय पहले तक ऑपरेशन नहीं हो रहा था लेकिन अब बीमारों की भर्ती दुबारा से शुरू हो गई है।बरहज से इलाज कराने आईं देवी से शनिवार को ‘हिन्दुस्तान ने बातचीत की। यह जानने की कोशिश की कि गोरखपुर एम्स में मिलने वाली सुविधाओं का हाल क्या है! उन्होंने कहा कि डॉक्टर साहब ने बहुत बढ़ियां से उनकी जांच की। उन्होंने काफी समय दिया और एक-एक बात सुनी। उन्होंने कहा कि वह पहली बार गोरखपुर एम्स में इलाज कराने आई थीं। यहां आकर उन्होंने सुकून महसूस किया। कुशीनगर से इलाज कराने आए देवनाथ ने बताया कि उनकी कमर में काफी परेशानी थी। कई जगह इलाज कराए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।एम्स की ओपीडी में इलाज कराने आए थे। चिकित्सक ने काफी आराम से उनकी बात सुनी। कहा कि घबराने की बात नहीं है। उन्होंने कुछ व्यायाम बताया। दवाइयां दी और भरोसा दिलाया कि आराम मिल जाएगा। दवाइयों से आराम मिले या न मिले लेकिन डॉक्टर के व्यवहार से उनका काफी दर्द दूर हो गया।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में परास्नातक (पीजी) की पढ़ाई की तैयारी शुरू हो गई है।

इसी सत्र से पढ़ाई शुरू हो सके, इसलिए 21 विभागों के कोर्स स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वीकृति के लिए भेज दिए गए हैं। कोर्सों पर मंत्रालय की मुहर लगने का इंतजार है। एम्स प्रबंधन ने उम्मीद जताई है कि शीघ्र ही स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद सीटें निर्धारित होंगी। इसी सत्र से पीजी की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है।एम्स में अभी 14 विभागों का बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) चल रहा है। इनमें नाक, कान व गला रोग, मानसिक रोग, दंत रोग, बाल रोग, सीना रोग, सर्जरी, चर्म रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास, नेत्र रोग, रेडियोथेरेपी (कैंसर रोग), मेडिसिन, फेमिली मेडिसिन वह हड्डी रोग विभाग हैं। इनके अलावा एनेस्थीसिया, फिजियोलाजी, बायोकेमेस्ट्री, पैथोलाजी, फार्माकोलाजी, फोरेंसिक, माइक्रोबायोलाजी के कोर्स की स्वीकृति मांगी गई है।

मीडिया प्रभारी डॉ. शशांक शेखर ने बताया कि कोर्स की सूची भेज दी गई है।गोरखपुर एम्स की चिकित्सकीय सुविधाओं का फायदा पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, झारखंड और नेपाल तक के लोगों को मिल रहा है। चिकित्सकों के अनुमान के मुताबिक करीब सात करोड़ की आबादी के लिए विश्वस्तरीय विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के किए यह एम्स सबसे बड़ा केंद्र बना है। एम्स की व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि जो मरीज एम्स में पंजीकृत नहीं हैं, वह भी ऑनलाइन पंजीकृत हो सकते हैं। पंजीकरण शुल्क 20 रुपये और ओपीडी में नंबर लगाने के लिए प्रति विभाग 10 रुपये जमा करने होंगे।